परस्मैपदी 'दृश्' धातु (देखना) | 10 लकारों में रूप | parasmaipadi drish dhatu roop

Sooraj Krishna Shastri
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परस्मैपदी 'दृश्' धातु (देखना)

भ्वादि गण की अत्यंत महत्त्वपूर्ण धातु। लाल रंग में अंकित रूप (जैसे- द्रक्ष्यति, ददर्श, अद्राक्षीत्) संस्कृत व्याकरण के सबसे रहस्यमयी सूत्र-परिवर्तनों को दर्शाते हैं।

💡 दृश् ➔ पश्य् का रहस्य (V.V.Imp Rule)

पाणिनीय सूत्र 'पाघ्राध्मास्थाम्नादाण्दृश्यर्ति...' के अनुसार शित् प्रत्यय (शप् विकरण) परे होने पर 'दृश्' धातु के स्थान पर 'पश्य्' आदेश हो जाता है।
• अतः ४ लकारों (लट्, लोट्, लङ्, विधिलिङ्) में रूप 'पश्यति' चलेंगे।
• शेष ६ आर्धधातुक लकारों (लृट्, लिट्, लुङ् आदि) में मूल धातु वापस आती है, लेकिन 'सृजिदृशोर्झल्यमकिति' सूत्र से 'ऋ' को 'र्' (अम् आगम) और श्+स=क्ष होकर 'द्रक्ष्यति' जैसे अद्भुत रूप बनते हैं!

पञ्च प्रमुख लकार (सर्वाधिक प्रयुक्त)

१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपश्यतिपश्यतःपश्यन्ति
मध्यम पुरुषपश्यसिपश्यथःपश्यथ
उत्तम पुरुषपश्यामिपश्यावःपश्यामः

२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषद्रक्ष्यतिद्रक्ष्यतःद्रक्ष्यन्ति
मध्यम पुरुषद्रक्ष्यसिद्रक्ष्यथःद्रक्ष्यथ
उत्तम पुरुषद्रक्ष्यामिद्रक्ष्यावःद्रक्ष्यामः
💡 विशेष (लृट्): छात्र 'पश्यिष्यति' या 'दृशिष्यति' लिखकर गलती करते हैं। यहाँ 'दृश्' का 'द्रश्' होता है और श्+स् मिलकर 'क्ष' बनता है, अतः 'द्रक्ष्यति' ही शुद्ध रूप है।

३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपश्यतु / पश्यतात्पश्यताम्पश्यन्तु
मध्यम पुरुषपश्य / पश्यतात्पश्यतम्पश्यत
उत्तम पुरुषपश्यानिपश्यावपश्याम

४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअपश्यत्अपश्यताम्अपश्यन्
मध्यम पुरुषअपश्यःअपश्यतम्अपश्यत
उत्तम पुरुषअपश्यम्अपश्यावअपश्याम

५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपश्येत्पश्येताम्पश्येयुः
मध्यम पुरुषपश्येःपश्येतम्पश्येत
उत्तम पुरुषपश्येयम्पश्येवपश्येम

पञ्च विशिष्ट लकार (TGT/PGT Special)

६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषददर्शददृशतुःददृशुः
मध्यम पुरुषददर्शिथ (दद्रष्ठ)ददृशथुःददृश
उत्तम पुरुषददर्श (ददर्शौ)ददृशिवददृशिम
💡 विशेष (लिट् - V.V.Imp): द्वित्व होकर 'ददर्श' बनता है। मध्यम पुरुष एकवचन में 'ददर्शिथ' और विकल्प से 'दद्रष्ठ' रूप बनता है। उत्तम पुरुष एकवचन में 'ददर्श' (या ददर्शौ) बनता है।

७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषद्रष्टाद्रष्टारौद्रष्टारः
मध्यम पुरुषद्रष्टासिद्रष्टास्थःद्रष्टास्थ
उत्तम पुरुषद्रष्टास्मिद्रष्टास्वःद्रष्टास्मः
💡 विशेष (लुट्): यह धातु अनिँट् है (इट् का आगम नहीं होता), अतः 'दर्शिता' के स्थान पर श्+त=ष्ट होकर 'द्रष्टा' रूप बनता है।

८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषदृश्यात्दृश्यास्ताम्दृश्यासुः
मध्यम पुरुषदृश्याःदृश्यास्तम्दृश्यास्त
उत्तम पुरुषदृश्यासम्दृश्यास्वदृश्यास्म

९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअद्राक्षीत्अद्राष्टाम्अद्राक्षुः
मध्यम पुरुषअद्राक्षीःअद्राष्टम्अद्राष्ट
उत्तम पुरुषअद्राक्षम्अद्राक्ष्वअद्राक्ष्म
💡 विशेष (लुङ् - V.V.Imp): यह रूप 'लङ्' (अपश्यत्) से बिल्कुल अलग है! यहाँ 'दृश्' के 'ऋ' को वृद्धि (आ) और र् (अम् आगम) होकर 'द्राक्' बनता है। सिच् प्रत्यय के कारण 'अद्राक्षीत्' (उसने देखा) रूप बनता है।

१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भाव / Conditional)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअद्रक्ष्यत्अद्रक्ष्यताम्अद्रक्ष्यन्
मध्यम पुरुषअद्रक्ष्यःअद्रक्ष्यतम्अद्रक्ष्यत
उत्तम पुरुषअद्रक्ष्यम्अद्रक्ष्यावअद्रक्ष्याम

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