एच.एच. विल्सन: ऋग्वेद और विष्णु पुराण के प्रथम अनुवादक, कोशकार और प्राच्य विद्या के रक्षक | H.H. Wilson

Sooraj Krishna Shastri
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एच.एच. विल्सन: संस्कृत के पहले बोडेन प्रोफेसर और पुराणों के उद्धारक

एच.एच. विल्सन: ऋग्वेद और विष्णु पुराण के प्रथम अनुवादक और प्राच्य विद्या के रक्षक

एक विस्तृत ऐतिहासिक विश्लेषण: वह सर्जन जो 'संस्कृत' का डॉक्टर बना और जिसने दुनिया को पहली बार 'पुराणों' का महत्व समझाया (The Pioneer of Puranic Studies)

इंडोलॉजी (भारतीय विद्या) के शुरुआती दौर में सर विलियम जोन्स ने जो मशाल जलाई थी, उसे थामने वाले सबसे सशक्त व्यक्ति होरेस हेमैन विल्सन (Horace Hayman Wilson) थे। वे केवल एक विद्वान नहीं थे; वे पेशे से एक डॉक्टर (सर्जन) थे और कलकत्ता टकसाल (Mint) के अधिकारी भी।

विल्सन का महत्व इसलिए अद्वितीय है क्योंकि उन्होंने उस समय पुराणों (Puranas) का अनुवाद किया जब पश्चिमी विद्वान उन्हें "बेकार की दंतकथाएं" मानते थे। उन्होंने दुनिया को दिखाया कि पुराणों में भारत का इतिहास और भूगोल छिपा है। साथ ही, वे ऋग्वेद का पहला पूर्ण अंग्रेजी अनुवाद करने वाले विद्वान भी बने।

📌 एच.एच. विल्सन: एक ऐतिहासिक प्रोफाइल
पूरा नाम होरेस हेमैन विल्सन (Horace Hayman Wilson)
काल 26 सितंबर 1786 – 8 मई 1860
राष्ट्रीयता ब्रिटिश (लंदन)
पेशा सर्जन (ईस्ट इंडिया कंपनी), टकसाल अधिकारी (Mint Master), संस्कृत विद्वान
भारत में कार्य सचिव, एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल (1811-1832)
प्रमुख पद प्रथम बोडेन प्रोफेसर ऑफ संस्कृत (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी)
महानतम कृति Sanskrit-English Dictionary (1819), Vishnu Purana Translation (1840)
दृष्टिकोण परंपरावादी (Traditionalist/Pro-Sayana)

2. जीवन परिचय: लंदन से कलकत्ता तक

एच.एच. विल्सन का जन्म लंदन में हुआ था। उन्होंने सेंट थॉमस हॉस्पिटल से चिकित्सा (Medicine) की पढ़ाई की। 1808 में, 22 वर्ष की आयु में, वे ईस्ट इंडिया कंपनी के सहायक सर्जन बनकर भारत (कलकत्ता) आए।

संस्कृत से प्रेम: जहाज पर आते समय ही उन्होंने संस्कृत सीखना शुरू कर दिया था। भारत आने पर, उनकी मुलाकात प्रसिद्ध विद्वान एच.टी. कोलब्रुक (H.T. Colebrooke) से हुई, जिन्होंने उन्हें एशियाटिक सोसाइटी में शामिल किया। विल्सन ने अपनी डॉक्टरी के साथ-साथ बनारस और कलकत्ता के पंडितों के चरणों में बैठकर संस्कृत सीखी। वे इतने निपुण हो गए कि 1832 में जब ऑक्सफोर्ड में संस्कृत की कुर्सी (Chair) स्थापित हुई, तो मैक्स मूलर जैसे दिग्गजों के होते हुए भी विल्सन को 'पहला बोडेन प्रोफेसर' चुना गया।

3. संस्कृत-अंग्रेजी शब्दकोश: पहली महान उपलब्धि

1819 में, विल्सन ने अपना पहला और सबसे महत्वपूर्ण कार्य प्रकाशित किया—"Sanskrit-English Dictionary"

शब्दकोश का महत्व

यह किसी यूरोपीय द्वारा तैयार किया गया पहला व्यवस्थित संस्कृत शब्दकोश था।
- इसमें उन्होंने शब्दों के साथ उनके मूल धातु (Roots) और व्याकरणिक रूपों को समझाया।
- यह शब्दकोश इतना महत्वपूर्ण था कि बाद में मोनिअर विलियम्स ने अपने प्रसिद्ध डिक्शनरी के लिए इसी को आधार बनाया। विल्सन का डिक्शनरी आज भी अपनी मौलिकता के लिए जाना जाता है।

4. विष्णु पुराण का अनुवाद: पुराणों का पुनरुद्धार

विल्सन का सबसे क्रांतिकारी कार्य "The Vishnu Purana" (1840) का अनुवाद था। उस समय तक पश्चिमी विद्वान वेदों को तो महत्व देते थे, लेकिन पुराणों को "अंधविश्वास" मानते थे।

विल्सन ने विष्णु पुराण का अनुवाद करके सिद्ध किया कि:
1. पुराण प्राचीन भारत के ऐतिहासिक, भौगोलिक और सामाजिक जीवन का आईना हैं।
2. इसमें मौर्य और गुप्त वंशों की वंशावलियां (Genealogies) सुरक्षित हैं।
3. यह ग्रंथ भक्ति और दर्शन का अद्भुत संगम है।
उनकी टिप्पणियां (Footnotes) आज भी पुराणों के शोधकर्ताओं के लिए अनिवार्य संदर्भ हैं।

5. ऋग्वेद का अनुवाद: सायण का सच्चा अनुयायी

विल्सन ने ऋग्वेद संहिता का पहला पूर्ण अंग्रेजी अनुवाद (6 खंडों में, 1850-1888) किया। इस अनुवाद की एक विशेष बात थी जो उन्हें मैक्स मूलर और रॉट से अलग करती है।

  • सायण का अनुसरण: विल्सन का मानना था कि 14वीं सदी के भाष्यकार आचार्य सायण भारत की जीवित परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। एक विदेशी (विल्सन) अपनी बुद्धि से वेदों का अर्थ नहीं निकाल सकता, उसे भारतीय परंपरा का सहारा लेना ही होगा।
  • विवाद: जर्मन विद्वान (रॉट, मैक्स मूलर) सायण को गलत मानते थे और 'तुलनात्मक भाषाविज्ञान' का उपयोग करते थे। विल्सन ने इसका विरोध किया और सायण के भाष्य के अनुसार ही अनुवाद किया। इसलिए विल्सन का अनुवाद 'परंपरागत' (Traditional) माना जाता है।

6. हिंदू रंगमंच: कालिदास और भवभूति का परिचय

1827 में उन्होंने "Select Specimens of the Theatre of the Hindus" प्रकाशित किया। इसमें उन्होंने संस्कृत के प्रसिद्ध नाटकों का अनुवाद किया, जैसे:
- मृच्छकटिकम् (शूद्रक)
- मुद्राराक्षस (विशाखदत्त)
- उत्तररामचरित (भवभूति)
- रत्नावली (हर्ष)

उन्होंने दुनिया को बताया कि भारतीय नाटक केवल धार्मिक नहीं हैं, बल्कि उनमें राजनीति (मुद्राराक्षस) और सामाजिक यथार्थ (मृच्छकटिकम्) का भी चित्रण है।

7. हिंदू संप्रदायों का अध्ययन (Religious Sects)

विल्सन ने "Religious Sects of the Hindus" (1828/1832) नामक एक शोधपूर्ण निबंध लिखा। यह आधुनिक काल में हिंदू संप्रदायों का पहला समाजशास्त्रीय अध्ययन (Sociological Study) था।

इसमें उन्होंने वैष्णव, शैव, शाक्त, नागा साधु, अघोरी, कबीरपंथी और सिख संप्रदायों का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने बताया कि 'हिंदू धर्म' कोई एक पुस्तक नहीं है, बल्कि हजारों संप्रदायों का एक वटवृक्ष है।

8. जेम्स मिल और शिक्षा विवाद: भारत का पक्ष

विल्सन के जीवन में एक विरोधाभास भी है। वे भारत प्रेमी थे, लेकिन ब्रिटिश अधिकारी भी।

  • जेम्स मिल का इतिहास: जेम्स मिल ने "History of British India" लिखकर भारत की बहुत निंदा की थी। विल्सन ने इस पुस्तक का नया संस्करण निकाला और उसमें ढेरों फुटन्ट्स (Footnotes) जोड़े, जिनमें उन्होंने मिल की गलतियों को सुधारा और भारत का बचाव किया।
  • ओरियंटलिस्ट बनाम एंग्लिसिस्ट: जब लॉर्ड मैकाले भारत में केवल अंग्रेजी शिक्षा लागू करना चाहते थे, तो विल्सन उन लोगों में प्रमुख थे जिन्होंने इसका विरोध किया। वे चाहते थे कि भारतीय शिक्षा संस्कृत और अरबी के माध्यम से भी दी जाए (ओरियंटलिस्ट पक्ष)। हालाँकि, वे हार गए, लेकिन उनका संघर्ष याद रखा जाता है।

9. निष्कर्ष: परंपरावादी इंडोलॉजिस्ट

एच.एच. विल्सन 19वीं सदी के इंडोलॉजी के **'पितामहों'** में से एक हैं। उन्होंने भारतीय ज्ञान को 'खोजा' नहीं, बल्कि उसे 'सम्मान' दिया।

विरासत

जहाँ मैक्स मूलर ने वेदों को 'भाषाविज्ञान' की प्रयोगशाला बनाया, वहीं विल्सन ने वेदों और पुराणों को 'भारतीय पंडितों की दृष्टि' से देखा। उनका ऋग्वेद अनुवाद आज भी उन लोगों के लिए सबसे भरोसेमंद स्रोत है जो 'परंपरागत अर्थ' जानना चाहते हैं।

वे एक ऐसे डॉक्टर थे जिन्होंने भारत के 'साहित्यिक शरीर' की नब्ज को पहचाना और उसे दुनिया के सामने जीवित कर दिया।


संदर्भ ग्रंथ एवं अनुशंसित पठन (References)

  • The Vishnu Purana - Translated by H.H. Wilson.
  • Rig-Veda Sanhita (First Ashtaka) - H.H. Wilson.
  • Select Specimens of the Theatre of the Hindus - H.H. Wilson.
  • Religious Sects of the Hindus - H.H. Wilson.
  • H.H. Wilson: Life and Legacy - Journals of the Royal Asiatic Society.

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