क्तवतु प्रत्यय (Ktavatu Pratyaya)

Sooraj Krishna Shastri
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क्तवतु प्रत्यय (Ktavatu Pratyaya)

अर्थ: 'क्तवतु' प्रत्यय का प्रयोग **भूतकाल (Past Tense)** के लिए होता है।
यह **कर्तृवाच्य (Active Voice)** में प्रयोग किया जाता है।
(जैसे: "राम ने पढ़ा" - रामः पठितवान्)
⚖️ क्त और क्तवतु में अंतर (The Golden Rule):

1. क्त (Kta): कर्मवाच्य (Passive) - कर्म प्रधान।
मया पुस्तकं पठितम् (मेरे द्वारा पुस्तक पढ़ी गयी)।

2. क्तवतु (Ktavatu): कर्तृवाच्य (Active) - कर्ता प्रधान।
अहं पुस्तकं पठितवान् (मैंने पुस्तक पढ़ी)।

1. रूप बनाने के नियम (Rules)

  • शेष (Formula): धातु के अंत में 'क' और 'उ' का लोप होकर 'तवत्' (tavat) शेष बचता है।
  • तीनों लिंग: यह कर्ता (Subject) के लिंग के अनुसार बदलता है:
    • पुल्लिंग: 'वान्' जुड़ता है (पठितवान्) - 'भवान्' की तरह।
    • स्त्रीलिंग: 'वती' जुड़ता है (पठितवती) - 'नदी' की तरह।
    • नपुंसकलिग: 'वत्' जुड़ता है (पठितवत्) - 'जगत्' की तरह।

2. उदाहरण तालिका (Examples)

धातु पुल्लिंग (Male) स्त्रीलिंग (Female) नपुंसकलिग अर्थ (Hindi)
पठ् पठितवान् पठितवती पठितवत् पढ़ा / पढ़ लिया
गम् (गत) गतवान् गतवती गतवत् गया / जा चुका
कृ (कृत) कृतवान् कृतवती कृतवत् किया / कर लिया
दृश् (दृष्ट) दृष्टवान् दृष्टवती दृष्टवत् देखा / देख लिया
श्रु (श्रुत) श्रुतवान् श्रुतवती श्रुतवत् सुना / सुन लिया
खाद् (खादित) खादितवान् खादितवती खादितवत् खाया / खा चुका
नी (नीत) नीतवान् नीतवती नीतवत् ले गया

3. वाक्य प्रयोग (Sentence Usage)

1. बालकः गृहं गतवान्
(बालक घर गया।) - पुल्लिंग कर्ता

2. बालिका गृहं गतवती
(बालिका घर गयी।) - स्त्रीलिंग कर्ता

3. मित्रं गृहं गतवत्
(मित्र घर गया।) - नपुंसकलिग कर्ता

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