दीर्घ सन्धि (Dīrgha Sandhi)
1. पाणिनीय सूत्र (Sutra)
सूत्र: अकः सवर्णे दीर्घः (६.१.१०१)
अर्थ: 'अक' प्रत्याहार (अ, इ, उ, ऋ, लृ) के बाद यदि कोई सवर्ण (समान) स्वर आए, तो दोनों मिलकर दीर्घ हो जाते हैं।
2. परिभाषा (Definition)
जब दो सजातीय स्वर (Homogeneous vowels) पास-पास आते हैं, चाहे वे ह्रस्व (Short) हों या दीर्घ (Long), तो दोनों के मेल से उसी जाति का दीर्घ स्वर (Long Vowel) बन जाता है। इसे दीर्घ सन्धि कहते हैं।
अ/आ + अ/आ = आ
इ/ई + इ/ई = ई
उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ
ऋ + ऋ = ॠ
इ/ई + इ/ई = ई
उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ
ऋ + ऋ = ॠ
3. दीर्घ सन्धि के 20 उदाहरण (20 Examples)
| क्र. | सन्धि विच्छेद (Split) | सन्धि पद (Join) | नियम (Rule) |
|---|---|---|---|
| 1 | हिम + आलयः | हिमालयः | अ + आ = आ |
| 2 | विद्या + आलयः | विद्यालयः | आ + आ = आ |
| 3 | दैत्य + अरिः | दैत्यारिः | अ + अ = आ |
| 4 | तथा + अपि | तथापि | आ + अ = आ |
| 5 | देव + आनन्दः | देवानन्दः | अ + आ = आ |
| 6 | रवि + इन्द्रः | रवीन्द्रः | इ + इ = ई |
| 7 | कवि + ईश्वरः | कवीश्वरः | इ + ई = ई |
| 8 | मही + इन्द्रः | महीन्द्रः | ई + इ = ई |
| 9 | श्री + ईशः | श्रीशः | ई + ई = ई |
| 10 | परि + ईक्षा | परीक्षा | इ + ई = ई |
| 11 | भानु + उदयः | भानूदयः | उ + उ = ऊ |
| 12 | लघु + ऊर्मिः | लघूर्मिः | उ + ऊ = ऊ |
| 13 | वधू + उत्सवः | वधूत्सवः | ऊ + उ = ऊ |
| 14 | सिन्धु + ऊर्मिः | सिन्धूर्मिः | उ + ऊ = ऊ |
| 15 | गुरु + उपदेशः | गुरूपदेशः | उ + उ = ऊ |
| 16 | पितृ + ऋणम् | पितॄणम् | ऋ + ऋ = ॠ |
| 17 | होतृ + ऋकारः | होतॄकारः | ऋ + ऋ = ॠ |
| 18 | मातृ + ऋणम् | मातॄणम् | ऋ + ऋ = ॠ |
| 19 | रत्न + आकरः | रत्नाकरः | अ + आ = आ |
| 20 | सु + उक्तिः | सूक्तिः | उ + उ = ऊ |
⚠️ ध्यान दें: दीर्घ सन्धि में हमेशा परिणाम (Result) 'बड़ा' स्वर ही होता है (आ, ई, ऊ, ॠ)।
