Ram Navami Special Kavita: श्री राम वंदना | Bhojpuri Poem on Lord Ram

Sooraj Krishna Shastri
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रामनवमी विशेष: श्री राम वंदना

मर्यादा पुरुषोत्तम के चरणों में एक भावपूर्ण काव्य-पुष्प

भूमिका

रामनवमी के पावन पर्व पर, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की महिमा और उनके आदर्शों का स्मरण करना हर भक्त के लिए अत्यंत सुखदायी होता है। प्रस्तुत भोजपुरी कविता प्रभु श्री राम के संपूर्ण जीवन चरित्र—उनके अवतरण, गुरु-भक्ति, अहिल्या उद्धार, सीता स्वयंवर, वनवास और रावण वध—का बहुत ही सजीव और भक्तिमय वर्णन करती है। आइए, भक्ति भाव से ओत-प्रोत इस सुंदर रचना का आनंद लें।

जे कोसिला कोख सँवार दिहल,

कूल दियना बन अवतार लिहल,

चउथो पनवा में दशरथ के

निरवंशी के दाग उतार दिहल,

जेकर नाम कौशल्यानंदन बा,

कर जोरी हृदय से वंदन बा!

गुरु घर जाई जे ज्ञान पियल,

गुरु चरनन के सम्मान दिहल,

पा एक इशारा गुरुवर के

चलले जे धनुषा बाण लिहल,

जे गुण से शीतल चंदन बा,

कर जोरी हृदय से वंदन बा!

वन में दानव जे मार दिहल,

रिषियन के यज्ञ उबार दिहल,

पापिन ताड़का के मार दिहल

जे नारी अहिल्या तार दिहल,

ओही राम के नित अभिनंदन बा,

कर जोरी हृदय से वंदन बा!

गुरु संग जनकपुरी जाई के जे,

तुरी दिहले शिव धनुराई के जे,

जे स्वयंवर दर्प बढ़ा दिहले

सीता संग ब्याह रचाई के जे,

हर्षित जनकपुर जन जन बा,

कर जोरी हृदय से वंदन बा!

पिता के वचन के पूर्ण करे,

जे निकल गइल वनवा विचरे,

बड़ी प्रेम से खइले जुठ बइर

भीलनी शबरी के जाई घरे,

जेकर रुप हिया सुख नंदन बा,

कर जोरी हृदय से वंदन बा!

जेही नाम के लेके पवन कुंवर,

पा गइले जीत समुन्दर पर,

जेही नाम से लंका खाक भइल

पानी पर तैरल शील पत्थर,

जे साधु सन्त मन रंजन बा

कर जोरी हृदय से वंदन बा!

जेही नाम से पाके अतुलित बल,

हनुमान उठवले मंदराचल,

जेही नाम सुनी के थर थर थर

कांपे लंकापति, दानव दल,

जे पापी कुटिल के क्रंदन बा,

कर जोरी हृदय से वंदन बा!

जे धर्म के मर्म बता दिहले,

रावण के दर्प मिटा दिहले,

"अजय" चरित उ पावन ह

जे धर्म ध्वजा फहरा दिहले,

तीनु लोक के जे दुखभंजन बा,

कर जोरी हृदय से वंदन बा!

निष्कर्ष

कवि 'अजय' द्वारा रचित यह कविता केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि प्रभु श्री राम के चरणों में अर्पित एक भावपूर्ण वंदना है। यह हमें सिखाती है कि मर्यादा, धर्म और शील का मार्ग ही अंततः विजय की ओर ले जाता है। राम नाम की महिमा ऐसी है जिससे पत्थर भी पानी पर तैर जाते हैं और बड़े-बड़े संकट टल जाते हैं।

॥ जय श्री राम ॥
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