क्त प्रत्यय (Kta Pratyaya)

Sooraj Krishna Shastri
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क्त प्रत्यय (Kta Pratyaya)

अर्थ: 'क्त' प्रत्यय का प्रयोग **भूतकाल (Past Tense)** के अर्थ में किया जाता है।
इसे **'निष्ठा' (Nishtha)** प्रत्यय भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कार्य की समाप्ति।
वाच्य नियम (Voice Rule):
1. सकर्मक धातुओं (Transitive) में यह **कर्मवाच्य (Passive Voice)** देता है।
(जैसे: मया पाठः पठितः - मेरे द्वारा पाठ पढ़ा गया।)
2. अकर्मक धातुओं (Intransitive, जैसे- जाना, सोना) में यह **कर्तृवाच्य (Active Voice)** देता है।
(जैसे: सः गतः - वह गया।)

1. रूप बनाने के नियम (Formation Rules)

  • शेष (Formula): धातु में जुड़ते समय 'क' का लोप हो जाता है और केवल 'त' (ta) शेष बचता है। (कभी-कभी 'ट', 'ध' या 'न' भी हो जाता है)।
  • लिंग: यह विशेषण (Adjective) की तरह कार्य करता है, इसलिए इसके रूप **तीनों लिंगों** में चलते हैं।
  • 'इ' का आगम: कई धातुओं में 'त' से पहले 'इ' की मात्रा लगती है (पठ् + क्त = पठित)।

2. उदाहरण तालिका (Examples)

धातु पुल्लिंग (Male) स्त्रीलिंग (Female) नपुंसकलिग अर्थ (Hindi)
पठ् पठितः पठिता पठितम् पढ़ा गया
लिख् लिखितः लिखिता लिखितम् लिखा गया
गम् गतः गता गतम् गया / जा चुका
कृ (करना) कृतः कृता कृतम् किया गया
पा (पीना) पीतः पीता पीतम् पिया गया
दृश् (देखना) दृष्टः दृष्टा दृष्टम् देखा गया (विशेष रूप)
दा (देना) दत्तः दत्ता दत्तम् दिया गया (विशेष रूप)
श्रु (सुनना) श्रुतः श्रुता श्रुतम् सुना गया

3. वाक्य प्रयोग (Sentence Usage)

1. रामेण रावणः हतः
(राम के द्वारा रावण मारा गया।)

2. मया कार्यं कृतम्
(मेरे द्वारा कार्य किया गया / मैंने कार्य कर लिया।)

3. सीता वनं गता
(सीता वन गयी।)
(नोट: 'गम्' अकर्मक की तरह प्रयोग हुआ, इसलिए सीता (कर्त्ता) के अनुसार स्त्रीलिंग रूप आया।)

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