उत्व सन्धि (Utva Sandhi)

Sooraj Krishna Shastri
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उत्व सन्धि (Utva Sandhi)

उत्व सन्धि का मुख्य परिणाम 'ओ' (o) की मात्रा है। यह विसर्ग सन्धि के अंतर्गत आती है। इसके लिए दो मुख्य स्थितियाँ (नियम) हैं।

1. नियम: विसर्ग के दोनों ओर 'अ' हो

सूत्र: अतो रोरप्लुतादप्लुते (६.१.११३) अर्थ: यदि विसर्ग (ः) से पहले ह्रस्व 'अ' हो और बाद में भी ह्रस्व 'अ' हो, तो विसर्ग 'ओ' बन जाता है और बाद वाला 'अ' अवग्रह (ऽ) बन जाता है।
अ + ः + अ   ➡   ओऽ (o + avagraha)
(उदा: शिवः + अर्च्यः = शिवोऽर्च्यः)

2. नियम: विसर्ग के बाद मृदु व्यंजन (Soft Consonant) हो

सूत्र: हशि च (६.१.११४) अर्थ: यदि विसर्ग से पहले 'अ' हो और बाद में 'हश्' प्रत्याहार (वर्ग का 3, 4, 5 वर्ण या य, र, ल, व, ह) हो, तो विसर्ग 'ओ' बन जाता है। (यहाँ अवग्रह नहीं लगता)।
अ + ः + हश् (ग, ज, द, ब, ह...)   ➡   ओ (o)
(उदा: मनः + हरः = मनोहरः)

3. उत्व सन्धि के 20 उदाहरण (20 Examples)

क्र. सन्धि विच्छेद (Split) सन्धि पद (Join) नियम (Rule)
(क) अवग्रह के साथ (ओऽ)
1शिवः + अर्च्यःशिवोऽर्च्यःअ + : + अ = ओऽ
2सः + अपिसोऽपिअ + : + अ = ओऽ
3कः + अपिकोऽपिअ + : + अ = ओऽ
4रामः + अयम्रामोऽयम्अ + : + अ = ओऽ
5नृपः + अस्तुनृपोऽस्तुअ + : + अ = ओऽ
6देवः + अधुनादेवोऽधुनाअ + : + अ = ओऽ
7बालः + अयम्बालोऽयम्अ + : + अ = ओऽ
8प्रथमः + अध्यायःप्रथमोऽध्यायःअ + : + अ = ओऽ
(ख) व्यंजन के साथ (ओ)
9मनः + हरःमनोहरःअ + : + ह = ओ
10यशः + दायशोदाअ + : + द = ओ
11तपः + वनम्तपोवनम्अ + : + व = ओ
12मनः + रदःमनोरथःअ + : + र = ओ
13सरः + वरःसरोवरःअ + : + व = ओ
14पुरः + हितःपुरोहितःअ + : + ह = ओ
15तेजः + मयम्तेजोमयम्अ + : + म = ओ
16पयः + धरःपयोधरःअ + : + ध = ओ
17रामः + गच्छतिरामो गच्छतिअ + : + ग = ओ
18बालः + हसतिबालो हसतिअ + : + ह = ओ
19वृक्षः + वर्धतेवृक्षो वर्धतेअ + : + व = ओ
20नमः + नमःनमो नमःअ + : + न = ओ
⚠️ स्मरण रखें: उत्व सन्धि केवल तभी होती है जब विसर्ग से ठीक पहले 'अ' (छोटा अ) हो। यदि 'आ', 'इ', 'उ' आदि हों, तो उत्व सन्धि नहीं होती (वहाँ रत्व या लोप हो सकता है)।

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