आचार्य पिंगल: 'छन्दःशास्त्र' के प्रणेता और विश्व के प्रथम 'बाइनरी' (Binary) गणितज्ञ
एक अत्यंत विस्तृत ऐतिहासिक, काव्यात्मक और गणितीय विश्लेषण: प्राचीन भारत के वह अद्भुत महर्षि जिन्होंने कविता की 'लय' (Rhythm) को गिनने के लिए जिस 'लघु' और 'गुरु' की व्यवस्था का आविष्कार किया, वह सदियों बाद आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान का '0' और '1' (Binary System) बन गया। (The Grandfather of Computer Science)
- 1. प्रस्तावना: काव्यशास्त्र और कंप्यूटर विज्ञान का ऐतिहासिक संगम
- 2. जीवन परिचय एवं काल निर्धारण: पाणिनि के अनुज?
- 3. वेदांग 'छंद': वेदों का 'पैर' (Foot of the Vedas)
- 4. लघु-गुरु व्यवस्था: विश्व का पहला बाइनरी सिस्टम (0 और 1)
- 5. 'यमाताराजभानसलगाम्': 8 गणों का मास्टर एल्गोरिदम
- 6. 'मेरु प्रस्तार' (Meru Prastara): पास्कल का त्रिभुज (Pascal's Triangle)
- 7. 'मात्रा मेरु': फाइबोनाची अनुक्रम (Fibonacci Sequence) की खोज
- 8. निष्कर्ष: साहित्य के भीतर गणित का सर्वोच्च शिखर
जब हम कोई कविता या गीत गाते हैं, तो उसमें एक निश्चित लय (Rhythm) और ताल होती है। प्राचीन भारतीय ऋषियों ने यह महसूस किया कि यह 'लय' कोई आकस्मिक चीज़ नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक अत्यंत कठोर गणितीय संरचना (Mathematical Structure) है। इसी लय के विज्ञान को 'छन्दःशास्त्र' (Prosody) कहा गया।
छंदशास्त्र को एक संपूर्ण वैज्ञानिक और सूत्रबद्ध रूप देने वाले महर्षि का नाम पिंगल (Pingala) था। आज पूरी दुनिया इस बात पर अचंभित है कि पिंगल ने छंदों की गणना करने के लिए अनजाने में ही 'बाइनरी सिस्टम' (Binary numeral system), क्रमचय-संचय (Combinatorics), और पास्कल त्रिभुज के वे सिद्धांत खोज निकाले थे, जिन पर आज का आधुनिक कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) काम करता है।
| पूरा नाम | महर्षि पिंगल (Acharya Pingala) |
| जन्म एवं काल निर्धारण |
पारंपरिक मान्यता: महर्षि पाणिनि के छोटे भाई (अनुज)। आधुनिक अकादमिक मत (Indology): लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व (c. 300 - 200 BCE) के मध्य। (उनके ग्रंथ में वैदिक छंदों के साथ-साथ लौकिक संस्कृत के छंदों का भी वर्णन है, जो उनके काल को पाणिनि के कुछ समय बाद स्थापित करता है)। |
| महानतम कृति | छन्दःशास्त्र (Chhandashastra) / छन्दःसूत्र (8 अध्यायों और 315 सूत्रों का ग्रंथ)। |
| विज्ञान/गणित में योगदान | बाइनरी सिस्टम (Binary numbers), कॉम्बिनेटरिक्स (Combinatorics), मेरु प्रस्तार (Pascal's Triangle), मात्रा मेरु (Fibonacci sequence)। |
| प्रसिद्ध टीकाकार | हलायुध (10वीं सदी - जिन्होंने 'मृतसंजीवनी' टीका लिखकर पिंगल के गणित को विस्तार से समझाया)। |
2. जीवन परिचय एवं काल निर्धारण: पाणिनि के अनुज?
भारतीय इतिहास में महर्षि पिंगल के व्यक्तिगत जीवन के बारे में बहुत कम जानकारी मिलती है। पारंपरिक विद्वानों (जैसे षड्गुरुशिष्य) के अनुसार, पिंगल महान वैयाकरण महर्षि पाणिनि के छोटे भाई थे। यदि यह सत्य है, तो उनका काल 500 ईसा पूर्व (BCE) माना जाएगा।
हालांकि, आधुनिक भाषाविदों और इतिहासकारों के अनुसार, पिंगल का 'छन्दःशास्त्र' पाणिनि की 'अष्टाध्यायी' की तुलना में थोड़ा परवर्ती (बाद का) प्रतीत होता है, क्योंकि इसमें 'लौकिक संस्कृत' के बहुत अधिक छंद हैं। अतः अकादमिक जगत में उनका काल 300 से 200 ईसा पूर्व के आसपास माना जाता है। काल जो भी हो, उनकी गणितीय मेधा (Genius) विश्व इतिहास में अद्वितीय है।
3. वेदांग 'छंद': वेदों का 'पैर' (Foot of the Vedas)
वेदों के छह अंग (वेदांग) माने गए हैं—शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, ज्योतिष और छंद।
जैसे पैरों के बिना कोई व्यक्ति चल नहीं सकता, वैसे ही 'छंद' (Meter) के बिना वेद के मंत्रों की गति या गान नहीं हो सकता। ऋग्वेद का प्रसिद्ध 'गायत्री मंत्र' (24 अक्षर), 'त्रिष्टुप' (44 अक्षर) और 'जगती' (48 अक्षर) वास्तव में छंदों के ही नाम हैं। पिंगल ने अपने ग्रंथ में इन्हीं अक्षरों को गिनने का विज्ञान (Prosody) प्रस्तुत किया है।
4. लघु-गुरु व्यवस्था: विश्व का पहला बाइनरी सिस्टम (0 और 1)
आधुनिक कंप्यूटर केवल दो अंकों पर काम करता है: 0 (Off) और 1 (On)। इसे बाइनरी सिस्टम कहते हैं। जिसे हम आज बाइनरी कहते हैं, उसे पिंगल ने 2000 साल पहले ही खोज लिया था।
पिंगल ने कहा कि किसी भी कविता में वर्ण (Syllable) केवल दो प्रकार के हो सकते हैं:
1. लघु (Laghu - l): जिसे बोलने में कम समय लगे (जैसे अ, इ, उ)। इसे एक खड़ी रेखा (|) से दर्शाया जाता है। (यह आधुनिक कंप्यूटर का 0 है)।
2. गुरु (Guru - G): जिसे बोलने में दुगना समय लगे (जैसे आ, ई, ऊ)। इसे 'S' या (S) के आकार से दर्शाया जाता है। (यह आधुनिक कंप्यूटर का 1 है)।
पिंगल ने 'प्रस्तार' (Prastara - Matrix) विधि से बताया कि यदि 3 अक्षरों का कोई छंद बनाना हो, तो लघु-गुरु के कितने 'कॉम्बिनेशन' (Combinations) बन सकते हैं?
GLL (100)
LGL (010)
GGL (110)
LLG (001)
GLG (101)
LGG (011)
GGG (111)
(कुल 8 कॉम्बिनेशन - )
पिंगल का यह 'प्रस्तार' आधुनिक गणित के बाइनरी-टू-डेसिमल कन्वर्ज़न (Binary to Decimal Conversion) का विश्व का सबसे पहला लिखित प्रमाण है।
5. 'यमाताराजभानसलगाम्': 8 गणों का मास्टर एल्गोरिदम
छंदशास्त्र में तीन अक्षरों के समूह को 'गण' (Gana) कहते हैं। चूँकि 3 अक्षरों से कुल 8 कॉम्बिनेशन बनते हैं, इसलिए कुल 8 गण होते हैं (यगण, मगण, तगण, रगण, जगण, भगण, नगण, सगण)। इन 8 गणों को याद रखने के लिए पिंगल परंपरा में एक जादुई सूत्र (Mnemonic / Algorithm) बनाया गया:
यह दुनिया का सबसे शानदार "De Bruijn sequence" है। यदि आपको 'यगण' (य) का रूप जानना है, तो सूत्र में 'य' और उसके आगे के दो अक्षर (य-मा-ता = L-G-G) पढ़ लीजिए। 'रगण' (रा) का रूप जानना है, तो (रा-ज-भा = G-L-G) पढ़ लीजिए। यह कोडिंग की चरम सीमा है।
6. 'मेरु प्रस्तार' (Meru Prastara): पास्कल का त्रिभुज (Pascal's Triangle)
यदि कोई कवि पूछे: "6 अक्षरों वाले छंद में ऐसे कितने कॉम्बिनेशन बनेंगे जिनमें 2 गुरु और 4 लघु हों?" इस जटिल गणना को हल करने के लिए पिंगल ने एक विधि बताई, जिसे बाद में 10वीं सदी के टीकाकार हलायुध ने 'मेरु प्रस्तार' (The Mountain Array) का नाम दिया।
यूरोप में इसी त्रिभुज को 17वीं सदी में ब्लेज़ पास्कल (Blaise Pascal) ने खोजा, और आज इसे पूरी दुनिया में "Pascal's Triangle" (पास्कल का त्रिभुज) कहा जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि पास्कल से लगभग 1800 वर्ष पूर्व पिंगल ने छंदों के Binomial Coefficients निकालने के लिए इस 'मेरु प्रस्तार' का आविष्कार कर लिया था। यह संख्याओं का ऐसा पिरामिड है जहाँ ऊपर की दो संख्याओं को जोड़ने से नीचे की संख्या प्राप्त होती है।
7. 'मात्रा मेरु': फाइबोनाची अनुक्रम (Fibonacci Sequence) की खोज
पिंगल का एक और महानतम गणितीय आविष्कार 'मात्रा छंदों' (Moraic meters) का विश्लेषण है (जैसे आर्या छंद)।
पिंगल ने बताया कि यदि हमें एक निश्चित मात्रा (Beats) वाला छंद बनाना है, तो हम लघु (1 बीट) और गुरु (2 बीट्स) को किस प्रकार व्यवस्थित कर सकते हैं।
- 1 मात्रा के लिए: 1 तरीका (L)
- 2 मात्राओं के लिए: 2 तरीके (LL, G)
- 3 मात्राओं के लिए: 3 तरीके (LLL, GL, LG)
- 4 मात्राओं के लिए: 5 तरीके (LLLL, GLL, LGL, LLG, GG)
- 5 मात्राओं के लिए: 8 तरीके...
यह शृंखला बन रही है: 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21... (पिछली दो संख्याओं का जोड़)।
यूरोप में इसे 13वीं सदी के गणितज्ञ फाइबोनाची (Fibonacci) के नाम पर Fibonacci Sequence कहा जाता है। लेकिन भारतीय ज्ञान परंपरा में इसे पिंगल और बाद में आचार्य हेमचंद्र द्वारा खोजा गया 'मात्रा मेरु' या 'हेमचंद्र-फाइबोनाची संख्या' (Hemachandra-Fibonacci numbers) कहा जाता है।
8. निष्कर्ष: साहित्य के भीतर गणित का सर्वोच्च शिखर
आचार्य पिंगल ने यह सिद्ध कर दिया कि कविता (Poetry) और गणित (Mathematics) दो अलग-अलग विषय नहीं हैं। कविता की लय वास्तव में संख्याओं का ही एक अत्यंत सुंदर नृत्य है।
जब कोई महाकवि कालिदास या तुलसीदास अपनी कविता की रचना करते हैं, तो वे अचेतन रूप से उसी 'बाइनरी सिस्टम' और 'एल्गोरिदम' का उपयोग कर रहे होते हैं जिसे पिंगल ने 2000 वर्ष पूर्व अपने 'छन्दःशास्त्र' में डिकोड किया था। कंप्यूटर साइंस के जन्मदाता एलन ट्यूरिंग (Alan Turing) और गॉटफ्रीड लाइबनिज़ (Leibniz) ने जिस बाइनरी कोड को आधुनिक युग का आधार बनाया, उसकी गंगोत्री भारत में महर्षि पिंगल के आश्रम से ही निकली थी। पिंगल भारत के वे 'अनसंग हीरो' (Unsung Hero) हैं जिन्हें विश्व विज्ञान के इतिहास में उनका उचित स्थान मिलना अभी बाकी है।
संदर्भ ग्रंथ एवं अनुशंसित पठन (References)
- छन्दःशास्त्र - आचार्य पिंगल (हलायुध की 'मृतसंजीवनी' टीका सहित)।
- Computing Science in Ancient India - Subhash Kak (पास्कल और बाइनरी पर पिंगल का प्रभाव)।
- The Pingala-Hemachandra Sequence (Fibonacci Numbers in Indian Mathematics) - Parmanand Singh.
- Indian Mathematics: Engaging with the World from Ancient to Modern Times - George Gheverghese Joseph.
