परस्मैपदी 'पा' धातु (पीना)
भ्वादि गण की अत्यंत महत्त्वपूर्ण धातु। लाल रंग में अंकित रूप (जैसे- पास्यति, पपौ, अपात्) संस्कृत व्याकरण के सबसे रहस्यमयी सूत्र-परिवर्तनों को दर्शाते हैं।
💡 पा ➔ पिब् का रहस्य (V.V.Imp Rule)
पाणिनीय सूत्र 'पाघ्राध्मास्थानादाण्दृश्यर्ति...' के अनुसार शित् प्रत्यय (शप् विकरण) परे होने पर 'पा' धातु के स्थान पर 'पिब्' आदेश हो जाता है।
• अतः ४ लकारों (लट्, लोट्, लङ्, विधिलिङ्) में रूप 'पिबति' चलेंगे।
• शेष ६ आर्धधातुक लकारों (लृट्, लिट्, लुङ् आदि) में मूल धातु वापस आती है, अर्थात् रूप 'पास्यति' चलेंगे ('पिबिष्यति' नहीं)।
१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पिबति | पिबतः | पिबन्ति |
| मध्यम पुरुष | पिबसि | पिबथः | पिबथ |
| उत्तम पुरुष | पिबामि | पिबावः | पिबामः |
२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पास्यति | पास्यतः | पास्यन्ति |
| मध्यम पुरुष | पास्यसि | पास्यथः | पास्यथ |
| उत्तम पुरुष | पास्यामि | पास्यावः | पास्यामः |
💡 विशेष (लृट्): छात्र अक्सर अनुवाद में 'पिबिष्यति' लिख देते हैं, जो पूर्णतः अशुद्ध है। यहाँ 'पा' धातु अपने मूल रूप में रहती है, अतः 'पास्यति' (वह पिएगा) ही शुद्ध है।
३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पिबतु / पिबतात् | पिबताम् | पिबन्तु |
| मध्यम पुरुष | पिब / पिबतात् | पिबतम् | पिबत |
| उत्तम पुरुष | पिबानि | पिबाव | पिबाम |
४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | अपिबत् | अपिबताम् | अपिबन् |
| मध्यम पुरुष | अपिबः | अपिबतम् | अपिबत |
| उत्तम पुरुष | अपिबम् | अपिबाव | अपिबाम |
५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पिबेत् | पिबेताम् | पिबेयुः |
| मध्यम पुरुष | पिबेः | पिबेतम् | पिबेत |
| उत्तम पुरुष | पिबेयम् | पिबेव | पिबेम |
६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पपौ | पपतुः | पपुः |
| मध्यम पुरुष | पपाथ / पपिथ | पपथुः | पप |
| उत्तम पुरुष | पपौ / पप | पपिव | पपिम |
💡 विशेष (लिट् - V.V.Imp): यह रूप बहुत विशिष्ट है! प्रथम पुरुष एकवचन में 'पपाप' नहीं, बल्कि 'आतो णलप्...' सूत्र से 'औ' होकर 'पपौ' बनता है। मध्यम पुरुष में विकल्प से 'पपाथ' या 'पपिथ' रूप बनता है।
७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पाता | पातारौ | पातारः |
| मध्यम पुरुष | पातासि | पातास्थः | पातास्थ |
| उत्तम पुरुष | पातास्मि | पातास्वः | पातास्मः |
८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पेयात् | पेयास्ताम् | पेयासुः |
| मध्यम पुरुष | पेयाः | पेयास्तम् | पेयास्त |
| उत्तम पुरुष | पेयासम् | पेयास्व | पेयास्म |
💡 विशेष (आशीर्लिङ्): यहाँ सूत्र 'एर्लिङि' से 'पा' के 'आ' को 'ए' हो जाता है, जिससे 'पायात्' के स्थान पर 'पेयात्' रूप बनता है।
९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | अपात् | अपाताम् | अपुः |
| मध्यम पुरुष | अपाः | अपातम् | अपात |
| उत्तम पुरुष | अपाम् | अपाव | अपाम |
💡 विशेष (लुङ् - V.V.Imp): यह सबसे 'धोखेबाज़' लकार है! सूत्र 'गातिस्थाघुपाभूभ्यः सिचः परस्मैपदेषु' के अनुसार यहाँ 'सिच्' प्रत्यय का लोप (लुक्) हो जाता है। इसलिए 'अपासीत्' की जगह सीधा 'अपात्' (उसने पिया) और बहुवचन में 'अपुः' बनता है।
१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भाव / Conditional)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | अपास्यत् | अपास्यताम् | अपास्यन् |
| मध्यम पुरुष | अपास्यः | अपास्यतम् | अपास्यत |
| उत्तम पुरुष | अपास्यम् | अपास्याव | अपास्याम |