परस्मैपदी 'पठ्' धातु (पढ़ना) दसों लकारों (10 Lakaras) क | parasmaipadi path dhatu roop

Sooraj Krishna Shastri
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परस्मैपदी 'पठ्' धातु (पढ़ना)

भ्वादि गण की सबसे आधारभूत धातु के दसों लकारों (10 Lakaras) का सम्पूर्ण संग्रह। लाल रंग में अंकित रूप (जैसे- पपाठ, अपाठीत्) परीक्षाओं हेतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।

१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपठतिपठतःपठन्ति
मध्यम पुरुषपठसिपठथःपठथ
उत्तम पुरुषपठामिपठावःपठामः

२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपठिष्यतिपठिष्यतःपठिष्यन्ति
मध्यम पुरुषपठिष्यसिपठिष्यथःपठिष्यथ
उत्तम पुरुषपठिष्यामिपठिष्यावःपठिष्यामः

३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपठतु / पठतात्पठताम्पठन्तु
मध्यम पुरुषपठ / पठतात्पठतम्पठत
उत्तम पुरुषपठानिपठावपठाम
💡 विशेष (लोट्): प्रथम और मध्यम पुरुष एकवचन में 'तु' और 'हि' के स्थान पर आशीर्वाद अर्थ में 'पठतात्' रूप भी बनता है। उत्तम पुरुष एकवचन में 'पठानि' बनता है।

४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअपठत्अपठताम्अपठन्
मध्यम पुरुषअपठःअपठतम्अपठत
उत्तम पुरुषअपठम्अपठावअपठाम

५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपठेत्पठेताम्पठेयुः
मध्यम पुरुषपठेःपठेतम्पठेत
उत्तम पुरुषपठेयम्पठेवपठेम

६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपपाठपेपतुःपेपुः
मध्यम पुरुषपेपिथपेपथुःपेप
उत्तम पुरुषपपाठ / पपठपेपिवपेपिम
💡 विशेष (लिट् - V.V.Imp): यह पूरी धातु का सबसे कठिन और महत्त्वपूर्ण लकार है। इसमें धातु को द्वित्व (दो बार) होकर 'प' का 'पे' हो जाता है (जैसे- पेपुः, पेपिथ)। प्रथम पुरुष एकवचन में वृद्धि होकर 'पपाठ' बनता है।

७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपठितापठितारौपठितारः
मध्यम पुरुषपठितासिपठितास्थःपठितास्थ
उत्तम पुरुषपठितास्मिपठितास्वःपठितास्मः

८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपठ्यात्पठ्यास्ताम्पठ्यासुः
मध्यम पुरुषपठ्याःपठ्यास्तम्पठ्यास्त
उत्तम पुरुषपठ्यासम्पठ्यास्वपठ्यास्म

९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअपाठीत्अपाठिष्टाम्अपाठिषुः
मध्यम पुरुषअपाठीःअपाठिष्टम्अपाठिष्ट
उत्तम पुरुषअपाठिषम्अपाठिष्वअपाठिष्म
💡 विशेष (लुङ् - V.V.Imp): लुङ् लकार में 'सिच्' प्रत्यय और 'ईट्' का आगम होता है, साथ ही धातु के 'अ' को वृद्धि (आ) हो जाती है। इसीलिए 'अपठत्' (लङ्) की जगह इसमें 'अपाठीत्' और बहुवचन में 'अपाठिषुः' बनता है।

१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भाव / Conditional)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअपठिष्यत्अपठिष्यताम्अपठिष्यन्
मध्यम पुरुषअपठिष्यःअपठिष्यतम्अपठिष्यत
उत्तम पुरुषअपठिष्यम्अपठिष्यावअपठिष्याम

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