आर्यभटः
- १. पाठ-परिचयः एवं सारः (महान गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री आर्यभट का योगदान)
- २. मूल-पाठः एवं हिन्दी अनुवादः (पैराग्राफ अनुसार)
- ३. शब्द-कोषः (संस्कृत, हिन्दी एवं English शब्दार्थ)
- ४. व्याकरण-बोधः एवं विशेष-तथ्यानि (पाई मान, वेधशाला एवं ग्रन्थ)
- ५. अभ्यास-कार्यम् (पूर्णवाक्येन उत्तरत, रिक्तस्थानम्, सन्धिः, विलोमपदानि)
पाठ-परिचयः एवं सारः
मूल-पाठः सानुवादः (भाग १)
मूल-पाठः सानुवादः (भाग २)
शब्द-कोषः (शब्दार्थाः)
| संस्कृत शब्दः | संस्कृत अर्थः | हिन्दी अर्थः | English |
|---|---|---|---|
| लोके | संसारे / जगति | संसार में | In the world |
| अवबोध्यम् | ज्ञातव्यम् / बोधनीयम् | समझने योग्य / जानने योग्य | Worth knowing |
| अचलः | गतिहीनः / स्थिरः | स्थिर / गतिहीन | Immovable / Constant |
| चला | गतिशीला / अस्थिरा | गतिशील / चलायमान | Moving / Unstable |
| अक्षे | धूर्य्याम् / कीलके | धुरी पर (अक्ष पर) | On its axis |
| घूर्णति | भ्रमति / चक्राकारेण गच्छति | घूमती है | Rotates / Spins |
| सुस्थापितः | सम्यक् प्रकारेण स्थापितः | भली-भांति स्थापित | Well-established |
| प्राथम्येन | सर्वप्रथमम् | सर्वप्रथम / सबसे पहले | Firstly / For the first time |
| ज्योतिर्विद् | दैवज्ञः / खगोलशास्त्री | ज्योतिषी / खगोलविद् | Astronomer / Astrologer |
| रूढिः | प्रसिद्धा परम्परा / प्रथा | प्रचलित प्रथा / परंपरा | Custom / Tradition |
| प्रत्यादिष्टा | खण्डिता / निराकृता | खंडन किया / निरस्त किया | Refuted / Rejected |
| वयसि | आयुषि / अवस्थायाम् | आयु में / अवस्था में | At the age of |
| वेधशाला | नक्षत्र-ग्रह-परीक्षण-शाला | ग्रह-नक्षत्रों को जानने की प्रयोगशाला | Astronomical Observatory |
| आदधाति | स्थापयति / धारयति | रखता है / धारण करता है | Places / Holds |
| भ्रमन्त्याः | घूर्णमानायाः | घूमती हुई की | Of the rotating one |
| छायापातेन | छायाकरणेन | छाया पड़ने से | By casting of shadow |
| अवरुध्यते | रुद्धः भवति / बाधते | रुक जाता है / बाधित होता है | Is obstructed / blocked |
| विश्वसिति स्म | विश्वासं करोति स्म | विश्वास करता था | Used to believe |
| विरोधः | प्रतिरोधः / रोधनम् | विरोध / रुकावट | Opposition / Resistance |
| कालातिगामिनी | समयम् अतिक्रान्ता | समय को लांघने वाली (दूरदर्शी) | Ahead of time / Visionary |
व्याकरण-बोधः एवं विशेष-तथ्यानि
✦ अत्र इदम् अवधेयम् (विशेष ज्ञान):
• अश्मकाचार्यः: आर्यभटः 'अश्मकाचार्य' इति नाम्ना अपि प्रसिद्धः अस्ति।
• पाई (π) मानम्: अनेन दशमलव-पद्धत्याः प्रयोगं कुर्वता दशमलव इत्यस्यानन्तरं चतुर्णाम् अङ्कान् यावत् (३.१४१६) पाई (π) इत्यस्य मानं निर्धारितम्।
• आर्यभटीयम्: आर्यभटेन नवनवत्युत्तरचतुःशततमे (४९९ ख्रिष्टाब्दे) अस्य ग्रन्थस्य रचना कृता।
• वेधशाला: ग्रहनक्षत्रादीनां गति-स्थितिविज्ञानाय यान्त्रिकविधिना यत्र गणना क्रियते सा वेधशाला कथ्यते (यथा- जन्तर मन्तर)।
✦ प्रमुख भारतीय गणितज्ञाः ग्रन्थाश्च:
• गणितज्ञाः: आचार्य लगधः, आर्यभटः, वराहमिहिरः, ब्रह्मगुप्तः, भास्कराचार्यः, रामानुजन् इत्यादयः।
• प्रमुखाः ग्रन्थाः: आर्यभटीयम्, सौरसिद्धान्तः, बृहत्संहिता, लीलावती, पञ्चसिद्धान्तिका इत्यादयः।
अभ्यास-कार्यम् : पूर्णवाक्येन उत्तरत
अभ्यास-कार्यम् : रिक्तस्थानानि पूरयत
मञ्जूषातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत:
[तदा, पृथिवी, नौकाम्, चला, अस्तम्]
क. सूर्यः पूर्वदिशायाम् उदेति पश्चिमदिशायां च अस्तम् गच्छति।
ख. सूर्यः अचलः पृथिवी तु चला।
ग. पृथिवी स्वकीये अक्षे घूर्णति।
घ. यदा पृथिव्याः छायापातेन चन्द्रस्य प्रकाशः अवरुध्यते तदा चन्द्रग्रहणं भवति।
ङ. नौकायाम् उपविष्टः मानवः नौकाम् स्थिरामनुभवति।
अभ्यास-कार्यम् : सन्धि-विच्छेदः एवं विलोमपदानि
१. सन्धिविच्छेदं कुरुत:
• ग्रन्थोऽयम् = ग्रन्थः + अयम्
• सूर्याचलः = सूर्यः + अचलः
• तथैव = तथा + एव
• कालातिगामिनी = काल + अतिगामिनी
• प्रथमोपग्रहस्य = प्रथम + उपग्रहस्य
२. विपरीतार्थकपदानि (विलोमपदानि) लिखत:
क. उदयः → अस्तः
ख. अचलः → चलः
ग. अन्धकारः → प्रकाशः
घ. स्थिरः → गतिशीलः / अस्थिरः
ङ. समादरः → अनादरः / उपेक्षा
च. आकाशस्य → पातालस्य / पृथिव्याः
पाठस्य मुख्यसन्देशः
(सत्य की खोज के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अनिवार्य है। प्राचीन अंधविश्वासों और रूढ़ियों को त्यागकर वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर सत्य को स्वीकार करने से ही समाज व राष्ट्र की प्रगति संभव है।)

