Ghagh Ki Kahawat: Manure & Oxen (Complete) - खाद और बैल

Sooraj Krishna Shastri
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Ghagh Ki Kahawat: Manure & Oxen (Complete) - खाद और बैल

Ghagh Ki Kahawat: Livestock

खाद और बैलों की पहचान (सम्पूर्ण संग्रह: 199-255)

खाद का महत्व (Manure)
#199
खाद देय तो होवे खेती ।
नहीं तो रहे नदी की रेती ॥ १९९ ॥

अर्थ: खाद देने से ही खेती हो सकती है, जिस खेत में खाद नहीं दी जाती वह खेत नदी की रेत के समान (बंजर) होता है।

#200
खेते पाँसा जो न दियाना ।
सो नर रहे दरिद्र समाना ॥ २०० ॥

अर्थ: जो किसान अपने खेतों में खाद (पाँसा) नहीं डालता, वह हमेशा दरिद्र (गरीब) रहता है।

#201
जिसके खेत पड़े नहिं गोबर ।
सो किसान है, सबसे दूबर ॥ २०१ ॥

अर्थ: जिस किसान के खेत में गोबर नहीं पड़ता, उसे सबसे कमजोर (दूबर) किसान मानना चाहिये।

#202
गोबर मैला पाती सड़े ।
फिर खेतों में दाना बढ़ै ॥ २०२ ॥

अर्थ: जब खेती में गोबर, मैला और पत्तियाँ सड़ती हैं, तभी अनाज की पैदावार बढ़ती है।

#203
गोबर, चॅकवर, चोकर, रूसा ।
इनके छोड़े, होय न भूसा ॥ २०३ ॥

अर्थ: गोबर, चकवड़, चोकर और अरूसा - इन्हें बिना सड़ाए खेत में डालने से भूसा भी पैदा नहीं होता (इन्हें सड़ाकर ही डालना चाहिए)।

#204
गोबर विष्टा नीम की खली ।
इनसे खेती दुगुनी फली ॥ २०४ ॥

अर्थ: खेत में गोबर, विष्टा और नीम की खली देने से दुगुनी लाभ होता है और कीड़े नहीं लगते।

#205
खेती करें खाद से भरे ।
भर भर कोठिला में लै घरै ॥ २०५ ॥

अर्थ: खेती करने वाला यदि खेत को खाद से भर दे, तो वह अनाज से कोठिला (भंडार) भरकर घर ले जाता है।

बैलों की पहचान (Ox Identification)
#206 (मत लो)
बरद बिसाहन जाओ कन्ता, खैरा का मति देखो दन्ता ॥
जहाँ परै खैरे की खुरी, तो कर डारै चापर पुरी ॥
जहाँ गिरै खैरा की लार, लेके बढ़नी बुहारो सार ॥ २०६ ॥

अर्थ: खैरा (कत्थई) बैल कभी मत खरीदना। जहाँ इसका खुर पड़ता है वह जगह चौपट हो जाती है और जहाँ इसकी लार गिरती है उसे झाड़ू से साफ करना पड़ता है (इतना अशुभ है)।

#207 (शुभ)
छोटा मुँह औ ऐंठा कान ।
भले बैल की है पहचान ॥ २०७ ॥

अर्थ: जिस बैल का मुँह छोटा और कान ऐंठा हुआ हो, वह अच्छा बैल होता है।

#208 (अशुभ)
लम्बे-लम्बे कान, औ ढीली है मुतान ।
छोड़ो छोड़ो किसान, नतो जात है जान ॥ २०८ ॥

अर्थ: लम्बे कान और लटकती हुई मुतान (इन्द्रिय) वाले बैल को तुरंत छोड़ दो, नहीं तो जान का खतरा है (वे मरियल होते हैं)।

#209 (शुभ)
नीला कन्धा बैगन खुरा ।
सो नहिं होवे कन्त बुरा ॥ २०९ ॥

अर्थ: नीले कंधे और बैंगनी खुर वाला बैल कभी बुरा नहीं होता।

#210 (शुभ)
ऊँपा पूँछ छोटे कान ।
ऐसे बरद मेहनती मान ॥ २१० ॥

अर्थ: गुच्छेदार पूंछ और छोटे कान वाले बैल बड़े मेहनती होते हैं।

#211 (शुभ)
बरद बिसाहन लाओ कन्ता, कबरे का मति देखो दन्ता ॥ २११ ॥

अर्थ: चितकबरें बैल को बिना दाँत (उम्र) देखे ही खरीद लेना चाहिये, वे अच्छे होते हैं।

#212 (उत्तम)
पतली पेंडली मोटी रान, पूंछ रहे धरती तरियान ।
जाके होवे ऐसी गोई, वाकी चकै और सब कोई ॥ २१२ ॥

अर्थ: पतली पेंडली, मोटी रान और जमीन छूती पूंछ - जिसके पास ऐसे बैलों की जोड़ी हो, उसकी सब तारीफ करते हैं।

#213 (शुभ)
बैल बिसाहन जाओ कन्ता । भूरे का जनि देखो दन्ता ॥ २१३ ॥

अर्थ: भूरे रंग के बैल को भी आँख मूंदकर खरीद लेना चाहिये।

#214 (धोखा)
बैल तरकनी टूटी नाव ।
एक दिना दैहैं ये दाँव ॥ २१४ ॥

अर्थ: चमकने वाला (भड़कने वाला) बैल और टूटी नाव - ये एक दिन धोखा जरूर देते हैं।

#215 (शुभ)
श्वेत रंग अरु पीठ बरारी । उन्हें देख मति भूल्यो अनारी ॥ २१५ ॥

अर्थ: सफेद रंग और दबी पीठ वाले बैल को खरीदने में चूकना नहीं चाहिये।

#216 (शुभ)
बैल लेवै कजरा । दाम देवै अगरा ॥ २१६ ॥

अर्थ: काली आँख (कजरा) वाले बैल को पेशगी (एडवांस) दाम देकर भी खरीद लेना चाहिये।

#217 (अशुभ)
जहाँ गिरै फुलवा की लार । बढ़नी लेके बुहारो सार ॥ २१७ ॥

अर्थ: फुलहे बैल की लार जहाँ गिरे, उसे झाड़ू से साफ करना चाहिये (यह अशुभ है)।

#218 (शुभ)
छोटी सींग औ छोटी पूँछ । बरद खरीदो सो बे पूँछ ॥ २१८ ॥

अर्थ: छोटी सींग और छोटी पूँछ वाले बैल को बिना पूछे (बिना संदेह के) खरीद लो।

#219 (शुभ)
जहें देखो पटवा की बोर । तहँ खोलो थैली की कोर ॥ २१९ ॥

अर्थ: पीले रंग (पटवा) वाले बैल को देखते ही थैली खोल दो (पैसा खर्च करने में संकोच न करो)।

#220 (खतरा)
बैल चमकना जोत में, अरु चमकीली नार ।
होते बैरी प्रान के, रखें लाज करतार ॥ २२० ॥

अर्थ: जोतते समय भड़कने वाला बैल और चमकीली (भड़कीली) स्त्री - ये प्राणों के दुश्मन हैं।

#221 (शुभ)
हिरन मुतान औ पतली पूँछ । बरद बिसाहो कन्त वे पूँछ ॥ २२१ ॥

अर्थ: पतली पूँछ और हिरन की तरह पेशाब करने वाले बैल को तुरंत खरीद लेना चाहिये।

#222 (सर्वोत्तम)
कार कछौरी झबरे कान । छाँड़ि इन्हें मति लीन्हो आन ॥ २२२ ॥

अर्थ: काली काछ (जांघ) और झबरे कान वाले बैल सर्वोत्तम होते हैं, इनके सिवा दूसरा मत लो।

#223 (बलवान)
मियनी बैल बड़ो बलवान । सुरतै करते ठाढ़े कान ॥ २२३ ॥

अर्थ: मियनी जाति का बैल बड़ा बलवान होता है, वह आहट पाते ही कान खड़े कर लेता है।

#224
पिय देखो जब संपति थोड़ी । बेसहो गाय बियावर घोड़ी ॥ २२४ ॥

अर्थ: जब संपत्ति कम हो, तो व्याने वाली (गर्भवती) गाय और घोड़ी खरीदनी चाहिए (लाभ होगा)।

#225 (अशुभ)
सौंख कहे मोर देखो करा । बिन धरनी का करों घरा ॥ २२५ ॥

अर्थ: सौंख (माथे पर दाग वाला) बैल कहता है कि मैं घर को बिना स्त्री का (विधुर) बना देता हूँ। इसे मत लो।

#226 (रोगी)
सींग गिरैला बरद के, औ मनई का कोढ़ ।
ये नीके नहि होत हैं, चाहे बद लो होड़ ॥ २२६ ॥

अर्थ: बैल का गिरता हुआ सींग और आदमी का कोढ़ कभी ठीक नहीं होता, चाहे शर्त लगा लो।

#227 (नाशक)
उदंत बरदे उदंत व्याये । आप मरे या मालकै खाये ॥ २२७ ॥

अर्थ: जो गाय/बैल उदंत (दूध के दाँत न टूटे हों) अवस्था में बियाती या काम करता है, वह खुद मरता है या मालिक को नष्ट करता है।

#228 (शुभ)
जहवाँ देखो रूपा धौर । चार सुका बरु दीजै और ॥ २२८ ॥

अर्थ: सफेद (रूपा) धौर बैल को देखते ही खरीद लो, चाहे चार रुपये ज्यादा ही क्यों न देना पड़े।

#229
बछवा बाँधा जाय मठाय । बैठा ब्वान जाय तुंदियाय ॥ २२९ ॥

अर्थ: हर वक्त बाँधने से बछड़ा सुस्त (मठाय) हो जाता है, और बैठा रहने वाला जवान आदमी तोंद निकाल लेता है।

#230
एक बात तुम गहो हमारी । बुढ़ बैल से नीक कुदारी ॥ २३० ॥

अर्थ: बूढ़े बैल से खेती करने से अच्छा है कि खुद कुदाल चला लो।

#231 (विनाशकारी)
डगमग डोलत, फरका फेकत, कहाँ चले तुम बाँड़ा ।
पहिले खावे रान परोसी, खसमै को कब छाँड़ा ॥ २३१ ॥

अर्थ: पूंछकटा (बाँड़ा) बैल डगमगा कर चलता है। यह पहले पड़ोसियों को नष्ट करता है और अंत में मालिक को भी नहीं छोड़ता।

#232 (दुखदायी)
बासद औ मुँह धौरा । तिन्हें देख चरवाहा रौरा ॥ २३२ ॥

अर्थ: उभरी रीढ़ और सफेद मुँह वाले बैल को देखकर चरवाहा भी रो देता है (इतने बुरे होते हैं)।

#233 (कमजोर)
निटिया बैल छोटिया हारी । कहै दूब मोर काह बिगारी ॥ २३३ ॥

अर्थ: नाटा बैल और छोटा हरवाहा - इनसे खेत की दूब (घास) भी नहीं उखड़ती।

#234 (त्याज्य)
साँत दाँत उदन्त को, रंग भी काला होय ।
भूल इन्हें न बेसाहिय, चहे दाम जो होय ॥ २३४ ॥

अर्थ: सात दाँत वाला काला उदंत बैल कभी मत खरीदना, चाहे मुफ्त में मिले।

#235 (दरिद्रता)
अमहा जबहा जोतहु जाय । भीख मांग के निश्श्चय खाय ॥ २३५ ॥

अर्थ: अमहा और जबहा नसल के बैलों को जोतने वाला भीख माँगने की कगार पर आ जाता है।

#236 (शुभ)
देखे घोंची उस पार । खोलै थैली यहि पार ॥ २३६ ॥

अर्थ: मुड़ी हुई सींग (घोंची) वाले बैल को नदी के उस पार भी देखो तो तुरंत खरीदने के लिए पैसे तैयार रखो।

#237 (निकम्मा)
धवल बरौनी मुँह का महुआ । देखि उन्हें हरवाहा रोवा ॥ २३७ ॥

अर्थ: सफेद बरौनी और पीले मुँह वाले बैल को देखकर हरवाहा रो पड़ता है (बहुत निकम्मे होते हैं)।

#238 (नाशक)
छदर कहै मैं आऊ जाऊँ । सद्ददर कहै कि मलिकै खाऊँ ॥
नौदर कहे मैं नौ दिशि जाऊँ । घर कुटुम्ब उपरोहित खाऊँ ॥ २३८ ॥

अर्थ: 6 दाँत वाला बैल आवारा होता है, 7 वाला मालिक को खाता है और 9 दाँत वाला बैल पूरे परिवार और पुरोहित का नाश करता है।

#239 (कष्ट)
मरद निरौनी बरदै दायें । दुभरी राहे में दुःख पायें ॥ २३९ ॥

अर्थ: मर्द का निराई करना और बैल का दाहिनी ओर चलना - ये कष्टदायक हैं।

#240 (नाशक)
नासू करै राज का नास ॥ २४० ॥

अर्थ: नासू (थोड़ी पसलियों वाला) बैल राज्य तक का नाश कर देता है।

#241
नारा खोटा बेचि के, चार धुरन्धर लेहु ।
अपनो काम चलाय के, औरन मँगनी देहु ॥ २४१ ॥

अर्थ: खोटे बैलों को बेचकर चार मजबूत बैल लो, जिससे अपना काम भी हो और दूसरों को भी दे सको।

#242 (विपरीत)
भैंसा बरद को साथ में जोते, काढ़ि के करज विरानो खाय ।
बधिया पेंचत है यहरी को, भैंसा ओहरी को ले जाय ॥ २४२ ॥

अर्थ: भैंसा और बैल को एक साथ जोतना कर्ज लेकर खाने जैसा है। बैल एक तरफ खींचता है और भैंसा दूसरी (कीचड़ की) तरफ।

#243 (कमजोर)
वह किसान है पातर । जो रखता बैल है गादर ॥ २४३ ॥

अर्थ: गादर (सुस्त/डरपोक) बैल रखने वाला किसान कमजोर समझा जाता है।

#244
एक मुसाफिर "हर हर कहा । गिरा तुरन्तै होश न रहा ॥ २४४ ॥

अर्थ: (गादर बैल की कहानी) एक मुसाफिर ने 'हर-हर' (महादेव) कहा, तो गादर बैल ने समझा 'हल' जोतने को कह रहा है और वह डर के मारे बेहोश हो गया।

#245 (नुकसान)
बद सिंगा मति लीजो मोल । कुएँ में डारो थैली खोल ॥ २४५ ॥

अर्थ: बड़े और बदसूरत सींग वाले बैल मत लो, यह पैसे कुएँ में फेंकने जैसा है।

#246 (उत्तम)
कार कछौटी सुनरे बान । छाँड़ि इन्हें मति लीजो आन ॥ २४६ ॥

अर्थ: काली काछ और सुनहरे रंग (बान) वाले बैलों को ही खरीदना चाहिए।

#247 (अनमोल)
सींग मुड़ा माथा उठा, मुँह का होवे गोल ।
बाल नरम चंचल करन, चपल बैल अनमोल ॥ २४७ ॥

अर्थ: मुड़ा सींग, उठा माथा, गोल मुँह, नरम बाल और चंचल कान वाला बैल अनमोल होता है।

#248
ना मोहिं जोतो डलिया कुलिया, ना मोहिं जोतो दायें ।
बीस बरस तक खेती करिहों, जो नहिं मिलिहें गायें ॥ २४८ ॥

अर्थ: (बैल कहता है) छोटे खेतों में मत जोतो, दाहिने मत जोतो और गायों से दूर रखो, तो मैं 20 साल तक काम करूँगा।

#249 (उत्तम)
है उत्तम खेती उसकी । रहे मेवाती गोई जिसकी ॥ २४९ ॥

अर्थ: जिसके पास मेवाती नस्ल के बैलों की जोड़ी हो, उसकी खेती उत्तम होती है।

#250 (आलसी)
मुँह का मोट माथ का महुआ । इन्हें देखि मति भूल्यो रहुआ ॥
धरती नहीं हराई जोतै । मेड़ें बैठा पागुर करै ॥ २५० ॥

अर्थ: मोटे मुँह और पीले माथे वाला बैल न हल चलाता है, न काम करता है; बस मेड़ पर बैठकर जुगाली करता है।

#251
जोतै पुरबी, लादै दमोय । हेंगा के खातिर, देवहा होय ॥ २५१ ॥

अर्थ: जोतने के लिए पूर्वी, लादने के लिए दमोय और हेंगा (पाटा) फेरने के लिए देवहा बैल अच्छा होता है।

#252 (शुभ)
जब देखिद्दा लौह बैलिया । तब दीद्दा खोलि थैलिया ॥ २५२ ॥

अर्थ: लाल (लौह) रंग का बैल देखते ही थैली खोल दो (खरीद लो)।

#253 (मारक)
मत्त कोई लीजै सुसरहा बाहन । मारि गुसैंये डालै पायन ॥ २५३ ॥

अर्थ: मुसरहा (विचित्र रंग वाला) बैल मत लो, यह मालिक को मारकर पैरों तले रौंद देता है।

#254 (शुभ)
करिया काही धवरे बान । इन्हें छाँड़ि मति लीजो आन ॥ २५४ ॥

अर्थ: काली काछ और सफेद रंग वाले बैल ही खरीदने चाहिए।

#255 (सर्वनाश)
बैल गुसरहा जो कोई लेय । राज नाश क्षण में कर देय ॥
पुत्र कलत्र सभी छुट जाय । भीख माँग के दर-दर खाय ॥ २५५ ॥

अर्थ: मुसरहा (गुसरहा) बैल लेने वाले का राज-पाट क्षण भर में नष्ट हो जाता है, परिवार छूट जाता है और वह भिखारी बन जाता है।

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