परस्मैपदी 'गम्' धातु (जाना)
भ्वादि गण की सर्वाधिक भ्रमित करने वाली धातु के दसों लकारों का सम्पूर्ण संग्रह। लाल रंग में अंकित रूप (जैसे- गमिष्यति, जगाम, अगमत्) TGT-PGT के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
💡 गम् ➔ गच्छ् का रहस्य (V.V.Imp Rule)
पाणिनीय सूत्र 'इषुगमियमां छः (७.३.७७)' के अनुसार शित् प्रत्यय (शप् विकरण) परे होने पर 'गम्' धातु के स्थान पर 'गच्छ्' आदेश हो जाता है।
• अतः ४ लकारों (लट्, लोट्, लङ्, विधिलिङ्) में रूप 'गच्छति' चलेंगे।
• शेष ६ आर्धधातुक लकारों (लृट्, लिट्, लुट् आदि) में मूल धातु सुरक्षित रहती है, अर्थात् रूप 'गमिष्यति' चलेंगे (गच्छिष्यति नहीं)।
१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | गच्छति | गच्छतः | गच्छन्ति |
| मध्यम पुरुष | गच्छसि | गच्छथः | गच्छथ |
| उत्तम पुरुष | गच्छामि | गच्छावः | गच्छामः |
२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | गमिष्यति | गमिष्यतः | गमिष्यन्ति |
| मध्यम पुरुष | गमिष्यसि | गमिष्यथः | गमिष्यथ |
| उत्तम पुरुष | गमिष्यामि | गमिष्यावः | गमिष्यामः |
💡 विशेष (लृट्): छात्र अक्सर अनुवाद करते समय 'गच्छिष्यति' लिख देते हैं, जो पूर्णतः अशुद्ध है। यहाँ 'गम्' धातु अपने मूल रूप में रहती है, अतः 'गमिष्यति' ही शुद्ध है।
३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | गच्छतु / गच्छतात् | गच्छताम् | गच्छन्तु |
| मध्यम पुरुष | गच्छ / गच्छतात् | गच्छतम् | गच्छत |
| उत्तम पुरुष | गच्छानि | गच्छाव | गच्छाम |
४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | अगच्छत् | अगच्छताम् | अगच्छन् |
| मध्यम पुरुष | अगच्छः | अगच्छतम् | अगच्छत |
| उत्तम पुरुष | अगच्छम् | अगच्छाव | अगच्छाम |
५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | गच्छेत् | गच्छेताम् | गच्छेयुः |
| मध्यम पुरुष | गच्छेः | गच्छेतम् | गच्छेत |
| उत्तम पुरुष | गच्छेयम् | गच्छेव | गच्छेम |
६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | जगाम | जग्मतुः | जग्मुः |
| मध्यम पुरुष | जगमिथ / जगन्थ | जग्मथुः | जग्म |
| उत्तम पुरुष | जगाम / जगम | जग्मिव | जग्मिम |
💡 विशेष (लिट् - V.V.Imp): द्विवचन और बहुवचन में 'अ' का लोप होकर 'जग्म' बन जाता है (जग्मतुः, जग्मुः)। मध्यम पुरुष एकवचन में विकल्प से 'जगन्थ' रूप बनता है, जो नेट/पीजीटी का अत्यंत प्रसिद्ध प्रश्न है।
७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | गन्ता | गन्तारौ | गन्तारः |
| मध्यम पुरुष | गन्तासि | गन्तास्थः | गन्तास्थ |
| उत्तम पुरुष | गन्तास्मि | गन्तास्वः | गन्तास्मः |
💡 विशेष (लुट्): यहाँ धातु में 'इट्' (इ) का आगम नहीं होता (अनिँट् धातु), अतः 'गमिता' के स्थान पर 'गन्ता' रूप बनता है।
८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | गम्यात् | गम्यास्ताम् | गम्यासुः |
| मध्यम पुरुष | गम्याः | गम्यास्तम् | गम्यास्त |
| उत्तम पुरुष | गम्यासम् | गम्यास्व | गम्यास्म |
९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | अगमत् | अगमताम् | अगमन् |
| मध्यम पुरुष | अगमः | अगमतम् | अगमत |
| उत्तम पुरुष | अगमम् | अगमाव | अगमाम |
💡 विशेष (लुङ् - V.V.Imp): यह रूप 'लङ्' (अगच्छत्) के समान दिखता है, किन्तु भ्रमित न हों! पाणिनीय सूत्र 'पुषादिद्युताद्यऌदितः परस्मैपदेषु' से यहाँ 'सिच्' प्रत्यय के स्थान पर 'अङ्' हो जाता है। इसलिए 'अगमीत्' के स्थान पर 'अगमत्' रूप बनता है।
१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भाव / Conditional)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
| प्रथम पुरुष | अगमिष्यत् | अगमिष्यताम् | अगमिष्यन् |
| मध्यम पुरुष | अगमिष्यः | अगमिष्यतम् | अगमिष्यत |
| उत्तम पुरुष | अगमिष्यम् | अगमिष्याव | अगमिष्याम |