चिन्ता vs चिता: जीवन का कटु सत्य
सजीवं दहते चिन्ता निर्जीवं दहते चिता ॥
Sajīvaṃ dahate cintā nirjīvaṃ dahate citā ||
📝 अनुवाद (Translation)
हिन्दी: चिंता और चिता में केवल एक 'बिंदु' (अनुस्वार) का ही अंतर है। परन्तु दोनों के कार्य में बहुत बड़ा भेद है—चिता तो निर्जीव (मरे हुए) शरीर को जलाती है, किन्तु चिंता सजीव (जीवित) व्यक्ति को जला डालती है।
English: There is only a difference of a single 'dot' (Bindu) between 'Chinta' (Worry) and 'Chita' (Funeral Pyre). However, 'Chita' burns the dead body, whereas 'Chinta' burns the living person.
📖 शब्दार्थ (Word Meanings)
- चिन्तायाः (Cintāyāḥ) : चिंता का (Of worry/anxiety)
- चितायाः (Citāyāḥ) : चिता का (Of funeral pyre)
- बिन्दुमात्रं (Bindumātraṃ) : केवल एक बिंदु का (Only a dot/point)
- विशेषता (Viśeṣatā) : अंतर / विशेषता (Difference/Distinction)
- सजीवं (Sajīvaṃ) : जीवित को (The living one)
- दहते (Dahate) : जलाती है (Burns)
- निर्जीवं (Nirjīvaṃ) : मरे हुए को / बेजान को (The lifeless/dead)
🔍 व्याकरणात्मक विश्लेषण (Grammar)
- सन्धि: चिन्तायाश्च = चिन्तायाः + च (विसर्ग सन्धि - सत्व)।
- धातु रूप: दहते – यहाँ 'दह' धातु का प्रयोग 'आत्मनेपद' में किया गया है। यह दर्शाता है कि चिंता का प्रभाव जलाने वाले (चिंता करने वाले) पर ही पड़ता है। यह एक आंतरिक जलन (Internal Burning) है।
- अलंकार: यहाँ 'यमक' (Wordplay) और 'व्यतिरेक' (Contrast) अलंकार का सुंदर प्रयोग है।
🌍 आधुनिक सन्दर्भ (Modern Context)
चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) भी मानता है कि 90% बीमारियाँ 'Psychosomatic' होती हैं, यानी वे मन की चिंता से शरीर में उत्पन्न होती हैं। ब्लड प्रेशर, शुगर, और हृदय रोग—ये सब आधुनिक "चिंता" की ही देन हैं। श्लोक हमें चेतावनी देता है कि Overthinking (अत्यधिक सोचना) धीमे जहर के समान है।
💡 संवादात्मक नीति कथा (Parable)
पानी का गिलास (The Glass of Water)
एक गुरु ने कक्षा में पानी का आधा भरा गिलास उठाया और पूछा, "यह कितना भारी है?"
छात्रों ने अलग-अलग उत्तर दिए।
गुरु मुस्कुराए और बोले: "इसका असली वजन मायने नहीं रखता। मायने यह रखता है कि मैं इसे कितनी देर तक पकड़े रहता हूँ।
1 मिनट पकड़ूँ, तो कुछ नहीं होगा।
1 घंटा पकड़ूँ, तो हाथ में दर्द होगा।
और अगर 1 दिन तक पकड़े रहूँ, तो मेरा हाथ लकवाग्रस्त (Paralyzed) हो जाएगा।"
निष्कर्ष: 'चिंता' (Worry) भी इस गिलास की तरह है। थोड़ी देर सोचो तो ठीक है, लेकिन अगर उसे दिन भर मन में पकड़े रहोगे, तो वह तुम्हें अंदर से जला देगी और पंगु (Paralyzed) बना देगी। गिलास को नीचे रखना सीखो।
🎯 निष्कर्ष (Conclusion)
हमें 'चिंता' (Worry) को 'चिंतन' (Contemplation) में बदलना चाहिए।
- चिंता: "हाये! अब क्या होगा?" (समस्या केंद्रित)
- चिंतन: "अब मुझे क्या करना चाहिए?" (समाधान केंद्रित)
अतः मन में समस्या को आने दें, लेकिन उसे घर न बनाने दें। समाधान खोजें और आगे बढ़ें।

