प्रयागराज स्तुति

Sooraj Krishna Shastri
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|| श्री प्रयागराज स्तुति ||

महाकुम्भ २०२५ विशेष

भूमिका

तीर्थराज प्रयाग केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की आत्मा है। पतितपावनी गंगा, श्यामल यमुना और अंतःसलिला सरस्वती का यह त्रिवेणी संगम मोक्ष का द्वार माना जाता है। आगामी महाकुम्भ 2025 के पावन अवसर पर, आचार्य सूरज कृष्ण शास्त्री जी द्वारा रचित यह 'श्री प्रयागराज स्तुति' त्रिवेणी के अलौकिक सौंदर्य और माहात्म्य का अद्भुत गान है। यह स्तुति हमें तीर्थराज के चरणों में नमन करने की प्रेरणा देती है।

Prayagraj Stuti Mahakumbh 2025
Mahakumbh 2025, Prayagraj

जयति प्रयागराजराजस्तव ।।
जयति प्रयागराजराजस्तव ।।

भागीरथिकालिन्दिविलासः
ज्ञानसरस्वतिभञ्जति त्रासः ।
अघवारिणिजनमोक्षप्रदायि-
न्युरःस्थले क्रीडति त्रिवेणि तव॥
॥१॥ जयति०॥

तव आश्रयणे मुनिवरवासः
विगतवितृष्णश्चाशापाशः ।
हरेः कथायां पुण्यविलासः
विमलजनानां कीर्तिप्रदो भव
॥२॥ जयति ०॥

पुण्यदायकस्तवसंस्मरणं
मरणमङ्गलं मङ्लजननम् ।
भूतानां दुःखदारिदद्रवणं
दुरितदुरन्तीदीप्तद्युतिस्तव
॥३॥ जयति ०॥

रचनाकार: आ. सूरज कृष्ण शास्त्री

।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।।

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