जब लक्ष्मी जी के चमत्कार ने खाली कर दी भगवान की सभा! 😲 Narayan vs Lakshmi Story

Sooraj Krishna Shastri
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नारायण और लक्ष्मी की परीक्षा

"जहाँ नारायण का वास, वहीं लक्ष्मी का निवास"

एक बार भगवान नारायण लक्ष्मी जी से बोले, “लोगों में कितनी भक्ति बढ़ गयी है, सब ‘नारायण नारायण’ करते हैं!”

🪷 लक्ष्मी जी बोलीं: “आपको पाने के लिए नहीं! मुझे पाने के लिए भक्ति बढ़ गयी है!”
🐚 भगवान बोले: “लोग ‘लक्ष्मी लक्ष्मी’ ऐसा जाप थोड़े ही ना करते हैं!”
🪷 लक्ष्मी जी बोलीं: “विश्वास ना हो तो परीक्षा हो जाए!”

भगवान की कथा

भगवान नारायण एक गाँव में ब्राह्मण का रूप लेकर गए और एक दरवाजा खटखटाया। घर के यजमान ने दरवाजा खोल कर पूछा, “कहाँ के हैं?”

भगवान बोले, “हम तुम्हारे नगर में भगवान का कथा-कीर्तन करना चाहते हैं।” यजमान ने सहमति दी और उन्हें अपने घर में ठहराया।

गाँव के लोग इकट्ठा हुए। पहले दिन कुछ लोग आये, लेकिन जब भगवान स्वयं कथा कर रहे थे तो संगत बढ़ी! दूसरे और तीसरे दिन और भी भीड़ हो गयी। भगवान खुश हो गए कि लोगों में कितनी भक्ति है!

माता लक्ष्मी का चमत्कार

लक्ष्मी माता ने सोचा अब देखा जाये कि क्या चल रहा है। उन्होंने एक बुढ्ढी माता का रूप लिया और नगर में पहुंचीं। एक महिला कथा में जा रही थी कि माता ने उसे रोककर पानी माँगा।

महिला ने पहले मना किया कि उसे सत्संग में देर हो रही है, लेकिन माता के बार-बार कहने पर उसने लोटा भरकर पानी पिलाया।

✨ चमत्कार ✨
माता ने पानी पिया और लोटा वापिस लौटाया तो वह सोने का हो गया था!!

महिला अचंभित हो गयी! स्टील का लोटा सोने का बन गया। उसने सोचा, "अगर माताजी खाना खाएंगी तो थाली, कटोरी, चम्मच सब सोने के हो जायेंगे!"

माता लक्ष्मी ने उसे जाने को कहा। वह महिला प्रवचन में तो गयी, लेकिन वहां उसने आस-पास की महिलाओं को यह बात बता दी। अब महिलायें यह बात सुनकर चालू सत्संग में से उठ कर चली गयीं!!

सत्संग खाली हो गया

अगले दिन कथा में भीड़ कम हो गयी। पता चला कि नगर में एक चमत्कारिक माताजी आई हैं, जिनके घर दूध पीने या खाना खाने से बर्तन सोने के हो जाते हैं। लोग कथा छोड़कर वहां भाग रहे थे।

भगवान नारायण समझ गए कि लक्ष्मी जी का आगमन हो चुका है। हद तो तब हो गयी जब यजमान सेठ जी (जिनके घर कथा थी) भी खिसक गए और लक्ष्मी जी के पास पहुंचे।

माता लक्ष्मी बोलीं: “सेठ जी! तुम्हारे घर तो मैं सबसे पहले आने वाली थी! लेकिन तुमने अपने घर में जिस कथाकार को ठहराया है ना, वो चला जाए तभी तो मैं आऊं!”

सेठ जी तुरंत मान गए। घर आकर महाराज (भगवान) से बोले, “महाराज आप अपना बिस्तर बांधो! आपकी व्यवस्था अबसे धर्मशाला में कर दी है!”

भगवान ने रुकने का आग्रह किया, लेकिन सेठ नहीं माने। इतने में लक्ष्मी जी वहां आ गयीं।

नारायण की जीत

माता लक्ष्मी जी भगवान् से बोलीं, “प्रभु, अब तो मान गए?”

भगवान नारायण बोले: “हां लक्ष्मी तुम्हारा प्रभाव तो है, लेकिन एक बात तुमको भी मेरी माननी पड़ेगी। तुम तब आई, जब संत के रूप में मैं यहाँ आया!! संत जहां कथा करेंगे वहाँ लक्ष्मी तुम्हारा निवास जरुर होगा…!!

यह कह कर नारायण भगवान् ने वहां से बैकुंठ के लिए विदाई ली।

प्रभु के जाने के बाद, सेठ के घर भीड़ लग गयी कि माता अब हमारे घर आएं। लेकिन लक्ष्मी माता ने सेठ और गाँव वालों से कहा, “अब मैं भी जा रही हूँ।”

माता ने कहा: “मैं वहीं रहती हूँ जहाँ नारायण का वास होता है। आपने नारायण को तो निकाल दिया, फिर मैं कैसे रह सकती हूँ?”

और वे भी चली गयीं। सेठ और गाँव वाले हाथ मलते रह गए।

।। शिक्षा ।।

जो लोग केवल माता लक्ष्मी को पूजते हैं, वे भगवान् नारायण से दूर हो जाते हैं।

अगर हम नारायण की पूजा करें तो लक्ष्मी तो वैसे ही पीछे-पीछे आ जाएँगी, क्योंकि वो उनके बिना रह ही नहीं सकतीं।

“जहाँ परमात्मा की याद है, वहाँ लक्ष्मी का वास होता है।
केवल लक्ष्मी के पीछे भागने वालों को न माया मिलती ना ही राम।”

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