पाठ का सार: भारत एक नदीप्रधान देश है। यहाँ अनेक नदियाँ हिमालयादि पर्वतों से प्रादुर्भूत होकर विभिन्न क्षेत्रों को उपकृत और अभिसिञ्चित करती हुई समुद्र में जाकर मिल जातीं हैं। अपने सांस्कृतिक महत्त्व के साथ-साथ नदियाँ भौतिक रूप में हमारे लिए अनेक प्रकार से उपयोगी हैं। ये नदियाँ खेतों की सिंचाई, पेयजल, विद्युत् उत्पादन आदि के माध्यम से हमारा उपकार करतीं हैं। अपने इन्हीं मातृवत् गुणों के कारण भारतीय परंपरा में नदियों को माता के समान पूज्य माना गया है।
मूल संस्कृत पाठ एवं पैराग्राफ-वाइज हिन्दी अनुवाद
अस्माकं भारतदेशः अतीव विशालः अस्ति। अत्र बहवः गिरयः सन्ति। तेषु केचन अत्युन्नताः। केचन नात्युन्नताः। ते गिरयः मेघकलापं धृत्वा वृष्टिं सम्पादयन्ति। तेन अनेकाः नद्यः प्रवहन्ति।
अनुवाद: हमारा भारत देश बहुत विशाल है। यहाँ बहुत से पर्वत हैं। उनमें से कुछ बहुत ऊंचे हैं। कुछ बहुत ऊंचे नहीं हैं। वे पर्वत बादलों के समूह को रोककर वर्षा करते हैं। उससे अनेक नदियाँ बहती हैं।
अनेकासु नदीषु महानदी, गोदावरी, कावेरी, कृष्णा च पूर्वसमुद्रं प्रति प्रवहन्ति। इतराः साबरमती, ताप्ती, नर्मदा च पश्चिमसमुद्रं प्रति प्रवहन्ति।
अनुवाद: अनेक नदियों में महानदी, गोदावरी, कावेरी और कृष्णा पूर्वी समुद्र (बंगाल की खाड़ी) की ओर बहती हैं। दूसरी साबरमती, ताप्ती और नर्मदा पश्चिमी समुद्र (अरब सागर) की ओर बहती हैं।
काश्चन यथा भागीरथी, कालिन्दी, गण्डकी, कौशिकी च हिमालयशिखरेभ्यः प्रभवन्ति। पुरा सरस्वती नदी अपि पश्चिमसमुद्राभिमुखम् एव प्रवहति स्म, परन्तु अद्य अस्याः चिह्नानि एव यत्र तत्र प्रवाहमार्गे प्राप्यन्ते।
अनुवाद: कुछ जैसे भागीरथी (गंगा), कालिंदी (यमुना), गंडकी और कौशिकी (कोसी) हिमालय की चोटियों से निकलती हैं। प्राचीन काल में सरस्वती नदी भी पश्चिमी समुद्र की ओर ही बहती थी, परंतु आज इसके प्रवाह मार्ग में जहाँ-तहाँ केवल निशान (अवशेष) ही प्राप्त होते हैं।
अन्यासां नदीनां मध्ये वितस्ता, झेलम, चन्द्रभागा, इरावती, विपाशा, शुतुद्रुः च हिमालयात् प्रभवन्त्यः पञ्चनदप्रान्ते वहन्ति। भारतस्य मध्यप्रान्ते चर्मण्वती वेत्रवती च नद्यौ प्रसिद्धे स्तः।
अनुवाद: अन्य नदियों में वितस्ता (झेलम), चंद्रभागा (चिनाब), इरावती (रावी), विपाशा (व्यास) और शुतुद्रु (सतलुज) हिमालय से निकलती हुई पंजाब (पञ्चनद) प्रांत में बहती हैं। भारत के मध्य प्रांत (मध्य प्रदेश) में चंबल (चर्मण्वती) और बेतवा (वेत्रवती) दो नदियाँ प्रसिद्ध हैं।
पुराणकालात् आरभ्य सर्वे भारतीयाः नदीनां सम्मानं कुर्वन्ति। क्षेत्रेषु सलिलसेचनेन नद्यपि मातेव भवति। अत एव यानि क्षेत्राणि नदीजलेन प्लावितानि तानि नदीमातृकाणीति प्रसिद्धानि यानि च वृष्टिजलेन सिक्तानि तानि देवमातृकाणि इति।
अनुवाद: पुराण काल से लेकर सभी भारतीय नदियों का सम्मान करते हैं। खेतों में जल सींचने से नदी भी माता के समान होती है। इसलिए जो खेत नदी के जल से सींचे जाते हैं वे 'नदीमातृक' (नदियाँ हैं माता जिनकी) नाम से प्रसिद्ध हैं और जो वर्षा के जल से सींचे जाते हैं वे 'देवमातृक' (वर्षा पर आधारित) कहलाते हैं।
वर्षाकाले वृष्टिपातेन नद्याः जलेन च कृषिक्षेत्राणि प्लावितानि भवन्ति। कृषकाः कृषिकार्यं कृत्वा अन्नोत्पादनं कुर्वन्ति। नदीषु विविधाः मत्स्याः निवसन्ति।
अनुवाद: वर्षा ऋतु में बारिश से और नदी के जल से कृषि क्षेत्र (खेत) सिंचित हो जाते हैं। किसान खेती का कार्य करके अन्न का उत्पादन करते हैं। नदियों में विभिन्न प्रकार की मछलियाँ निवास करती हैं।
येषु प्रदेशेषु अनावृष्टि-कारणेन जलाभावात् कृषिः न प्रारभ्यते तत्र शासनाधिकारिणः नद्याः जलं प्रतिरुध्य सेतुं बद्ध्वा महाजलाशयान् निर्माय जलसञ्चयं कुर्वन्ति। तेभ्यः जलाशयेभ्यः क्षेत्रेषु जलं वितरन्ति। साम्प्रतं महानगरे नद्याः जलमेव प्रतिगृहं सर्वकारेण सम्प्रेष्यते।
अनुवाद: जिन प्रदेशों में वर्षा न होने के कारण जल के अभाव से कृषि शुरू नहीं हो पाती, वहाँ सरकारी अधिकारी नदी के जल को रोककर, बांध बनाकर, बड़े जलाशय बनाकर जल का संचय करते हैं। उन जलाशयों से खेतों में जल बाँटते हैं (सिंचाई करते हैं)। इस समय महानगरों में सरकार के द्वारा नदी का जल ही प्रत्येक घर में भेजा जाता है।
नद्यां बन्धं निर्माय तस्मात् विद्युतम् उत्पादयन्ति। एषा जलमूला विद्युत् 'हाइड्रो इलेक्ट्रिकपावर' इति नाम्ना प्रसिद्धा। भोः पश्यत! नद्यः देशस्य कीदृशमुपकारं कुर्वन्ति। अत एव जनाः ताः पूजयन्ति।
अनुवाद: नदी पर बांध बनाकर उससे बिजली पैदा करते हैं। यह जल से उत्पन्न बिजली 'हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर' के नाम से प्रसिद्ध है। अरे देखो! नदियाँ देश का कैसा (कितना बड़ा) उपकार करती हैं। इसलिए लोग उनकी पूजा करते हैं।
स्वगृहेषु अधुनाऽपि जनाः स्नानसमये सर्वासां नदीनां सान्निध्यं स्नानजले प्रार्थयन्ते।
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति ।
नर्मदे सिन्धुकावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ।।
अनुवाद: अपने घरों में आज भी लोग नहाते समय अपने स्नान के जल में सभी (पवित्र) नदियों की उपस्थिति की प्रार्थना करते हैं।
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी! आप सभी मेरे इस (स्नान के) जल में निवास करें (उपस्थित हों)।
शब्दार्थ (Word Meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिंदी अर्थ (Hindi) | English Meaning |
|---|---|---|
| अतीव | बहुत अधिक | Very / Extremely |
| गिरयः | अनेक पहाड़ | Mountains |
| केचन | कुछ | Some |
| मेघकलापम् | बादलों के समूह को | Cluster of clouds / Mass of clouds |
| इतराः | दूसरी | Others |
| सलिलसेचनेन | जल के द्वारा सींचने से | By irrigation with water |
| नदीमातृकाणि | नदियाँ हैं माता जिनकी (वे क्षेत्र) | Lands nourished by rivers / River-fed regions |
| देवमातृकाणि | वर्षा पर आधारित (खेत) | Rain-fed lands / God-given rain |
| अनावृष्टिकारणेन | वर्षा न होने के कारण | Due to lack of rainfall |
| साम्प्रतम् | इस समय | At present / Nowadays |
| सम्प्रेष्यते | भेजा जाता है | Is supplied |
| धृत्वा | धारण करके (रोककर) | Holding |
| प्रवाहमार्गे | बहाव के रास्ते में | On the flow path |
| प्रतिगृहम् | प्रत्येक घर में | To every house |
| नाम्ना | नाम से | By the name of |
अभ्यास कार्य (प्रश्न-उत्तर)
१. सत्यम्/असत्यम् लिखत (सही/गलत)
क. गोदावरी नदी पश्चिमसमुद्रं प्रति वहति।
उत्तरम्: असत्यम् (गोदावरी पूर्वसमुद्रं प्रति वहति)
ख. नद्यः कृषिकार्याय जलं प्रयच्छन्ति।
उत्तरम्: सत्यम्
ग. बन्धं निर्माय जलात् विद्युत् उत्पाद्यते।
उत्तरम्: सत्यम्
घ. सरस्वती नदी अद्यापि स्वपूर्णप्रवाहेण प्रवहन्ती दृश्यते।
उत्तरम्: असत्यम्
ङ. भारतवासिनः प्राचीनकालादेव नदीनां सम्मानं कुर्वन्ति।
उत्तरम्: सत्यम्
२. पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत (पूर्ण वाक्य में उत्तर दें)
क. भारतस्य मध्यप्रान्ते के नद्यौ प्रसिद्धे स्तः?
उत्तरम्: भारतस्य मध्यप्रान्ते चर्मण्वती वेत्रवती च नद्यौ प्रसिद्धे स्तः।
ख. काः नद्यः पूर्वसमुद्रं प्रति प्रवहन्ति?
उत्तरम्: महानदी, गोदावरी, कावेरी, कृष्णा च पूर्वसमुद्रं प्रति प्रवहन्ति।
३. नदीनां उपयोगिता (नदियों के उपयोग - पाठ आधारित)
पाठ में वर्णित नदियों के प्रमुख लाभ:
- १. कृषिक्षेत्राणां प्लावनम् (खेतों की सिंचाई)
- २. जलसञ्चयः (पीने आदि के लिए जल संचय)
- ३. सेचनम् (सिंचाई)
- ४. मत्स्यानां निवासः (मछलियों का आवास)
- ५. जलमूला विद्युत् (हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर / बिजली उत्पादन)

