Class 9 Sanskrit Chapter 5 Danveer Karna (दानवीरः कर्णः) Ncert solutions

Sooraj Krishna Shastri
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दानवीरः कर्णः - सम्पूर्ण पाठ एवं अभ्यास

पञ्चमः पाठः - दानवीरः कर्णः

पाठ परिचय: यह प्रसंग महाकवि भास द्वारा रचित 'कर्णभारम्' नाटक से संकलित है। इसमें दानवीर कर्ण की अद्वितीय दानशीलता को दर्शाया गया है। अर्जुन की सहायता के लिए देवराज इन्द्र (शक्र) ब्राह्मण वेष में आकर कर्ण से भिक्षा मांगते हैं।

१. सम्पूर्ण पाठ अनुवाद (गद्यांश एवं श्लोक)

(ततः प्रविशति ब्राह्मणवेषधारी शक्रः) - [तदनन्तर ब्राह्मण का वेष धारण किए हुए इन्द्र प्रवेश करते हैं।]

शक्रः (इन्द्र):
भो कर्ण ! महत्तरां भिक्षां याचे।
हिन्दी अनुवाद: हे कर्ण! मैं बहुत बड़ी भिक्षा माँगता हूँ।
कर्णः:
भगवन् ! कर्णोऽहं भवन्तं नमस्करोमि। आज्ञापय किमिच्छसि किं ददामि?
हिन्दी अनुवाद: भगवान! मैं कर्ण आपको प्रणाम करता हूँ। आज्ञा दीजिए, आप क्या चाहते हैं, मैं क्या दूँ?
शक्रः:
महत्तरां भिक्षां याचे।
हिन्दी अनुवाद: मैं बहुत बड़ी भिक्षा माँगता हूँ।
कर्णः:
महत्तरां भिक्षां भवते प्रदास्ये। गोसहस्रं ददामि।
हिन्दी अनुवाद: मैं आपको बहुत बड़ी भिक्षा दूँगा। मैं आपको एक हजार गायें देता हूँ।
शक्रः:
मुहूर्तकं क्षीरं पिबामि। नेच्छामि कर्ण ! नेच्छामि।
हिन्दी अनुवाद: मैं तो थोड़ी देर ही दूध पीऊँगा। हे कर्ण! मुझे यह नहीं चाहिए, नहीं चाहिए।
कर्णः:
किं नेच्छति भवान् ? वाजिनां सहस्रं ते ददामि।
हिन्दी अनुवाद: आप क्या नहीं चाहते? तो मैं आपको एक हजार घोड़े देता हूँ।
शक्रः:
मुहूर्तकमारोहामि। नेच्छामि कर्ण ! नेच्छामि।
हिन्दी अनुवाद: मैं तो थोड़ी देर ही सवारी करूँगा। हे कर्ण! मुझे यह नहीं चाहिए, नहीं चाहिए।
कर्णः:
एतत् वारणानां वृन्दं ददामि।
हिन्दी अनुवाद: तो फिर मैं हाथियों का यह समूह देता हूँ।
शक्रः:
एतदपि नेच्छामि।
हिन्दी अनुवाद: यह भी मुझे नहीं चाहिए।
कर्णः:
अन्यदपि श्रूयताम्। अपर्याप्तं कनकं ददामि।
हिन्दी अनुवाद: दूसरा भी सुनिए। मैं अत्यधिक स्वर्ण (सोना) देता हूँ।
शक्रः:
गृहीत्वा गच्छामि। (गत्वा पुनरागत्य च) नेच्छामि कर्ण! नेच्छामि।
हिन्दी अनुवाद: लेकर जाता हूँ। (जाकर और पुनः लौटकर) हे कर्ण! नहीं चाहता हूँ, नहीं चाहता हूँ।
कर्णः:
तेन हि जित्वा पृथिवीं ददामि।
हिन्दी अनुवाद: तो फिर पृथ्वी को जीतकर आपको दे देता हूँ।
शक्रः:
पृथिव्या किं करिष्यामि ?
हिन्दी अनुवाद: मैं पृथ्वी का क्या करूँगा?
कर्णः:
तेन हि मच्छिरो ददामि।
हिन्दी अनुवाद: तो फिर मैं अपना सिर काट कर दे देता हूँ।
शक्रः:
अविहा! अविहा !
हिन्दी अनुवाद: अरे नहीं! ऐसा मत कहो, ऐसा मत करो!
कर्णः:
न भेतव्यम्, न भेतव्यम्। प्रसीदतु भवान्। अन्यदपि श्रूयताम् - भगवते यदि उचितं स्यात् कुण्डलाभ्यां सह कवचं ददामि।
हिन्दी अनुवाद: डरिए मत, डरिए मत। आप प्रसन्न हों। एक और बात भी सुनिए — यदि भगवान के लिए उचित हो तो मैं कुण्डलों के साथ अपना कवच भी दे देता हूँ।
शक्रः:
(सहर्षम्) ददातु, ददातु।
हिन्दी अनुवाद: (प्रसन्नतापूर्वक) दे दो, दे दो!
कर्णः:
(आत्मगतम्) एषः एवास्य कामः। (प्रकाशम्) गृह्यताम्।
हिन्दी अनुवाद: (मन ही मन) यही इसकी वास्तविक इच्छा थी। (प्रकट रूप से) ग्रहण कीजिए।
शल्यराजः:
अङ्गराज ! न दातव्यम्, न दातव्यम् !
हिन्दी अनुवाद: हे अंगराज! मत दीजिए, मत दीजिए!
कर्णः:
शल्यराज ! अलम् अलं वारयितुम्। पश्य -
हिन्दी अनुवाद: शल्यराज! रोकने की आवश्यकता नहीं है, मुझे मत रोकिए। देखिए -
शिक्षा क्षयं गच्छति कालपर्ययात्
सुबद्धमूला निपतन्ति पादपाः ।
जलं जलस्थानगतं च शुष्यति
हुतं च दत्तं च तथैव तिष्ठति ॥
भावार्थ (Hindi): समय बीतने पर शिक्षा (विद्या) नष्ट हो जाती है, मजबूत जड़ों वाले वृक्ष भी उखड़ कर गिर जाते हैं, जलाशयों का जल भी सूख जाता है; किन्तु यज्ञ में दी गई आहुति (हवन) और निष्काम भाव से दिया गया दान सदा स्थिर रहता है।
Meaning (English): With the passage of time, education fades away; even strong-rooted trees fall down; water in reservoirs dries up. But what is offered in sacrifice (Homa) and what is given in charity remain permanent forever.
कर्णः:
तस्मात् गृह्यताम् । (निवृत्य ददाति)
हिन्दी अनुवाद: इसलिए इसे ग्रहण कीजिए। (लौटकर या उतारकर दे देता है)

२. शब्दार्थाः (Sanskrit, Hindi, English)

संस्कृत शब्दः संस्कृत-पर्यायः हिन्दी अर्थ English Meaning
महत्तराम्अतिविशालाम्बहुत बड़ीVery large
मुहूर्तकम्क्षणमात्रम्कुछ देर / क्षण भरFor a moment
वाजिनाम्अश्वानाम्घोड़ों काOf horses
वारणानाम्गजानाम्हाथियों काOf elephants
वृन्दम्समूहम्समूह / झुंडGroup / Multitude
अपर्याप्तम्असीमितम्असीमित / बहुत अधिकUnlimited / Abundant
शक्रःइन्द्रःदेवराज इन्द्रIndra
गृहीत्वास्वीकृत्यलेकर / ग्रहण करकेHaving taken
आगत्यआगम्यआकर / लौटकरHaving come
जित्वाजयं प्राप्यजीतकरHaving conquered
प्रसीदतुप्रसन्नो भवतुप्रसन्न होंBe pleased
भेतव्यम्भयं करणीयम्डरना चाहिएShould be afraid
आत्मगतम्मनोगतम्मन ही मनTo oneself
प्रकाशम्प्रकटम्प्रकट रूप सेPublicly / Aloud
अविहाहा कष्टम् / मा एवम्अरे नहीं! (निषेधार्थक)Oh no! / Do not do this
कामःइच्छाकामना / इच्छाDesire
अङ्गराजःअङ्गदेशस्य नृपःअंग देश का राजा (कर्ण)King of Anga (Karna)
अलम् वारयितुम्निवारणं मा कुरुरोकना व्यर्थ है / मत रोकोEnough, do not stop
कालपर्ययात्कालक्रमेणसमय बीतने सेWith passage of time
सुबद्धमूलाःसुदृढमूलाःमजबूत जड़ों वालेVery firmly rooted
पादपःतरुः / वृक्षःपेड़ / वृक्षTree
शुष्यतिशुष्कता भवतिसूख जाता हैDries up
हुतम्आहुति रूपम्हवन किया हुआOffered in sacrifice

३. अत्र इदम् अवधेयम् (व्याकरणम्)

उत्तमपुरुषस्य प्रयोगः (Use of First Person)

संस्कृत: उत्तमपुरुषस्य प्रयोगः वक्तुः कृते (बोलने वाले के लिए) भवति। यदा कश्चित् जनः स्वस्य विषये किमपि वदति, तदा उत्तमपुरुषस्य प्रयोगः भवति। अस्मिन् 'अस्मद्' शब्दस्य सर्वनामपदानि कर्तृरूपेण भवन्ति।

हिन्दी: उत्तमपुरुष का प्रयोग वक्ता (बोलने वाले) के लिए किया जाता है। जब कोई व्यक्ति अपने बारे में कुछ बोलता है, तब उत्तमपुरुष का प्रयोग होता है। इसमें 'अस्मद्' (मैं/हम) शब्द के सर्वनाम रूप कर्ता के रूप में प्रयुक्त होते हैं।

पुरुषः एकवचनम् (Singular) द्विवचनम् (Dual) बहुवचनम् (Plural)
उत्तमपुरुषः अहम् (मैं / I) आवाम् (हम दोनों / We two) वयम् (हम सब / We all)
क्रिया (वर्तमान काल) पठ् + आमि = पठामि पठ् + आवः = पठावः पठ् + आमः = पठामः

वाक्यप्रयोगाः (Examples):

  • एकवचने: अहं पठामि। (मैं पढ़ता हूँ। / I read.)
  • द्विवचने: आवां पठावः। (हम दोनों पढ़ते हैं। / We two read.)
  • बहुवचने: वयं पठामः। (हम सब पढ़ते हैं। / We read.)

विशेषः उत्तमपुरुष के सर्वनाम रूप तीनों लिंगों (पुंलिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग) में समान रहते हैं।

४. अभ्यासकार्यम् (प्रश्नोत्तराणि)

१. एकपदेन उत्तरत (One-word answers):

  • यथा - के निपतन्ति ?
    उत्तरम्: पादपाः
  • क. ब्राह्मणवेषधारी कः प्रविशति ?
    उत्तरम्: शक्रः (इन्द्रः)
  • ख. शक्रः कं भिक्षां याचते ?
    उत्तरम्: कर्णम्
  • ग. कर्णः प्रथमं किं दातुम् इच्छति ?
    उत्तरम्: गोसहस्रम्
  • घ. कालपर्ययात् का क्षयं गच्छति ?
    उत्तरम्: शिक्षा
  • ङ. कः कर्णं वारयति ?
    उत्तरम्: शल्यराजः

२. उचितं पर्यायं मेलयत (Match the following):

क (मूल शब्दः) ख (पर्यायवाची शब्दः)
वृन्दम्समूहम्
१. वृक्षाःख. पादपाः
२. शक्रःङ. इन्द्रः
३. स्वर्णम्ग. कनकम्
४. वाजिनःक. अश्वाः
५. अङ्गराजःघ. कर्णः

५. क्रियाकलापः (Activities)

  • श्लोक गायन एवं चर्चा: "शिक्षा क्षयं गच्छति कालपर्ययात्... हुतं च दत्तं च तथैव तिष्ठति ॥" श्लोक का सस्वर गायन करें एवं उसके अर्थ पर कक्षा में चर्चा करें।
  • नाट्य-अभिनय / ध्वन्यङ्कन: दो छात्र मिलकर कर्ण और शक्र के संवाद का अभिनय करें या ऑडियो रिकॉर्डिंग (ध्वन्यङ्कन) करके सुनाएँ।
  • 'अस्मद्' शब्दरूप लेखनम्: चार्ट पेपर (स्फोरकपत्रे) पर 'अस्मद्' शब्द के सभी विभक्तियों के रूप लिखकर कक्षा में प्रदर्शित करें।

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