दिशाशूल (Disha Shool) क्या है? दिशाशूल चार्ट, नियम और यात्रा के उपाय

Sooraj Krishna Shastri
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दिक्शूल (दिशाशूल) विचार: यात्रा के महत्वपूर्ण नियम

दिक्शूल (दिशाशूल) भारतीय ज्योतिष और पंचांग (मुहूर्त शास्त्र) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। 'दिक्' या 'दिशा' का अर्थ है दिशा (Direction), और 'शूल' का अर्थ है कांटा या बाधा (Obstacle)। मान्यता है कि दिशाशूल वाले दिन उस विशेष दिशा में यात्रा करने से कार्य में बाधाएं आती हैं या यात्रा में कष्ट का सामना करना पड़ता है।

सप्ताह के दिन और दिशाशूल

दिन (Day) दिशाशूल (Direction)
सोमवार और शनिवार पूर्व दिशा (East)
रविवार और शुक्रवार पश्चिम दिशा (West)
गुरुवार (वीरवार) दक्षिण दिशा (South)
मंगलवार और बुधवार उत्तर दिशा (North)

दिशाशूल के परिहार (उपाय)

यदि किसी दिन दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करना अनिवार्य हो, तो ज्योतिष शास्त्र में कुछ परिहार बताए गए हैं। इन्हें ग्रहण करके निकलने से दोष कम होता है:

  • रविवार: घर से दलिया, पान या घी खाकर निकलें।
  • सोमवार: शीशे (दर्पण) में अपना चेहरा देखकर घर से निकलें।
  • मंगलवार: थोड़ा सा गुड़ (Jaggery) खाकर प्रस्थान करें।
  • बुधवार: साबुत धनिया या तिल खाकर निकलें।
  • गुरुवार: दही या जीरा खाकर यात्रा शुरू करें।
  • शुक्रवार: राई (सरसों) या जौ खाकर निकलें।
  • शनिवार: अदरक या उड़द की दाल खाकर यात्रा आरंभ करें।

विशेष नियम और अपवाद

उसी दिन वापसी: यदि आप सूर्यास्त से पहले वापस लौट आते हैं, तो दिशाशूल का विचार नहीं किया जाता।

दैनिक कार्य: ऑफिस, दुकान या रोज़मर्रा के कार्यों में दिशाशूल लागू नहीं होता।

प्रस्थान रखना: यदि यात्रा टालना संभव न हो, तो एक दिन पहले ही गंतव्य की दिशा में अपना कोई सामान (प्रस्थान) रखवा दें।

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