Krishna Bai Story in Hindi: भक्त कृष्णा बाई और कान्हा की सुई का चमत्कार

Sooraj Krishna Shastri
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।। श्रीराधारासोत्सव ।।

भक्त कृष्णा बाई और कान्हा की सुई

"प्रभु जब एक सुई की इतनी चिंता करते हैं, तो अपने भक्त की कितनी करते होंगे!"

🌸 अनन्य कृष्ण भक्ति

एक गाँव में एक अत्यंत गरीब बुढ़िया रहती थी, जिसका वास्तविक नाम सुखिया था। वह एक छोटी सी झोपड़ी में रहती थी और गाँव के घरों में झाड़ू-पोछा, बर्तन और खाना बनाने का काम करके अपना जीवन यापन करती थी।

परंतु, सुखिया के हृदय में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अगाध प्रेम था। वह रोज़ ताज़े फूलों की माला बनाकर दोनों समय अपने श्री कृष्ण जी को पहनाती थी और घंटों अपने कान्हा से बातें किया करती थी। उसकी इस अनन्य कृष्ण भक्ति के कारण ही गाँव वालों ने उसका नाम 'कृष्णा बाई' रख दिया था। यद्यपि, गाँव के अज्ञानी लोग उसकी इस भक्ति को देखकर यही सोचते थे कि बुढ़िया पागल हो गई है।

⚠️ कान्हा का स्वप्न और चेतावनी

एक रात, जब कृष्णा बाई सो रही थी, तो स्वयं श्री कृष्ण जी ने अपनी इस परम भक्त को दर्शन दिए और कहा:

"मैया! कल इस गाँव में बहुत बड़ा भूचाल (प्रलय) आने वाला है। तुम यह गाँव छोड़ कर तुरंत दूसरे गाँव चली जाओ।"

मालिक का साक्षात आदेश था! सुबह होते ही कृष्णा बाई ने अपना थोड़ा-बहुत सामान इकट्ठा करना शुरू कर दिया। उसने गाँव वालों को भी सचेत किया कि, "कल सपने में कान्हा आए थे, उन्होंने कहा है कि यहाँ बहुत बड़ा प्रलय होगा, तुम सब भी पास के गाँव में चले जाओ।"

लेकिन लोग कहाँ उस बूढ़ी 'पागल' की बात मानने वाले थे? जो भी सुनता, वह जोर-जोर से ठहाके लगाता और उसका मजाक उड़ाता। अंततः, बाई ने एक बैलगाड़ी मंगाई, अपने कान्हा की मूर्ति को सीने से लगाया, सामान की गठरी बांधी और गाड़ी में बैठ गई। लोग अब भी उसकी मूर्खता पर हंस रहे थे।

🪡 सुई की याद और सीमा पार

बैलगाड़ी धीरे-धीरे गाँव की सीमा की ओर बढ़ने लगी। कृष्णा बाई बिल्कुल अपने गाँव की सीमा पार करके अगले गाँव में प्रवेश करने ही वाली थी कि अचानक उसे अपने कान्हा की आवाज़ सुनाई दी:

"अरे पगली! जा, अपनी झोपड़ी में से वह सुई ले आ, जिससे तू माला बनाकर मुझे पहनाती है।"
यह सुनते ही कृष्णा बाई बेचैन हो गई। वह तड़प उठी कि, "हाय! मुझसे इतनी भारी भूल कैसे हो गई? अब मैं अपने कान्हा के लिए माला कैसे बनाऊंगी?"

उसने गाड़ी वाले को वहीं रोका और बदहवास होकर अपनी झोपड़ी की तरफ उल्टे पाँव भागी। गाँव वाले उसके इस पागलपन को देखते और खूब मजाक उड़ाते। बाई ने झोपड़ी के तिनकों में फंसी उस छोटी सी सुई को निकाला और फिर पागलों की तरह दौड़ते हुए गाड़ी के पास वापस आई।

गाड़ी वाले ने हँसते हुए कहा, "माई! तू क्यों परेशान है? कुछ नहीं होना।" बाई ने हाँफते हुए कहा, "अच्छा चल, अब अपने गाँव की सीमा पार कर।" गाड़ी वाले ने ठीक वैसा ही किया।

🌊 प्रलय और ईश्वरीय चमत्कार

पर यह क्या? जैसे ही बैलगाड़ी ने गाँव की सीमा पार की, पीछे एक भयंकर गर्जना हुई।

पलक झपकते ही पूरा का पूरा गाँव धरती में समा गया! सब कुछ जलमग्न हो गया और वे सभी लोग जो उस भक्त का मजाक उड़ा रहे थे, उसी प्रलय में विलीन हो गए।

संयोग से वह गाड़ी वाला भी एक अटूट कृष्ण भक्त था। येन-केन-प्रकारेण भगवान ने उसकी भी रक्षा करने में कोई विलम्ब नहीं किया।

।। शिक्षा और संदेश ।।

प्रभु जब अपने भक्त की मात्र एक 'सुई' तक की इतनी चिंता करते हैं और उसे नष्ट नहीं होने देते, तो वह अपने सच्चे भक्त की रक्षा के लिए कितने चिंतित होते होंगे! जब तक उस भक्त की एक सुई उस गाँव में मौजूद थी, पूरा गाँव सुरक्षित बचा हुआ था। सुई निकलते ही प्रलय आ गया।

भरी बदरिया पाप की, बरसन लगे अंगार।
संत न होते जगत में, जल जाता संसार॥

जय श्री कृष्ण! जय श्री राधे!

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