क्तवतु प्रत्यय (Ktavatu Pratyaya)
अर्थ: 'क्तवतु' प्रत्यय का प्रयोग **भूतकाल (Past Tense)** के लिए होता है।
यह **कर्तृवाच्य (Active Voice)** में प्रयोग किया जाता है।
(जैसे: "राम ने पढ़ा" - रामः पठितवान्)
यह **कर्तृवाच्य (Active Voice)** में प्रयोग किया जाता है।
(जैसे: "राम ने पढ़ा" - रामः पठितवान्)
⚖️ क्त और क्तवतु में अंतर (The Golden Rule):
1. क्त (Kta): कर्मवाच्य (Passive) - कर्म प्रधान।
मया पुस्तकं पठितम् (मेरे द्वारा पुस्तक पढ़ी गयी)।
2. क्तवतु (Ktavatu): कर्तृवाच्य (Active) - कर्ता प्रधान।
अहं पुस्तकं पठितवान् (मैंने पुस्तक पढ़ी)।
1. क्त (Kta): कर्मवाच्य (Passive) - कर्म प्रधान।
मया पुस्तकं पठितम् (मेरे द्वारा पुस्तक पढ़ी गयी)।
2. क्तवतु (Ktavatu): कर्तृवाच्य (Active) - कर्ता प्रधान।
अहं पुस्तकं पठितवान् (मैंने पुस्तक पढ़ी)।
1. रूप बनाने के नियम (Rules)
- शेष (Formula): धातु के अंत में 'क' और 'उ' का लोप होकर 'तवत्' (tavat) शेष बचता है।
- तीनों लिंग: यह कर्ता (Subject) के लिंग के अनुसार बदलता है:
- पुल्लिंग: 'वान्' जुड़ता है (पठितवान्) - 'भवान्' की तरह।
- स्त्रीलिंग: 'वती' जुड़ता है (पठितवती) - 'नदी' की तरह।
- नपुंसकलिग: 'वत्' जुड़ता है (पठितवत्) - 'जगत्' की तरह।
2. उदाहरण तालिका (Examples)
| धातु | पुल्लिंग (Male) | स्त्रीलिंग (Female) | नपुंसकलिग | अर्थ (Hindi) |
|---|---|---|---|---|
| पठ् | पठितवान् | पठितवती | पठितवत् | पढ़ा / पढ़ लिया |
| गम् (गत) | गतवान् | गतवती | गतवत् | गया / जा चुका |
| कृ (कृत) | कृतवान् | कृतवती | कृतवत् | किया / कर लिया |
| दृश् (दृष्ट) | दृष्टवान् | दृष्टवती | दृष्टवत् | देखा / देख लिया |
| श्रु (श्रुत) | श्रुतवान् | श्रुतवती | श्रुतवत् | सुना / सुन लिया |
| खाद् (खादित) | खादितवान् | खादितवती | खादितवत् | खाया / खा चुका |
| नी (नीत) | नीतवान् | नीतवती | नीतवत् | ले गया |
3. वाक्य प्रयोग (Sentence Usage)
1. बालकः गृहं गतवान्।
(बालक घर गया।) - पुल्लिंग कर्ता
2. बालिका गृहं गतवती।
(बालिका घर गयी।) - स्त्रीलिंग कर्ता
3. मित्रं गृहं गतवत्।
(मित्र घर गया।) - नपुंसकलिग कर्ता
(बालक घर गया।) - पुल्लिंग कर्ता
2. बालिका गृहं गतवती।
(बालिका घर गयी।) - स्त्रीलिंग कर्ता
3. मित्रं गृहं गतवत्।
(मित्र घर गया।) - नपुंसकलिग कर्ता
