यण् सन्धि (Yaṇ Sandhi)
1. पाणिनीय सूत्र (Sutra)
सूत्र: इको यणचि (६.१.७७)
अर्थ: यदि 'इक' प्रत्याहार (इ, उ, ऋ, लृ) के बाद कोई असमान स्वर (Ach) आए, तो 'इक' के स्थान पर 'यण्' (य्, व्, र्, ल्) आदेश हो जाता है।
2. परिभाषा (Definition)
जब इ/ई, उ/ऊ, ऋ, लृ के बाद कोई भिन्न स्वर आता है, तो:
• इ/ई बदल जाता है 'य्' में,
• उ/ऊ बदल जाता है 'व्' में,
• ऋ बदल जाता है 'र्' में,
• लृ बदल जाता है 'ल्' में।
(बाद वाला स्वर मात्रा बनकर जुड़ जाता है)।
• इ/ई बदल जाता है 'य्' में,
• उ/ऊ बदल जाता है 'व्' में,
• ऋ बदल जाता है 'र्' में,
• लृ बदल जाता है 'ल्' में।
(बाद वाला स्वर मात्रा बनकर जुड़ जाता है)।
इ/ई + भिन्न स्वर = य् (y)
उ/ऊ + भिन्न स्वर = व् (v)
ऋ/ॠ + भिन्न स्वर = र् (r)
लृ + भिन्न स्वर = ल् (l)
उ/ऊ + भिन्न स्वर = व् (v)
ऋ/ॠ + भिन्न स्वर = र् (r)
लृ + भिन्न स्वर = ल् (l)
3. यण् सन्धि के 20 उदाहरण (20 Examples)
| क्र. | सन्धि विच्छेद (Split) | सन्धि पद (Join) | नियम (Rule) |
|---|---|---|---|
| 1 | इति + आदि | इत्यादि | इ → य् |
| 2 | यदि + अपि | यद्यपि | इ → य् |
| 3 | प्रति + एकम् | प्रत्येकम् | इ → य् |
| 4 | अति + आचारः | अत्याचारः | इ → य् |
| 5 | नदी + अत्र | नद्यत्र | ई → य् |
| 6 | इति + अलम् | इत्यलम् | इ → य् |
| 7 | अधि + आयः | अध्यायः | इ → य् |
| 8 | सु + आगतम् | स्वागतम् | उ → व् |
| 9 | मधु + अरिः | मध्वरिः | उ → व् |
| 10 | अनु + अयः | अन्वयः | उ → व् |
| 11 | गुरु + आदेशः | गुर्वादेशः | उ → व् |
| 12 | वधू + आगमनम् | वध्वागमनम् | ऊ → व् |
| 13 | सु + अस्ति | स्वस्ति | उ → व् |
| 14 | खलु + एतत् | खल्वेतत् | उ → व् |
| 15 | पितृ + आज्ञा | पित्राज्ञा | ऋ → र् |
| 16 | मातृ + उपदेशः | मात्रुपदेशः | ऋ → र् |
| 17 | पितृ + आदेशः | पित्रादेशः | ऋ → र् |
| 18 | धातृ + अंशः | धात्रंशः | ऋ → र् |
| 19 | मातृ + इच्छा | मात्रेच्छा | ऋ → र् |
| 20 | लृ + आकृतिः | लाकृतिः | लृ → ल् |
⚠️ पहचान (Trick): यण् सन्धि वाले शब्दों में अक्सर 'य', 'व', 'र' से पहले आधा अक्षर (Half consonant) दिखाई देता है। (जैसे- इत्यादि, स्वागतम्)।
