क्त प्रत्यय (Kta Pratyaya)
अर्थ: 'क्त' प्रत्यय का प्रयोग **भूतकाल (Past Tense)** के अर्थ में किया जाता है।
इसे **'निष्ठा' (Nishtha)** प्रत्यय भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कार्य की समाप्ति।
इसे **'निष्ठा' (Nishtha)** प्रत्यय भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कार्य की समाप्ति।
⚠ वाच्य नियम (Voice Rule):
1. सकर्मक धातुओं (Transitive) में यह **कर्मवाच्य (Passive Voice)** देता है।
(जैसे: मया पाठः पठितः - मेरे द्वारा पाठ पढ़ा गया।)
2. अकर्मक धातुओं (Intransitive, जैसे- जाना, सोना) में यह **कर्तृवाच्य (Active Voice)** देता है।
(जैसे: सः गतः - वह गया।)
1. सकर्मक धातुओं (Transitive) में यह **कर्मवाच्य (Passive Voice)** देता है।
(जैसे: मया पाठः पठितः - मेरे द्वारा पाठ पढ़ा गया।)
2. अकर्मक धातुओं (Intransitive, जैसे- जाना, सोना) में यह **कर्तृवाच्य (Active Voice)** देता है।
(जैसे: सः गतः - वह गया।)
1. रूप बनाने के नियम (Formation Rules)
- शेष (Formula): धातु में जुड़ते समय 'क' का लोप हो जाता है और केवल 'त' (ta) शेष बचता है। (कभी-कभी 'ट', 'ध' या 'न' भी हो जाता है)।
- लिंग: यह विशेषण (Adjective) की तरह कार्य करता है, इसलिए इसके रूप **तीनों लिंगों** में चलते हैं।
- 'इ' का आगम: कई धातुओं में 'त' से पहले 'इ' की मात्रा लगती है (पठ् + क्त = पठित)।
2. उदाहरण तालिका (Examples)
| धातु | पुल्लिंग (Male) | स्त्रीलिंग (Female) | नपुंसकलिग | अर्थ (Hindi) |
|---|---|---|---|---|
| पठ् | पठितः | पठिता | पठितम् | पढ़ा गया |
| लिख् | लिखितः | लिखिता | लिखितम् | लिखा गया |
| गम् | गतः | गता | गतम् | गया / जा चुका |
| कृ (करना) | कृतः | कृता | कृतम् | किया गया |
| पा (पीना) | पीतः | पीता | पीतम् | पिया गया |
| दृश् (देखना) | दृष्टः | दृष्टा | दृष्टम् | देखा गया (विशेष रूप) |
| दा (देना) | दत्तः | दत्ता | दत्तम् | दिया गया (विशेष रूप) |
| श्रु (सुनना) | श्रुतः | श्रुता | श्रुतम् | सुना गया |
3. वाक्य प्रयोग (Sentence Usage)
1. रामेण रावणः हतः।
(राम के द्वारा रावण मारा गया।)
2. मया कार्यं कृतम्।
(मेरे द्वारा कार्य किया गया / मैंने कार्य कर लिया।)
3. सीता वनं गता।
(सीता वन गयी।)
(नोट: 'गम्' अकर्मक की तरह प्रयोग हुआ, इसलिए सीता (कर्त्ता) के अनुसार स्त्रीलिंग रूप आया।)
(राम के द्वारा रावण मारा गया।)
2. मया कार्यं कृतम्।
(मेरे द्वारा कार्य किया गया / मैंने कार्य कर लिया।)
3. सीता वनं गता।
(सीता वन गयी।)
(नोट: 'गम्' अकर्मक की तरह प्रयोग हुआ, इसलिए सीता (कर्त्ता) के अनुसार स्त्रीलिंग रूप आया।)
