संस्कृत लकार परिचय (Sanskrit Lakars)
संस्कृत व्याकरण में क्रिया (Verb) के काल (Tense) और अवस्था (Mood) को बताने के लिए 'लकार' का प्रयोग किया जाता है। इन्हें 'लकार' इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये सभी 'ल' (लृ) अक्षर से शुरू होते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य: संस्कृत में कुल 10 लकार होते हैं। लेकिन सामान्य अध्ययन (स्कूल/कॉलेज) के लिए मुख्य रूप से केवल 5 लकारों का ही प्रयोग होता है।
1. मुख्य 5 लकार (Basic Lakars)
नीचे दी गई सारणी में वे 5 लकार हैं जो कक्षा 6 से 12 तक और सामान्य बोलचाल में प्रयोग किए जाते हैं:
| लकार | अर्थ (Meaning) | प्रयोग और पहचान | उदाहरण (पठ्) |
|---|---|---|---|
| 1. लट् लकार | वर्तमान काल (Present Tense) |
जो कार्य अभी हो रहा है। (पहचान: ता है, ती है, रहा है) |
पठति (पढ़ता है) |
| 2. लङ् लकार | भूतकाल (Past Tense) |
जो कार्य बीत चुका है। (पहचान: धातु के आगे 'अ' लगता है) |
अपठत् (पढ़ा था) |
| 3. लृट् लकार | भविष्यत् काल (Future Tense) |
जो कार्य आने वाले समय में होगा। (पहचान: स्यति/ष्यति जुड़ता है) |
पठिष्यति (पढ़ेगा) |
| 4. लोट् लकार | आज्ञार्थक (Imperative Mood) |
आज्ञा, आदेश या प्रार्थना के लिए। (पहचान: तु, ताम्, अन्तु) |
पठतु (पढ़ो/पढ़ें) |
| 5. विधिलिङ् | चाहिए अर्थ में (Potential Mood) |
उपदेश, विधि या संभावना के लिए। (पहचान: एत् मात्रा) |
पठेत् (पढ़ना चाहिए) |
2. अन्य 5 लकार (Advanced Lakars)
ये लकार वेदों, पुराने साहित्यों या विशिष्ट व्याकरण प्रयोगों में आते हैं:
- 6. लिट् लकार (Lit): परोक्ष भूतकाल (जो हमारी आँखों के सामने नहीं हुआ, जैसे ऐतिहासिक घटनाएँ - 'राम राजा हुए')।
- 7. लुट् लकार (Lut): अनद्यतन भविष्यत् (जो आज का भविष्य न हो, कल या उसके बाद)।
- 8. आशीर्लिङ् लकार (Ashirling): आशीर्वाद देने के लिए।
- 9. लुङ् लकार (Lung): सामान्य भूतकाल (Aorist)।
- 10. लृङ् लकार (Lring): हेतुहेतुमद्भाव (Conditional) - जहाँ एक क्रिया दूसरी पर निर्भर हो (जैसे- "यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती")।
विशेष नोट (Vedic Lakar): वेदों में एक 11वां लकार भी पाया जाता है जिसे 'लेट् लकार' कहते हैं। इसका प्रयोग लौकिक संस्कृत में नहीं होता।
