परस्मैपदी 'पठ्' धातु (पढ़ना)
भ्वादि गण की सबसे आधारभूत धातु के दसों लकारों (10 Lakaras) का सम्पूर्ण संग्रह। लाल रंग में अंकित रूप (जैसे- पपाठ, अपाठीत्) परीक्षाओं हेतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पठति | पठतः | पठन्ति |
| मध्यम पुरुष | पठसि | पठथः | पठथ |
| उत्तम पुरुष | पठामि | पठावः | पठामः |
२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पठिष्यति | पठिष्यतः | पठिष्यन्ति |
| मध्यम पुरुष | पठिष्यसि | पठिष्यथः | पठिष्यथ |
| उत्तम पुरुष | पठिष्यामि | पठिष्यावः | पठिष्यामः |
३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पठतु / पठतात् | पठताम् | पठन्तु |
| मध्यम पुरुष | पठ / पठतात् | पठतम् | पठत |
| उत्तम पुरुष | पठानि | पठाव | पठाम |
💡 विशेष (लोट्): प्रथम और मध्यम पुरुष एकवचन में 'तु' और 'हि' के स्थान पर आशीर्वाद अर्थ में 'पठतात्' रूप भी बनता है। उत्तम पुरुष एकवचन में 'पठानि' बनता है।
४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | अपठत् | अपठताम् | अपठन् |
| मध्यम पुरुष | अपठः | अपठतम् | अपठत |
| उत्तम पुरुष | अपठम् | अपठाव | अपठाम |
५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पठेत् | पठेताम् | पठेयुः |
| मध्यम पुरुष | पठेः | पठेतम् | पठेत |
| उत्तम पुरुष | पठेयम् | पठेव | पठेम |
६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पपाठ | पेपतुः | पेपुः |
| मध्यम पुरुष | पेपिथ | पेपथुः | पेप |
| उत्तम पुरुष | पपाठ / पपठ | पेपिव | पेपिम |
💡 विशेष (लिट् - V.V.Imp): यह पूरी धातु का सबसे कठिन और महत्त्वपूर्ण लकार है। इसमें धातु को द्वित्व (दो बार) होकर 'प' का 'पे' हो जाता है (जैसे- पेपुः, पेपिथ)। प्रथम पुरुष एकवचन में वृद्धि होकर 'पपाठ' बनता है।
७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पठिता | पठितारौ | पठितारः |
| मध्यम पुरुष | पठितासि | पठितास्थः | पठितास्थ |
| उत्तम पुरुष | पठितास्मि | पठितास्वः | पठितास्मः |
८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | पठ्यात् | पठ्यास्ताम् | पठ्यासुः |
| मध्यम पुरुष | पठ्याः | पठ्यास्तम् | पठ्यास्त |
| उत्तम पुरुष | पठ्यासम् | पठ्यास्व | पठ्यास्म |
९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | अपाठीत् | अपाठिष्टाम् | अपाठिषुः |
| मध्यम पुरुष | अपाठीः | अपाठिष्टम् | अपाठिष्ट |
| उत्तम पुरुष | अपाठिषम् | अपाठिष्व | अपाठिष्म |
💡 विशेष (लुङ् - V.V.Imp): लुङ् लकार में 'सिच्' प्रत्यय और 'ईट्' का आगम होता है, साथ ही धातु के 'अ' को वृद्धि (आ) हो जाती है। इसीलिए 'अपठत्' (लङ्) की जगह इसमें 'अपाठीत्' और बहुवचन में 'अपाठिषुः' बनता है।
१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भाव / Conditional)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | अपठिष्यत् | अपठिष्यताम् | अपठिष्यन् |
| मध्यम पुरुष | अपठिष्यः | अपठिष्यतम् | अपठिष्यत |
| उत्तम पुरुष | अपठिष्यम् | अपठिष्याव | अपठिष्याम |