जाड़े का संस्कृत गीत: शैत्य: काल: अतिरमणीय:

Sooraj Krishna Shastri
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|| शैत्य: काल: अतिरमणीय: ||

(मनमोहक शीत ऋतु)

भूमिका

प्रकृति का हर रूप सुंदर है, लेकिन शीत ऋतु (सर्दी) की अपनी अलग ही छटा होती है। ओस की बूंदें, पीली सरसों से लहलहाते खेत और गुनगुनी धूप मन को मोह लेती है। आचार्य सूरज कृष्ण शास्त्री जी द्वारा रचित यह संस्कृत गीत शीत काल के इसी रमणीय सौंदर्य का सजीव चित्रण करता है।

Sheet Kaal
❄️ ❄️ ❄️

शैत्य: काल: अतिरमणीय:।।
शैत्य: काल: अतिरमणीय:।।

शीतो आप: शीतो वातम्
पत्रतुषार: मणिवत् रम्यम्।

Dew Drops

अनलातपौ जनै: वरणीय:
शैत्य: काल: अति रमणीय: ।।

Fire

पीतं पीतं सर्षपपुष्पम्
पीतमयी वसुधा अति दिव्यम् ।

Mustard Flowers

कुहकमयं खं किं कथनीय:
शैत्य: काल: अतिरमणीय: ।।

Winter Sun
रचनाकार: सूरज कृष्ण शास्त्री

।। शुभं भवतु ।।

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