परसवर्ण सन्धि (Parasavarṇa Sandhi)
1. पाणिनीय सूत्र (Sutra)
सूत्र: अनुस्वारस्य ययि परसवर्णः (८.४.५८)
अर्थ: यदि अनुस्वार (ं) के बाद 'यय्' (कोई भी वर्गीय व्यंजन) आए, तो अनुस्वार के स्थान पर अगले वर्ण का सवर्ण (उसी वर्ग का ५वाँ वर्ण) हो जाता है।
2. परिभाषा (Definition)
सरल शब्दों में: बिन्दी (अनुस्वार) के बाद जो अक्षर आता है, बिन्दी उसी अक्षर के वर्ग के 'पंचम वर्ण' (ङ्, ञ्, ण्, न्, म्) में बदल जाती है।
इसे 'पर-सवर्ण' (बाद वाले जैसा) कहते हैं।
इसे 'पर-सवर्ण' (बाद वाले जैसा) कहते हैं।
अनुस्वार + क्/ख्/ग्/घ् ➡ ङ् (ṅ)
अनुस्वार + च्/छ्/ज्/झ् ➡ ञ् (ñ)
अनुस्वार + ट्/ठ्/ड्/ढ् ➡ ण् (ṇ)
अनुस्वार + त्/थ्/द्/ध् ➡ न् (n)
अनुस्वार + प्/फ्/ब्/भ् ➡ म् (m)
अनुस्वार + च्/छ्/ज्/झ् ➡ ञ् (ñ)
अनुस्वार + ट्/ठ्/ड्/ढ् ➡ ण् (ṇ)
अनुस्वार + त्/थ्/द्/ध् ➡ न् (n)
अनुस्वार + प्/फ्/ब्/भ् ➡ म् (m)
3. परसवर्ण सन्धि के 20 उदाहरण (20 Examples)
| क्र. | सन्धि विच्छेद (Split) | सन्धि पद (Join) | नियम (Rule) |
|---|---|---|---|
| 1 | शम् + करः | शङ्करः | ं + क = ङ् |
| 2 | गम् + गा | गङ्गा | ं + ग = ङ् |
| 3 | अम् + कितः | अङ्कितः | ं + क = ङ् |
| 4 | पम् + कः | पङ्कः | ं + क = ङ् |
| 5 | पम् + चमः | पञ्चमः | ं + च = ञ् |
| 6 | चम् + चलः | चञ्चलः | ं + च = ञ् |
| 7 | सम् + जयः | सञ्जयः | ं + ज = ञ् |
| 8 | मृत्युम् + जयः | मृत्युञ्जयः | ं + ज = ञ् |
| 9 | कम् + ठः | कण्ठः | ं + ठ = ण् |
| 10 | दम् + डः | दण्डः | ं + ड = ण् |
| 11 | खम् + डः | खण्डः | ं + ड = ण् |
| 12 | कुम् + ठितः | कुण्ठितः | ं + ठ = ण् |
| 13 | शम् + तः | शान्तः | ं + त = न् |
| 14 | दम् + तः | दन्तः | ं + त = न् |
| 15 | मम् + दः | मन्दः | ं + द = न् |
| 16 | अनम् + तरः | अनन्तरः | ं + त = न् |
| 17 | चम् + पा | चम्पा | ं + प = म् |
| 18 | गुम् + फितः | गुम्फितः | ं + फ = म् |
| 19 | दम् + भः | दम्भः | ं + भ = म् |
| 20 | सम् + भाषणम् | सम्भाषणम् | ं + भ = म् |
⚠️ विशेष (Note): संस्कृत लेखन में 'गंगा' (अनुस्वार) और 'गङ्गा' (परसवर्ण) दोनों सही माने जाते हैं। लेकिन 'अपदान्त' (शब्द के बीच में) परसवर्ण सन्धि करना श्रेष्ठ माना जाता है।
