भरत और बाहुबली की पौराणिक कथा
"अहंकार से वैराग्य तक की एक अद्भुत यात्रा"
भाई-भाई का संघर्ष
सत्ययुग की बात है, महाराज ऋषभदेव ने अपना राज्य अपने दोनों पुत्रों—भरत और बाहुबली—में विभाजित कर दिया था ताकि उनमें कोई कलह न हो। भरत ज्येष्ठ थे और बाहुबली छोटे। दोनों ही वीर और पराक्रमी थे, परन्तु दोनों के विचारों में महान अन्तर था।
भरत महत्त्वाकांक्षी थे, जबकि बाहुबली भक्तिमान् एवं सन्तोषप्रिय थे। भरत के मन में 'चक्रवर्ती सम्राट' बनने की इच्छा थी। अपनी शक्ति के बल पर वे लगभग सभी राज्यों को जीत चुके थे, केवल उनके छोटे भाई बाहुबली का राज्य शेष था।
बाहुबली को यह बात बहुत बुरी लगी। उन्होंने संयत होकर उत्तर दिया: "मैं आपका सम्मान करता हूँ, परन्तु आप इस राज्य पर कुदृष्टि न डालें।" इस उत्तर से भरत क्रोधित हो उठे और युद्ध की घोषणा कर दी।
मल्लयुद्ध और चक्ररत्न का प्रयोग
भयंकर रक्तपात को रोकने के लिए मंत्रियों ने सुझाव दिया कि दोनों भाई आपस में 'मल्लयुद्ध' (कुश्ती) करके निर्णय कर लें। दोनों भाई अखाड़े में उतरे।
बाहुबली की भुजाओं में अपार शक्ति थी। जब भरत ने अपनी हार निकट देखी, तो आक्रोश में आकर उन्होंने बाहुबली पर "चक्ररत्न" नामक अमोघ अस्त्र चला दिया। यह अस्त्र कुटुम्बियों पर असर नहीं करता था, इसलिए वह बाहुबली के पास जाकर वापस लौट आया।
भरत के इस अनुचित व्यवहार से बाहुबली क्षुब्ध हो उठे। उन्होंने अपनी शक्तिशाली भुजाओं से भरत को सिर से ऊपर उठा लिया और उन्हें जमीन पर पटकने ही वाले थे कि...
विवेक का जागरण (वैराग्य)
अचानक बाहुबली का विवेक जाग उठा। उन्होंने सोचा—"धिक्कार है पृथ्वी के इस छोटे-से टुकड़े पर जिसके लिये मैं अपने ज्येष्ठ भ्राता को मारने को उद्यत हो गया।"
उन्होंने भरत को धीरे से नीचे उतारा और कहा: "संभालिये यह राज्य! मुझे ऐसा राज्य वैभव नहीं चाहिये जिसके लोभ में मनुष्य अपना विवेक खो बैठता है।"
बाहुबली ने उसी क्षण केवल राज्य ही नहीं, बल्कि संसार का भी त्याग कर दिया और सद्गुरु से दीक्षित होकर भक्ति-मार्ग पर चल पड़े।
सन्त कबीर की चेतावनी
संसारी मनुष्य धन-जायदाद के लिए अपनों का खून बहाने से भी नहीं हिचकिचाते। वे भूल जाते हैं कि हम यहाँ कुछ दिनों के मेहमान हैं। इसी सत्य को परमसन्त कबीर जी ने अपने दोहों में समझाया है:
ज्यों का त्यों ही रह गया, पकरि लै गया काल।।
चेता होहु तो चेति ल्यो, रैन दिवस चलै धार।।
सीस उठाये गाठरी, जात न देखा कोय।।

