उत्व सन्धि (Utva Sandhi)
उत्व सन्धि का मुख्य परिणाम 'ओ' (o) की मात्रा है। यह विसर्ग सन्धि के अंतर्गत आती है। इसके लिए दो मुख्य स्थितियाँ (नियम) हैं।
1. नियम: विसर्ग के दोनों ओर 'अ' हो
सूत्र: अतो रोरप्लुतादप्लुते (६.१.११३)
अर्थ: यदि विसर्ग (ः) से पहले ह्रस्व 'अ' हो और बाद में भी ह्रस्व 'अ' हो, तो विसर्ग 'ओ' बन जाता है और बाद वाला 'अ' अवग्रह (ऽ) बन जाता है।
अ + ः + अ ➡ ओऽ (o + avagraha)
(उदा: शिवः + अर्च्यः = शिवोऽर्च्यः)
(उदा: शिवः + अर्च्यः = शिवोऽर्च्यः)
2. नियम: विसर्ग के बाद मृदु व्यंजन (Soft Consonant) हो
सूत्र: हशि च (६.१.११४)
अर्थ: यदि विसर्ग से पहले 'अ' हो और बाद में 'हश्' प्रत्याहार (वर्ग का 3, 4, 5 वर्ण या य, र, ल, व, ह) हो, तो विसर्ग 'ओ' बन जाता है। (यहाँ अवग्रह नहीं लगता)।
अ + ः + हश् (ग, ज, द, ब, ह...) ➡ ओ (o)
(उदा: मनः + हरः = मनोहरः)
(उदा: मनः + हरः = मनोहरः)
3. उत्व सन्धि के 20 उदाहरण (20 Examples)
| क्र. | सन्धि विच्छेद (Split) | सन्धि पद (Join) | नियम (Rule) |
|---|---|---|---|
| (क) अवग्रह के साथ (ओऽ) | |||
| 1 | शिवः + अर्च्यः | शिवोऽर्च्यः | अ + : + अ = ओऽ |
| 2 | सः + अपि | सोऽपि | अ + : + अ = ओऽ |
| 3 | कः + अपि | कोऽपि | अ + : + अ = ओऽ |
| 4 | रामः + अयम् | रामोऽयम् | अ + : + अ = ओऽ |
| 5 | नृपः + अस्तु | नृपोऽस्तु | अ + : + अ = ओऽ |
| 6 | देवः + अधुना | देवोऽधुना | अ + : + अ = ओऽ |
| 7 | बालः + अयम् | बालोऽयम् | अ + : + अ = ओऽ |
| 8 | प्रथमः + अध्यायः | प्रथमोऽध्यायः | अ + : + अ = ओऽ |
| (ख) व्यंजन के साथ (ओ) | |||
| 9 | मनः + हरः | मनोहरः | अ + : + ह = ओ |
| 10 | यशः + दा | यशोदा | अ + : + द = ओ |
| 11 | तपः + वनम् | तपोवनम् | अ + : + व = ओ |
| 12 | मनः + रदः | मनोरथः | अ + : + र = ओ |
| 13 | सरः + वरः | सरोवरः | अ + : + व = ओ |
| 14 | पुरः + हितः | पुरोहितः | अ + : + ह = ओ |
| 15 | तेजः + मयम् | तेजोमयम् | अ + : + म = ओ |
| 16 | पयः + धरः | पयोधरः | अ + : + ध = ओ |
| 17 | रामः + गच्छति | रामो गच्छति | अ + : + ग = ओ |
| 18 | बालः + हसति | बालो हसति | अ + : + ह = ओ |
| 19 | वृक्षः + वर्धते | वृक्षो वर्धते | अ + : + व = ओ |
| 20 | नमः + नमः | नमो नमः | अ + : + न = ओ |
⚠️ स्मरण रखें: उत्व सन्धि केवल तभी होती है जब विसर्ग से ठीक पहले 'अ' (छोटा अ) हो। यदि 'आ', 'इ', 'उ' आदि हों, तो उत्व सन्धि नहीं होती (वहाँ रत्व या लोप हो सकता है)।
