ल्यप् प्रत्यय (Lyap Pratyaya)

Sooraj Krishna Shastri
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ल्यप् प्रत्यय (Lyap Pratyaya)

अर्थ: 'ल्यप्' प्रत्यय का अर्थ भी 'करके' (Having done) होता है।
अंतर: यह 'क्त्वा' का ही भाई है, लेकिन इसका प्रयोग केवल तब होता है जब धातु से पहले कोई उपसर्ग (Prefix) लगा हो।
⚖️ क्त्वा और ल्यप् में अंतर (Difference)
क्त्वा (Ktvā)
बिना उपसर्ग वाली धातु
गम् + क्त्वा = गत्वा
ल्यप् (Lyap)
उपसर्ग वाली धातु
+ गम् + ल्यप् = गत्य

1. नियम और सूत्र (Rules)

  • सूत्र: उपसर्ग + धातु + ल्यप् = अव्यय पद
  • शेष: 'ल' और 'प्' का लोप हो जाता है, केवल 'य' (ya) शेष बचता है।
  • तुक (त्) का आगम: यदि धातु के अंत में कोई छोटा स्वर (ह्रस्व स्वर) हो, तो 'य' से पहले आधा 'त्' जुड़ जाता है। (जैसे- वि + जि + ल्यप् = विजित्य)।

2. उदाहरण तालिका (Examples)

उपसर्ग + धातु प्रत्यय निर्मित शब्द अर्थ (Hindi)
+ गम् + ल्यप् आगत्य आकर
प्र + णम् + ल्यप् प्रणम्य प्रणाम करके
वि + हस् + ल्यप् विहस्य हँसकर
सम् + पठ् + ल्यप् संपठ्य अच्छी तरह पढ़कर
वि + ज्ञ + ल्यप् विज्ञाय जानकर
उप + कृ + ल्यप् उपकृत्य उपकार करके
प्र + दा + ल्यप् प्रदाय देकर
परि + त्यज् + ल्यप् परित्यज्य छोड़कर / त्यागकर
वि + स्मृ + ल्यप् विस्मृत्य भूलकर

3. वाक्य प्रयोग (Usage)

1. सः गुरुं प्रणम्य पठति।
(वह गुरु को प्रणाम करके पढ़ता है।)

2. बालकः गृहं आगत्य भोजनं करोति।
(बालक घर आकर भोजन करता है।)

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