Brahma, Vishnu, Mahesh: एक हैं या अलग? (Are They One or Different?) - The Vedantic Truth
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| Brahma, Vishnu, Mahesh: एक हैं या अलग? (Are They One or Different?) - The Vedantic Truth |
🕉️ ब्रह्मा, विष्णु और महेश: एक तत्त्व या पृथक सत्ता?
(एक तात्विक एवं तार्किक विवेचन)
१. मूल प्रश्न और शास्त्र-प्रमाण
🔹 मूल प्रश्न
क्या ब्रह्मा, विष्णु और महेश एक ही हैं या वे अलग-अलग सत्ताएँ हैं?
🔹 उपनिषद् का प्रमाण
"यतो वा इमानि भूतानि जायन्ते, येन जातानि जीवन्ति, यत्प्रयन्त्यभिसंविशान्ति"— तैत्तिरीयोपनिषद् ३.१
२. तार्किक विश्लेषण
(एकेश्वरवाद की सिद्धि)
इसके पीछे निम्नलिखित तर्क हैं—
🔹 (क) ईश्वर की परिभाषा
जो निरतिशय ऐश्वर्य और सर्वज्ञ-गुण-सम्पन्न हो, वही परमेश्वर है।
🔹 (ख) परामर्श (सलाह) का तर्क
🔹 (ग) स्वतंत्रता का तर्क
🔹 (घ) विरोध का परिणाम
एक ही विषय में दो विरुद्ध इच्छाओं का सफल होना असंभव है।
🔹 निष्कर्ष
- उत्पादकत्व (ब्रह्मा),
- पालकत्व (विष्णु),
- संहारकत्व (शिव)
माना है।
३. सृष्टि-प्रक्रिया और ईश्वरीय लीला
परमात्मा की सहज क्रियाओं से ही सृष्टि का निर्माण और लय होता है—
"निःश्वसितमस्य वेदा वीक्षितमेतस्य पंचभूतानि।स्मितमेतस्य चराचरमस्य च सुप्तं महाप्रलयः।।"
🔹 तात्त्विक विवेचन
- निःश्वास: वेदों का प्रादुर्भाव
- वीक्षण (देखना): पंच महाभूतों (आकाश आदि) की सृष्टि
- स्मित (मुस्कुराहट): अनन्त भौतिक ब्रह्माण्डों का निर्माण
- सुप्ति (सोना): अखिल ब्रह्माण्ड का महाप्रलय
👉 इस दृष्टि से उत्पादक, पालक और संहारक में किंचिन्मात्र भी भेद नहीं है।
४. बिम्ब-प्रतिबिम्ब न्याय
(सूर्य का दृष्टान्त)
इस तत्त्व को समझाने के लिए ‘सूर्य और जल’ का सुंदर उदाहरण—
🔹 एक सूर्य, अनेक प्रतिबिम्ब
जैसे आकाश में स्थित एक ही सूर्य अनन्त घड़ों और तालाबों के जल में अलग-अलग दिखाई देता है।
🔹 परमात्मा और माया
वैसे ही एक अखण्ड, अनन्त, सच्चिदानंद परमात्मा ‘माया’ और ‘अन्तःकरण’ में प्रतिबिम्बित होता है—
- जीव: अन्तःकरण (मन/बुद्धि) में पड़ा प्रतिबिम्ब ‘जीव’ कहलाता है।
- ईश्वर: माया में पड़ा प्रतिबिम्ब ‘ईश्वर’ कहलाता है।
🔹 काल्पनिक भेद
जैसे जल की स्वच्छता या मलीनता से सूर्य के प्रतिबिम्ब में अंतर दिखता है, वैसे ही माया की तीन शक्तियों (उत्पत्ति, पालन, संहार) के भेद से एक ही ईश्वर ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र के रूप में भासता है।
५. भक्त और भावना
(रंगीन चश्मे का दृष्टान्त)
वह मूल तत्त्व (बिम्ब) सर्वथा एक ही है, परन्तु भक्तों की भावना के अनुसार अलग-अलग रूपों में व्यक्त होता है।
🔹 दृष्टान्त
जैसे एक ही सूर्य—
- नीले चश्मे से नीला
- पीले चश्मे से पीला
दिखाई देता है।
🔹 सिद्धांत
- विष्णु भक्त: अपनी भावना के अनुसार उसी परम तत्त्व को ‘विष्णु’ कहते हैं।
- शिव भक्त: उसी तत्त्व को ‘शिव’ कहते हैं।
- राम/कृष्ण भक्त: उसी को श्रीराम या श्रीकृष्ण रूप में पूजते हैं।
६. अंतिम निष्कर्ष
- ‘शिवपुराण’ में शिव है।
- ‘विष्णुपुराण’, ‘रामायण’ और ‘भागवत’ में विष्णु, राम या कृष्ण है।
🔹 सार
“ब्रह्मा, विष्णु और महेश एक ही हैं।”
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