ज्ञा धातु रूप (उभयपदी) - १० लकार, अर्थ एवं व्याकरण | Jna Dhatu Roop in Sanskrit

Sooraj Krishna Shastri
By -
0
ज्ञा धातु रूप (उभयपदी) - १० लकार, अर्थ एवं व्याकरण | Jna Dhatu Roop in Sanskrit

उभयपदी 'ज्ञा' धातु (जानना / To Know)

क्र्यादि गण (9वें गण) की अत्यंत महत्त्वपूर्ण धातु। यह उभयपदी है, अतः इसके रूप परस्मैपदी (जानाति) और आत्मनेपदी (जानीते) दोनों में चलते हैं। इसमें 'ज्ञा' को 'जा' आदेश होने का विशिष्ट नियम लागू होता है।

💡 'ज्ञा' से 'जाना' बनने का रहस्य (V.V.Imp)

• क्र्यादि गण की धातु होने के कारण यहाँ 'श्ना' (ना) विकरण लगता है। पाणिनीय सूत्र 'ज्ञाजनोर्जा' के अनुसार 'ज्ञा' को 'जा' आदेश हो जाता है। अतः लट् आदि 4 सार्वधातुक लकारों में रूप 'जानाति' (जा + ना + ति) या 'जानीते' बनते हैं।
• लृट् (भविष्यत्) और लुङ् आदि 6 आर्धधातुक लकारों में मूल धातु 'ज्ञा' वापस आ जाती है। अतः भविष्यत् में 'जानास्यति' नहीं, बल्कि शुद्ध रूप 'ज्ञास्यति / ज्ञास्यते' (वह जानेगा) बनता है।

१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषजानातिजानीतःजानन्ति
मध्यम पुरुषजानासिजानीथःजानीथ
उत्तम पुरुषजानामिजानीवःजानीमः
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषजानीतेजानातेजानते
मध्यम पुरुषजानीषेजानाथेजानीध्वे
उत्तम पुरुषजानेजानीवहेजानीमहे
💡 ध्यान दें: एकवचन में 'जाना' (जैसे- जानाति) और द्विवचन/बहुवचन में प्रायः 'जानी/जान्' (जानीतः, जानन्ति) हो जाता है।

२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषज्ञास्यतिज्ञास्यतःज्ञास्यन्ति
मध्यम पुरुषज्ञास्यसिज्ञास्यथःज्ञास्यथ
उत्तम पुरुषज्ञास्यामिज्ञास्यावःज्ञास्यामः
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषज्ञास्यतेज्ञास्येतेज्ञास्यन्ते
मध्यम पुरुषज्ञास्यसेज्ञास्येथेज्ञास्यध्वे
उत्तम पुरुषज्ञास्येज्ञास्यावहेज्ञास्यामहे

३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषजानातु / जानीतात्जानीताम्जानन्तु
मध्यम पुरुषजानीहि / जानीतात्जानीतम्जानीत
उत्तम पुरुषजानानिजानावजानाम
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषजानीताम्जानाताम्जानताम्
मध्यम पुरुषजानीष्वजानाथाम्जानीध्वम्
उत्तम पुरुषजानैजानावहैजानामहै

४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअजानात्अजानीताम्अजानन्
मध्यम पुरुषअजानाःअजानीतम्अजानीत
उत्तम पुरुषअजानाम्अजानीवअजानीम
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअजानीतअजानाताम्अजानत
मध्यम पुरुषअजानीथाःअजानाथाम्अजानीध्वम्
उत्तम पुरुषअजानिअजानीवहिअजानीमहि

५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषजानीयात्जानीयाताम्जानीयुः
मध्यम पुरुषजानीयाःजानीयातम्जानीयात
उत्तम पुरुषजानीयाम्जानीयावजानीयाम
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषजानीतजानीयाताम्जानीरन्
मध्यम पुरुषजानीथाःजानीयाथाम्जानीध्वम्
उत्तम पुरुषजानीयजानीवहिजानीमहि

६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषजज्ञौजज्ञतुःजज्ञुः
मध्यम पुरुषजज्ञिथ / जज्ञाथजज्ञथुःजज्ञ
उत्तम पुरुषजज्ञौजज्ञिवजज्ञिम
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषजज्ञेजज्ञातेजज्ञिरे
मध्यम पुरुषजज्ञिषेजज्ञाथेजज्ञिध्वे / जज्ञिढ्वे
उत्तम पुरुषजज्ञेजज्ञिवहेजज्ञिमहे
💡 विशेष (लिट्): द्विर्वचन होकर 'ज्ञा' का 'जज्ञ्' बन जाता है। आकारांत धातु होने के कारण प्रथम पुरुष एकवचन में 'औ' होकर 'जज्ञौ' और आत्मनेपदी में 'जज्ञे' रूप निष्पन्न होता है।

७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषज्ञाताज्ञातारौज्ञातारः
मध्यम पुरुषज्ञातासिज्ञातास्थःज्ञातास्थ
उत्तम पुरुषज्ञातास्मिज्ञातास्वःज्ञातास्मः
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषज्ञाताज्ञातारौज्ञातारः
मध्यम पुरुषज्ञातासेज्ञातासाथेज्ञाताध्वे
उत्तम पुरुषज्ञाताहेज्ञातास्वहेज्ञातास्महे

८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषज्ञेयात्ज्ञेयास्ताम्ज्ञेयासुः
मध्यम पुरुषज्ञेयाःज्ञेयास्तम्ज्ञेयास्त
उत्तम पुरुषज्ञेयासम्ज्ञेयास्वज्ञेयास्म
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषज्ञासीष्टज्ञासीयास्ताम्ज्ञासीरन्
मध्यम पुरुषज्ञासीष्ठाःज्ञासीयाथाम्ज्ञासीध्वम्
उत्तम पुरुषज्ञासीयज्ञासीवहिज्ञासीमहि
💡 विशेष (आशीर्लिङ्): सूत्र 'एर्लिङि' से आकारांत धातु के 'आ' को 'ए' हो जाता है, जिससे परस्मैपदी में 'ज्ञेयात्' रूप बनता है। किन्तु आत्मनेपदी में 'सीयुट्' का आगम होकर 'ज्ञासीष्ट' रूप ही रहता है (ज्ञेसीष्ट नहीं)।

९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअज्ञासीत्अज्ञासिष्टाम्अज्ञासिषुः
मध्यम पुरुषअज्ञासीःअज्ञासिष्टम्अज्ञासिष्ट
उत्तम पुरुषअज्ञासिषम्अज्ञासिष्वअज्ञासिष्म
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअज्ञास्तअज्ञासाताम्अज्ञासत
मध्यम पुरुषअज्ञास्थाःअज्ञासाथाम्अज्ञाध्वम्
उत्तम पुरुषअज्ञासिअज्ञास्वहिअज्ञास्महि
💡 विशेष (लुङ्): यह कृ और पच् धातु से भिन्न है। यहाँ परस्मैपदी में सिच् और ईट् का आगम होकर 'अज्ञासीत्' बनता है। वहीं आत्मनेपदी में 'अ + ज्ञा + स् + त' मिलकर 'अज्ञास्त' (उसने जाना) सिद्ध होता है।

१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भाव / Conditional)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअज्ञास्यत्अज्ञास्यताम्अज्ञास्यन्
मध्यम पुरुषअज्ञास्यःअज्ञास्यतम्अज्ञास्यत
उत्तम पुरुषअज्ञास्यम्अज्ञास्यावअज्ञास्याम
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअज्ञास्यतअज्ञास्येताम्अज्ञास्यन्त
मध्यम पुरुषअज्ञास्यथाःअज्ञास्येथाम्अज्ञास्यध्वम्
उत्तम पुरुषअज्ञास्येअज्ञास्यावहिअज्ञास्यामहि

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!