गुण सन्धि (Guṇa Sandhi)
1. पाणिनीय सूत्र (Sutra)
सूत्र: आद् गुणः (६.१.८७)
अर्थ: यदि 'अ' या 'आ' के बाद इ, उ, ऋ या लृ आए, तो दोनों के स्थान पर 'गुण' (एक नया स्वर) आदेश हो जाता है।
2. परिभाषा (Definition)
जब अ/आ के बाद इ/ई आए तो 'ए' (e), उ/ऊ आए तो 'ओ' (o), और ऋ आए तो 'अर्' (ar) हो जाता है। इसे गुण सन्धि कहते हैं।
अ/आ + इ/ई = ए (e)
अ/आ + उ/ऊ = ओ (o)
अ/आ + ऋ/ॠ = अर् (ar)
अ/आ + लृ = अल् (al)
अ/आ + उ/ऊ = ओ (o)
अ/आ + ऋ/ॠ = अर् (ar)
अ/आ + लृ = अल् (al)
3. गुण सन्धि के 20 उदाहरण (20 Examples)
| क्र. | सन्धि विच्छेद (Split) | सन्धि पद (Join) | नियम (Rule) |
|---|---|---|---|
| 1 | देव + इन्द्रः | देवेन्द्रः | अ + इ = ए |
| 2 | गण + ईशः | गणेशः | अ + ई = ए |
| 3 | नर + इन्द्रः | नरेन्द्रः | अ + इ = ए |
| 4 | महा + ईशः | महेशः | आ + ई = ए |
| 5 | रमा + ईशः | रमेशः | आ + ई = ए |
| 6 | सुर + ईशः | सुरेशः | अ + ई = ए |
| 7 | महा + इन्द्रः | महेन्द्रः | आ + इ = ए |
| 8 | सूर्य + उदयः | सूर्योदयः | अ + उ = ओ |
| 9 | पर + उपकारः | परोपकारः | अ + उ = ओ |
| 10 | महा + उत्सवः | महोत्सवः | आ + उ = ओ |
| 11 | हित + उपदेशः | हितोपदेशः | अ + उ = ओ |
| 12 | जल + ऊर्मिः | जलोर्मिः | अ + ऊ = ओ |
| 13 | गङ्गा + उदकम् | गङ्गोदकम् | आ + उ = ओ |
| 14 | चन्द्र + उदयः | चन्द्रोदयः | अ + उ = ओ |
| 15 | नव + ऊढा | नवोढा | अ + ऊ = ओ |
| 16 | देव + ऋषिः | देवर्षिः | अ + ऋ = अर् |
| 17 | महा + ऋषिः | महर्षिः | आ + ऋ = अर् |
| 18 | सप्त + ऋषिः | सप्तर्षिः | अ + ऋ = अर् |
| 19 | वसन्त + ऋतुः | वसन्तर्तुः | अ + ऋ = अर् |
| 20 | तव + लृकारः | तवल्कारः | अ + लृ = अल् |
⚠️ स्मरण रखें: गुण सन्धि में परिणाम हमेशा ए, ओ, या अर् होता है। (जबकि वृद्धि सन्धि में 'ऐ' और 'औ' होता है)।
