परस्मैपदी 'दृश्' धातु (देखना)
भ्वादि गण की अत्यंत महत्त्वपूर्ण धातु। लाल रंग में अंकित रूप (जैसे- द्रक्ष्यति, ददर्श, अद्राक्षीत्) संस्कृत व्याकरण के सबसे रहस्यमयी सूत्र-परिवर्तनों को दर्शाते हैं।
💡 दृश् ➔ पश्य् का रहस्य (V.V.Imp Rule)
पाणिनीय सूत्र 'पाघ्राध्मास्थाम्नादाण्दृश्यर्ति...' के अनुसार शित् प्रत्यय (शप् विकरण) परे होने पर 'दृश्' धातु के स्थान पर 'पश्य्' आदेश हो जाता है।
• अतः ४ लकारों (लट्, लोट्, लङ्, विधिलिङ्) में रूप 'पश्यति' चलेंगे।
• शेष ६ आर्धधातुक लकारों (लृट्, लिट्, लुङ् आदि) में मूल धातु वापस आती है, लेकिन 'सृजिदृशोर्झल्यमकिति' सूत्र से 'ऋ' को 'र्' (अम् आगम) और श्+स=क्ष होकर 'द्रक्ष्यति' जैसे अद्भुत रूप बनते हैं!
पञ्च प्रमुख लकार (सर्वाधिक प्रयुक्त)
१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पश्यति | पश्यतः | पश्यन्ति |
| मध्यम पुरुष | पश्यसि | पश्यथः | पश्यथ |
| उत्तम पुरुष | पश्यामि | पश्यावः | पश्यामः |
२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | द्रक्ष्यति | द्रक्ष्यतः | द्रक्ष्यन्ति |
| मध्यम पुरुष | द्रक्ष्यसि | द्रक्ष्यथः | द्रक्ष्यथ |
| उत्तम पुरुष | द्रक्ष्यामि | द्रक्ष्यावः | द्रक्ष्यामः |
💡 विशेष (लृट्): छात्र 'पश्यिष्यति' या 'दृशिष्यति' लिखकर गलती करते हैं। यहाँ 'दृश्' का 'द्रश्' होता है और श्+स् मिलकर 'क्ष' बनता है, अतः 'द्रक्ष्यति' ही शुद्ध रूप है।
३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पश्यतु / पश्यतात् | पश्यताम् | पश्यन्तु |
| मध्यम पुरुष | पश्य / पश्यतात् | पश्यतम् | पश्यत |
| उत्तम पुरुष | पश्यानि | पश्याव | पश्याम |
४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | अपश्यत् | अपश्यताम् | अपश्यन् |
| मध्यम पुरुष | अपश्यः | अपश्यतम् | अपश्यत |
| उत्तम पुरुष | अपश्यम् | अपश्याव | अपश्याम |
५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पश्येत् | पश्येताम् | पश्येयुः |
| मध्यम पुरुष | पश्येः | पश्येतम् | पश्येत |
| उत्तम पुरुष | पश्येयम् | पश्येव | पश्येम |
पञ्च विशिष्ट लकार (TGT/PGT Special)
६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | ददर्श | ददृशतुः | ददृशुः |
| मध्यम पुरुष | ददर्शिथ (दद्रष्ठ) | ददृशथुः | ददृश |
| उत्तम पुरुष | ददर्श (ददर्शौ) | ददृशिव | ददृशिम |
💡 विशेष (लिट् - V.V.Imp): द्वित्व होकर 'ददर्श' बनता है। मध्यम पुरुष एकवचन में 'ददर्शिथ' और विकल्प से 'दद्रष्ठ' रूप बनता है। उत्तम पुरुष एकवचन में 'ददर्श' (या ददर्शौ) बनता है।
७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | द्रष्टा | द्रष्टारौ | द्रष्टारः |
| मध्यम पुरुष | द्रष्टासि | द्रष्टास्थः | द्रष्टास्थ |
| उत्तम पुरुष | द्रष्टास्मि | द्रष्टास्वः | द्रष्टास्मः |
💡 विशेष (लुट्): यह धातु अनिँट् है (इट् का आगम नहीं होता), अतः 'दर्शिता' के स्थान पर श्+त=ष्ट होकर 'द्रष्टा' रूप बनता है।
८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | दृश्यात् | दृश्यास्ताम् | दृश्यासुः |
| मध्यम पुरुष | दृश्याः | दृश्यास्तम् | दृश्यास्त |
| उत्तम पुरुष | दृश्यासम् | दृश्यास्व | दृश्यास्म |
९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | अद्राक्षीत् | अद्राष्टाम् | अद्राक्षुः |
| मध्यम पुरुष | अद्राक्षीः | अद्राष्टम् | अद्राष्ट |
| उत्तम पुरुष | अद्राक्षम् | अद्राक्ष्व | अद्राक्ष्म |
💡 विशेष (लुङ् - V.V.Imp): यह रूप 'लङ्' (अपश्यत्) से बिल्कुल अलग है! यहाँ 'दृश्' के 'ऋ' को वृद्धि (आ) और र् (अम् आगम) होकर 'द्राक्' बनता है। सिच् प्रत्यय के कारण 'अद्राक्षीत्' (उसने देखा) रूप बनता है।
१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भाव / Conditional)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | अद्रक्ष्यत् | अद्रक्ष्यताम् | अद्रक्ष्यन् |
| मध्यम पुरुष | अद्रक्ष्यः | अद्रक्ष्यतम् | अद्रक्ष्यत |
| उत्तम पुरुष | अद्रक्ष्यम् | अद्रक्ष्याव | अद्रक्ष्याम |