प्रातिपदिक, पद एवं अवसान संज्ञा
संस्कृत व्याकरण में शब्द-निर्माण और वाक्य-प्रयोग के मूलाधार: प्रातिपदिक, पद और अवसान संज्ञाओं का पाणिनीय सूत्रों सहित सम्पूर्ण विवेचन।
१. प्रातिपदिक संज्ञा (Pratipadika Sangya - मूल शब्द)
साधारण भाषा में जिसे हम 'मूल शब्द' (Base word) कहते हैं (जैसे- राम, बालक, ज्ञान), पाणिनीय व्याकरण में उसे 'प्रातिपदिक' कहा जाता है। इसके लिए अष्टाध्यायी में दो प्रमुख सूत्र हैं:
प्रथम सूत्र: अर्थवदधातुरप्रत्ययः प्रातिपदिकम् (१.२.४५)
अर्थ: जो शब्द अर्थवान् (Meaningful) हो, किन्तु न तो वह कोई धातु (Root) हो और न ही कोई प्रत्यय (Suffix) हो, ऐसे शब्द-स्वरूप की 'प्रातिपदिक संज्ञा' होती है।
द्वितीय सूत्र: कृत्तद्धितसमासाश्च (१.२.४६)
(चूँकि पिछले सूत्र ने 'अप्रत्ययः' कहकर प्रत्ययों को बाहर कर दिया था, इसलिए पाणिनि जी ने इस सूत्र से कृत् और तद्धित प्रत्ययों से बने शब्दों को भी प्रातिपदिक मान लिया।)
• कृदन्त: पाचक (पच् + ण्वुल्)।
• तद्धितान्त: दाशरथि (दशरथ + इञ्)।
• समास: राजपुरुषः (राज्ञः पुरुषः)।
२. पद संज्ञा (Pada Sangya - पूर्ण शब्द)
संस्कृत का सबसे बड़ा नियम है — "अपदं न प्रयुञ्जीत" (बिना पद बनाए किसी भी शब्द का वाक्य में प्रयोग नहीं करना चाहिए)। प्रातिपदिक में प्रत्यय लगने के बाद ही वह 'पद' बनता है।
संज्ञा सूत्र: सुप्तिङन्तं पदम् (१.४.१४)
अर्थ: सुबन्त (जिनके अंत में सुप् प्रत्यय हों) और तिङन्त (जिनके अंत में तिङ् प्रत्यय हों) शब्दों की 'पद' संज्ञा होती है।
- सुप् प्रत्यय (२१): ये शब्दरूप (संज्ञा, सर्वनाम) बनाने के काम आते हैं। (सु, औ, जस्... आदि 21 प्रत्यय)।
उदाहरण: राम (प्रातिपदिक) + सु (प्रत्यय) = रामः (पद)। - तिङ् प्रत्यय (१८): ये धातुरूप (क्रिया) बनाने के काम आते हैं। (तिप्, तस्, झि... आदि 18 प्रत्यय)।
उदाहरण: भू (धातु) + तिप् (प्रत्यय) = भवति (पद)।
३. अवसान संज्ञा (Avasana Sangya - विराम)
'अवसान' का अर्थ है — रुक जाना, विश्राम लेना या समाप्ति।
संज्ञा सूत्र: विरामोऽवसानम् (१.४.११०)
उदाहरण: रामर्। यहाँ 'र्' के बाद कोई वर्ण नहीं है (विराम है), अतः अवसान होने के कारण 'र्' को विसर्ग होकर 'रामः' बन जाता है।
- प्रातिपदिक (Base): अर्थवान् मूल शब्द। (सूत्र: अर्थवदधातुरप्रत्ययः और कृत्तद्धितसमासाश्च)।
- पद (Word): वाक्य में प्रयोग के योग्य सुबन्त या तिङन्त शब्द। (सूत्र: सुप्तिङन्तं पदम्)।
- अवसान (Pause/End): वर्णों के उच्चारण की समाप्ति। (सूत्र: विरामोऽवसानम्)।
