पच् धातु रूप (उभयपदी) - १० लकार, अर्थ एवं व्याकरण | Pach Dhatu Roop in Sanskrit

Sooraj Krishna Shastri
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पच् धातु रूप (उभयपदी) - १० लकार, अर्थ एवं व्याकरण | Pach Dhatu Roop in Sanskrit

उभयपदी 'पच्' धातु (पकाना)

भ्वादि गण की प्रमुख धातु। यह उभयपदी है, अतः इसके रूप परस्मैपदी (पचति) और आत्मनेपदी (पचते) दोनों में चलते हैं। यह एक 'अनिट्' धातु है, जिसके कारण इसके भविष्यत् काल के रूपों में चवर्ग का कवर्ग (चोः कुः) होकर क्ष (क् + ष्) बन जाता है।

💡 अनिट् धातु होने पर 'चोः कुः' सन्धि (V.V.Imp)

• 'पच्' एक अनिट् धातु है, अर्थात् लृट्, लुट्, लुङ् आदि लकारों में 'इट्' (इ) का आगम नहीं होता।
लृट् लकार: 'पच् + स्यति' होने पर 'चोः कुः' सूत्र से 'च्' को 'क्' होता है, फिर 'क् + स्' मिलकर 'क्ष्' हो जाते हैं। अतः 'पक्ष्यति' / 'पक्ष्यते' रूप सिद्ध होते हैं (पचिष्यति अशुद्ध है)।
लुङ् लकार: 'च्' को 'क्' होकर परस्मैपदी में 'अपाक्षीत्' (वृद्धि होकर) और आत्मनेपदी में सिच् का लोप होकर 'अपक्त' रूप बनता है।

१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपचतिपचतःपचन्ति
मध्यम पुरुषपचसिपचथःपचथ
उत्तम पुरुषपचामिपचावःपचामः
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपचतेपचेतेपचन्ते
मध्यम पुरुषपचसेपचेथेपचध्वे
उत्तम पुरुषपचेपचावहेपचामहे

२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपक्ष्यतिपक्ष्यतःपक्ष्यन्ति
मध्यम पुरुषपक्ष्यसिपक्ष्यथःपक्ष्यथ
उत्तम पुरुषपक्ष्यामिपक्ष्यावःपक्ष्यामः
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपक्ष्यतेपक्ष्येतेपक्ष्यन्ते
मध्यम पुरुषपक्ष्यसेपक्ष्येथेपक्ष्यध्वे
उत्तम पुरुषपक्ष्येपक्ष्यावहेपक्ष्यामहे
💡 विशेष (लृट्): इडागम न होने से 'पच्' के 'च्' का 'क्' और प्रत्यय के 'स्' का 'ष्' होकर पक्ष्यति / पक्ष्यते (वह पकाएगा) रूप बनते हैं।

३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपचतु / पचतात्पचताम्पचन्तु
मध्यम पुरुषपच / पचतात्पचतम्पचत
उत्तम पुरुषपचानिपचावपचाम
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपचताम्पचेताम्पचन्ताम्
मध्यम पुरुषपचस्वपचेथाम्पचध्वम्
उत्तम पुरुषपचैपचावहैपचामहै

४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअपचत्अपचताम्अपचन्
मध्यम पुरुषअपचःअपचतम्अपचत
उत्तम पुरुषअपचम्अपचावअपचाम
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअपचतअपचेताम्अपचन्त
मध्यम पुरुषअपचथाःअपचेथाम्अपचध्वम्
उत्तम पुरुषअपचेअपचावहिअपचामहि

५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपचेत्पचेताम्पचेयुः
मध्यम पुरुषपचेःपचेतम्पचेत
उत्तम पुरुषपचेयम्पचेवपचेम
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपचेतपचेयाताम्पचेरन्
मध्यम पुरुषपचेथाःपचेयाथाम्पचेध्वम्
उत्तम पुरुषपचेयपचेवहिपचेमहि

६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपपाचपेचतुःपेचुः
मध्यम पुरुषपपक्थ / पेचिथपेचथुःपेच
उत्तम पुरुषपपाच / पपचपेचिवपेचिम
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपेचेपेचातेपेचिरे
मध्यम पुरुषपेचिषेपेचाथेपेचिध्वे / पेचिढ्वे
उत्तम पुरुषपेचेपेचिवहेपेचिमहे
💡 विशेष (लिट्): द्विर्वचन होकर (पच् + पच्) 'एत्वाभ्यासलोप' के कारण 'अ' को 'ए' होकर और अभ्यास का लोप होकर पेचतुः / पेचे जैसे रूप सिद्ध होते हैं। प्रथम पुरुष एकवचन में पपाच (उसने पकाया) बनता है।

७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपक्तापक्तारौपक्तारः
मध्यम पुरुषपक्तासिपक्तास्थःपक्तास्थ
उत्तम पुरुषपक्तास्मिपक्तास्वःपक्तास्मः
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपक्तापक्तारौपक्तारः
मध्यम पुरुषपक्तासेपक्तासाथेपक्ताध्वे
उत्तम पुरुषपक्ताहेपक्तास्वहेपक्तास्महे
💡 विशेष (लुट्): 'पच् + ता' होने पर 'चोः कुः' से 'च्' को 'क्' होकर 'पक्ता' रूप बनता है (पचिता नहीं)।

८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपच्यात्पच्यास्ताम्पच्यासुः
मध्यम पुरुषपच्याःपच्यास्तम्पच्यास्त
उत्तम पुरुषपच्यासम्पच्यास्वपच्यास्म
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपक्षीष्टपक्षीयास्ताम्पक्षीरन्
मध्यम पुरुषपक्षीष्ठाःपक्षीयाथाम्पक्षीध्वम्
उत्तम पुरुषपक्षीयपक्षीवहिपक्षीमहि

९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअपाक्षीत्अपाक्ताम्अपाक्षुः
मध्यम पुरुषअपाक्षीःअपाक्तम्अपाक्त
उत्तम पुरुषअपाक्षम्अपाक्ष्वअपाक्ष्म
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअपक्तअपक्षाताम्अपक्षत
मध्यम पुरुषअपक्थाःअपक्षाथाम्अपग्ध्वम् / अपक्ध्वम्
उत्तम पुरुषअपक्षिअपक्ष्वहिअपक्ष्महि
💡 विशेष (लुङ् - V.V.Imp): परस्मैपदी में अडागम, 'सिच्' प्रत्यय और वृद्धि होकर 'अपाक्षीत्' सिद्ध होता है। वहीं आत्मनेपदी में झल् (च् ➔ क्) के बाद झल् (त) आने से 'सिच्' (स्) का लोप (झलो झलि) होकर सीधे 'अपक्त' रूप बनता है।

१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भाव / Conditional)

➤ परस्मैपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअपक्ष्यत्अपक्ष्यताम्अपक्ष्यन्
मध्यम पुरुषअपक्ष्यःअपक्ष्यतम्अपक्ष्यत
उत्तम पुरुषअपक्ष्यम्अपक्ष्यावअपक्ष्याम
➤ आत्मनेपदी रूप
पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअपक्ष्यतअपक्ष्येताम्अपक्ष्यन्त
मध्यम पुरुषअपक्ष्यथाःअपक्ष्येथाम्अपक्ष्यध्वम्
उत्तम पुरुषअपक्ष्येअपक्ष्यावहिअपक्ष्यामहि

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