वृद्धि सन्धि (Vṛddhi Sandhi)
1. पाणिनीय सूत्र (Sutra)
सूत्र: वृद्धिरेचि (६.१.८८)
अर्थ: यदि 'अ' या 'आ' के बाद 'ए', 'ऐ', 'ओ' या 'औ' (एच् प्रत्याहार) आए, तो दोनों के स्थान पर 'वृद्धि' (बड़ा स्वर) आदेश हो जाता है।
2. परिभाषा (Definition)
जब अ/आ के बाद ए/ऐ आए तो दोनों मिलकर 'ऐ' (ai) हो जाते हैं।
जब अ/आ के बाद ओ/औ आए तो दोनों मिलकर 'औ' (au) हो जाते हैं।
इसे ही वृद्धि सन्धि कहते हैं (वृद्धि का अर्थ है - बढ़ जाना)।
जब अ/आ के बाद ओ/औ आए तो दोनों मिलकर 'औ' (au) हो जाते हैं।
इसे ही वृद्धि सन्धि कहते हैं (वृद्धि का अर्थ है - बढ़ जाना)।
अ/आ + ए/ऐ = ऐ (ai)
अ/आ + ओ/औ = औ (au)
अ/आ + ओ/औ = औ (au)
3. वृद्धि सन्धि के 20 उदाहरण (20 Examples)
| क्र. | सन्धि विच्छेद (Split) | सन्धि पद (Join) | नियम (Rule) |
|---|---|---|---|
| 1 | एक + एकम् | एकैकम् | अ + ए = ऐ |
| 2 | सदा + एव | सदैव | आ + ए = ऐ |
| 3 | मम + एव | ममैव | अ + ए = ऐ |
| 4 | तथा + एव | तथैव | आ + ए = ऐ |
| 5 | अद्य + एव | अद्यैव | अ + ए = ऐ |
| 6 | अत्र + एव | अत्रैव | अ + ए = ऐ |
| 7 | मत + ऐक्यम् | मतैक्यम् | अ + ऐ = ऐ |
| 8 | देव + ऐश्वर्यम् | देवैश्वर्यम् | अ + ऐ = ऐ |
| 9 | महा + ऐश्वर्यम् | महैश्वर्यम् | आ + ऐ = ऐ |
| 10 | लोक + एषणा | लोकैषणा | अ + ए = ऐ |
| 11 | वन + ओषधिः | वनौषधिः | अ + ओ = औ |
| 12 | जल + ओघः | जलौघः | अ + ओ = औ |
| 13 | महा + ओषधिः | महौषधिः | आ + ओ = औ |
| 14 | गङ्गा + ओघः | गङ्गौघः | आ + ओ = औ |
| 15 | परम + औषधम् | परमौषधम् | अ + औ = औ |
| 16 | महा + औषधम् | महौषधम् | आ + औ = औ |
| 17 | कृष्ण + औत्सुक्यम् | कृष्णौत्सुक्यम् | अ + औ = औ |
| 18 | विद्या + औचित्यम् | विद्यौचित्यम् | आ + औ = औ |
| 19 | तव + औदार्यम् | तवौदार्यम् | अ + औ = औ |
| 20 | चित्त + औदार्यम् | चित्तौदार्यम् | अ + औ = औ |
⚠️ पहचान (Trick): वृद्धि सन्धि वाले शब्दों के ऊपर प्रायः दो मात्राएँ ( ै या ौ ) दिखाई देती हैं (जैसे- सदै, वनौ)।
