उभयपदी 'पच्' धातु (पकाना)
भ्वादि गण की प्रमुख धातु। यह उभयपदी है, अतः इसके रूप परस्मैपदी (पचति) और आत्मनेपदी (पचते) दोनों में चलते हैं। यह एक 'अनिट्' धातु है, जिसके कारण इसके भविष्यत् काल के रूपों में चवर्ग का कवर्ग (चोः कुः) होकर क्ष (क् + ष्) बन जाता है।
💡 अनिट् धातु होने पर 'चोः कुः' सन्धि (V.V.Imp)
• 'पच्' एक अनिट् धातु है, अर्थात् लृट्, लुट्, लुङ् आदि लकारों में 'इट्' (इ) का आगम नहीं होता।
• लृट् लकार: 'पच् + स्यति' होने पर 'चोः कुः' सूत्र से 'च्' को 'क्' होता है, फिर 'क् + स्' मिलकर 'क्ष्' हो जाते हैं। अतः 'पक्ष्यति' / 'पक्ष्यते' रूप सिद्ध होते हैं (पचिष्यति अशुद्ध है)।
• लुङ् लकार: 'च्' को 'क्' होकर परस्मैपदी में 'अपाक्षीत्' (वृद्धि होकर) और आत्मनेपदी में सिच् का लोप होकर 'अपक्त' रूप बनता है।
१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पचति | पचतः | पचन्ति |
| मध्यम पुरुष | पचसि | पचथः | पचथ |
| उत्तम पुरुष | पचामि | पचावः | पचामः |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पचते | पचेते | पचन्ते |
| मध्यम पुरुष | पचसे | पचेथे | पचध्वे |
| उत्तम पुरुष | पचे | पचावहे | पचामहे |
२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पक्ष्यति | पक्ष्यतः | पक्ष्यन्ति |
| मध्यम पुरुष | पक्ष्यसि | पक्ष्यथः | पक्ष्यथ |
| उत्तम पुरुष | पक्ष्यामि | पक्ष्यावः | पक्ष्यामः |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पक्ष्यते | पक्ष्येते | पक्ष्यन्ते |
| मध्यम पुरुष | पक्ष्यसे | पक्ष्येथे | पक्ष्यध्वे |
| उत्तम पुरुष | पक्ष्ये | पक्ष्यावहे | पक्ष्यामहे |
💡 विशेष (लृट्): इडागम न होने से 'पच्' के 'च्' का 'क्' और प्रत्यय के 'स्' का 'ष्' होकर पक्ष्यति / पक्ष्यते (वह पकाएगा) रूप बनते हैं।
३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पचतु / पचतात् | पचताम् | पचन्तु |
| मध्यम पुरुष | पच / पचतात् | पचतम् | पचत |
| उत्तम पुरुष | पचानि | पचाव | पचाम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पचताम् | पचेताम् | पचन्ताम् |
| मध्यम पुरुष | पचस्व | पचेथाम् | पचध्वम् |
| उत्तम पुरुष | पचै | पचावहै | पचामहै |
४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अपचत् | अपचताम् | अपचन् |
| मध्यम पुरुष | अपचः | अपचतम् | अपचत |
| उत्तम पुरुष | अपचम् | अपचाव | अपचाम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अपचत | अपचेताम् | अपचन्त |
| मध्यम पुरुष | अपचथाः | अपचेथाम् | अपचध्वम् |
| उत्तम पुरुष | अपचे | अपचावहि | अपचामहि |
५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पचेत् | पचेताम् | पचेयुः |
| मध्यम पुरुष | पचेः | पचेतम् | पचेत |
| उत्तम पुरुष | पचेयम् | पचेव | पचेम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पचेत | पचेयाताम् | पचेरन् |
| मध्यम पुरुष | पचेथाः | पचेयाथाम् | पचेध्वम् |
| उत्तम पुरुष | पचेय | पचेवहि | पचेमहि |
६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पपाच | पेचतुः | पेचुः |
| मध्यम पुरुष | पपक्थ / पेचिथ | पेचथुः | पेच |
| उत्तम पुरुष | पपाच / पपच | पेचिव | पेचिम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पेचे | पेचाते | पेचिरे |
| मध्यम पुरुष | पेचिषे | पेचाथे | पेचिध्वे / पेचिढ्वे |
| उत्तम पुरुष | पेचे | पेचिवहे | पेचिमहे |
💡 विशेष (लिट्): द्विर्वचन होकर (पच् + पच्) 'एत्वाभ्यासलोप' के कारण 'अ' को 'ए' होकर और अभ्यास का लोप होकर पेचतुः / पेचे जैसे रूप सिद्ध होते हैं। प्रथम पुरुष एकवचन में पपाच (उसने पकाया) बनता है।
७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पक्ता | पक्तारौ | पक्तारः |
| मध्यम पुरुष | पक्तासि | पक्तास्थः | पक्तास्थ |
| उत्तम पुरुष | पक्तास्मि | पक्तास्वः | पक्तास्मः |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पक्ता | पक्तारौ | पक्तारः |
| मध्यम पुरुष | पक्तासे | पक्तासाथे | पक्ताध्वे |
| उत्तम पुरुष | पक्ताहे | पक्तास्वहे | पक्तास्महे |
💡 विशेष (लुट्): 'पच् + ता' होने पर 'चोः कुः' से 'च्' को 'क्' होकर 'पक्ता' रूप बनता है (पचिता नहीं)।
८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पच्यात् | पच्यास्ताम् | पच्यासुः |
| मध्यम पुरुष | पच्याः | पच्यास्तम् | पच्यास्त |
| उत्तम पुरुष | पच्यासम् | पच्यास्व | पच्यास्म |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पक्षीष्ट | पक्षीयास्ताम् | पक्षीरन् |
| मध्यम पुरुष | पक्षीष्ठाः | पक्षीयाथाम् | पक्षीध्वम् |
| उत्तम पुरुष | पक्षीय | पक्षीवहि | पक्षीमहि |
९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अपाक्षीत् | अपाक्ताम् | अपाक्षुः |
| मध्यम पुरुष | अपाक्षीः | अपाक्तम् | अपाक्त |
| उत्तम पुरुष | अपाक्षम् | अपाक्ष्व | अपाक्ष्म |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अपक्त | अपक्षाताम् | अपक्षत |
| मध्यम पुरुष | अपक्थाः | अपक्षाथाम् | अपग्ध्वम् / अपक्ध्वम् |
| उत्तम पुरुष | अपक्षि | अपक्ष्वहि | अपक्ष्महि |
💡 विशेष (लुङ् - V.V.Imp): परस्मैपदी में अडागम, 'सिच्' प्रत्यय और वृद्धि होकर 'अपाक्षीत्' सिद्ध होता है। वहीं आत्मनेपदी में झल् (च् ➔ क्) के बाद झल् (त) आने से 'सिच्' (स्) का लोप (झलो झलि) होकर सीधे 'अपक्त' रूप बनता है।
१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भाव / Conditional)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अपक्ष्यत् | अपक्ष्यताम् | अपक्ष्यन् |
| मध्यम पुरुष | अपक्ष्यः | अपक्ष्यतम् | अपक्ष्यत |
| उत्तम पुरुष | अपक्ष्यम् | अपक्ष्याव | अपक्ष्याम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अपक्ष्यत | अपक्ष्येताम् | अपक्ष्यन्त |
| मध्यम पुरुष | अपक्ष्यथाः | अपक्ष्येथाम् | अपक्ष्यध्वम् |
| उत्तम पुरुष | अपक्ष्ये | अपक्ष्यावहि | अपक्ष्यामहि |
