Class 8 Hindi Malhar Chapter 6 Ek Tokri Bhar Mitti | एक टोकरी भर मिट्टी प्रश्नोत्तर

Sooraj Krishna Shastri
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एक टोकरी भर मिट्टी (सम्पूर्ण अभ्यास-कार्य)

षष्ठः पाठः (पाठ ६) — मल्हार (कक्षा ८)
  • १. पाठ का सारांश एवं लेखक-परिचय (माधवराव सप्रे की मार्मिक कहानी)
  • २. मेरी समझ से & मिलान करें (MCQs एवं सही निष्कर्ष का मिलान)
  • ३. सोच-विचार & प्रश्नोत्तर (पाठ्यपुस्तक के वैचारिक प्रश्न)
  • ४. अनुमान और कल्पना (विस्तृत) (सभी परिस्थितियों पर पूर्ण उत्तर)
  • ५. भाषा की बात & व्याकरण (मुहावरे, 'कि'/'की' का प्रयोग, काल व वचन)
  • ६. न्याय, करुणा और नागरिक शिकायत प्रक्रिया (सामाजिक जागरूकता)

पाठ का सारांश एवं लेखक-परिचय

पाठ का सारांश

'एक टोकरी भर मिट्टी' हिंदी की प्रारंभिक कहानियों में से एक है। यह एक गरीब, अनाथ वृद्धा और एक अहंकारी ज़मींदार की मार्मिक कहानी है। ज़मींदार अपने महल का अहाता बढ़ाने के लिए वकीलों की मदद से वृद्धा की पैतृक झोंपड़ी छीन लेता है। बेघर होने पर वृद्धा की छोटी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया। तब वृद्धा ज़मींदार के पास जाती है और पोती के लिए उसी झोंपड़ी की मिट्टी का चूल्हा बनाने हेतु 'एक टोकरी भर मिट्टी' माँगती है। ज़मींदार जब उस मिट्टी भरी टोकरी को उठाने का प्रयास करता है तो वह हिलती तक नहीं। तब वृद्धा कहती है कि "जब आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जा रही, तो इस झोंपड़ी की हज़ारों टोकरी मिट्टी का भार आप जीवन भर कैसे उठाएँगे?" यह मर्मभेदी बात ज़मींदार का अहंकार तोड़ देती है और वह पश्चाताप करते हुए वृद्धा को उसकी झोंपड़ी वापस लौटा देता है।

लेखक-परिचय (माधवराव सप्रे)

माधवराव सप्रे (१८७१-१९२६) हिंदी की प्रारंभिक कहानियों के सशक्त हस्ताक्षर माने जाते हैं। उनका जन्म दमोह (मध्य प्रदेश) में हुआ था। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से वे हिंदी साहित्य में आए। उनकी मातृभाषा मराठी थी। उन्होंने 'गीता-रहस्य' का मराठी से हिंदी में अनुवाद किया। उनकी कहानियाँ मात्र घटनाएँ नहीं, बल्कि समाज के ताने-बाने में उलझे अन्याय और मानवीय संवेदनाओं को उजागर करती हैं।

अभ्यास-कार्यम् : मेरी समझ से एवं मिलान

(१) ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी?
उत्तर: वह अहाते का विस्तार करना चाहता था।
(२) वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी?
उत्तर: विनती और नम्रता से।
(३) वृद्धा की बातों का ज़मींदार पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: सकारात्मक।
(४) 'एक टोकरी भर मिट्टी' पाठ मुख्य रूप से किस भावना पर आधारित है?
उत्तर: दया और क्षमा।

मिलकर करें मिलान (वाक्य एवं सही निष्कर्ष)

वाक्य सही निष्कर्ष
अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी।वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी।
वकीलों की थैली गरम कर अदालत से झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया।ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दावपेंच से झोंपड़ी पर कब्जा किया।
आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हज़ारों टोकरियाँ...वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है।
ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे।धन और अहंकार ने ज़मींदार को मानवीयता और करुणा से दूर कर दिया था।
कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी।अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर ज़मींदार ने क्षमा माँगी।
कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ।वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए ज़मींदार से विनम्र निवेदन किया।
उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों की यादों के कारण भावुक हो गई।

अभ्यास-कार्यम् : सोच-विचार एवं प्रश्नोत्तर

(क) आपके विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?
उत्तर: कहानी की सबसे प्रभावशाली पात्र 'वृद्धा' है, क्योंकि उसने बिना लड़े, केवल अपने विनम्र परंतु मार्मिक शब्दों ('एक टोकरी भर मिट्टी') से कठोर व अहंकारी ज़मींदार का हृदय परिवर्तन कर दिया।
(ख) वृद्धा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया था?
उत्तर: झोंपड़ी छिन जाने के बाद पोती को अपने घर की बहुत याद आ रही थी। उसने जिद पकड़ ली थी कि वह अपने घर (झोंपड़ी) में जाकर ही खाना खाएगी।
(ग) ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्जा कैसे किया?
उत्तर: ज़मींदार ने बाल की खाल निकालने वाले वकीलों को रिश्वत (थैली गरम कर) देकर, अदालत से कानूनी दावपेंच के ज़रिए अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी पर कब्ज़ा कर लिया था।
(घ) "महाराज क्षमा करें तो एक विनती है।" यहाँ ज़मींदार द्वारा सिर हिलाने की इस क्रिया का क्या अर्थ है?
उत्तर: ज़मींदार द्वारा सिर हिलाने का अर्थ था, बिना कुछ बोले मौन रूप से वृद्धा को अपनी बात कहने की 'स्वीकृति या आज्ञा' देना।
(ङ) "किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े।" इस घटना के बाद ज़मींदार के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर: पहले ज़मींदार बहुत अहंकारी और क्रूर था जो नौकरों से वृद्धा को भगाने को कह रहा था। टोकरी न उठा पाने और वृद्धा के वचन सुनने के बाद उसका अहंकार टूट गया और उसके मन में करुणा और पश्चाताप का भाव आ गया।
(च) "उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।" ज़मींदार ने ऐसा क्यों किया?
उत्तर: क्योंकि वृद्धा की बात से ज़मींदार को एहसास हो गया था कि अन्यायपूर्वक छीनी गई संपत्ति का पाप वह जीवन भर नहीं ढो पाएगा। उसका हृदय परिवर्तन हो गया था।

अनुमान और कल्पना (विस्तृत प्रश्नोत्तर)

(क) यदि वृद्धा की पोती ज़मींदार से स्वयं बात करती तो वह क्या कहती?

उत्तर: वह रोते हुए कहती, "ज़मींदार साहब, हमारी झोंपड़ी हमें लौटा दो। मुझे किसी और घर में नींद नहीं आती। मुझे अपने घर में जाकर ही खाना खाना है।"

(ख) यदि आप ज़मींदार की जगह होते तो क्या करते?

उत्तर: यदि मैं ज़मींदार की जगह होता तो मैं कभी एक बेसहारा वृद्धा की झोंपड़ी नहीं छीनता। अहाते के विस्तार की योजना को मैं बदल देता और उनकी झोंपड़ी को वहीं रहने देता।

(ग) ज़मींदार को टोकरी उठाने में सफलता क्यों नहीं मिली होगी?

उत्तर: एक तो ज़मींदार शारीरिक श्रम का अभ्यस्त नहीं था। दूसरा, उस टोकरी में केवल मिट्टी का भार नहीं था, बल्कि एक असहाय वृद्धा की 'आह, दुःख और ज़मींदार के पापों' का भारी बोझ था, जिसे वह नहीं उठा सका।

(घ) "झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है..." मिट्टी किस बात का प्रतीक हो सकती है?

उत्तर: यहाँ 'मिट्टी' प्रतीक है— अन्याय के पाप का, किसी गरीब को सताने के बोझ का, और जीवन की नश्वरता का। वृद्धा कहना चाहती थी कि जो व्यक्ति अन्याय का ज़रा सा बोझ नहीं सह सकता, वह इतनी बड़ी संपत्ति के पाप का बोझ कैसे सहेगा।

(ङ) कहानी के आधार पर बताइए कि सवा सौ साल पहले स्त्रियों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता होगा?

उत्तर: सवा सौ साल पहले (स्त्रियों विशेषकर विधवाओं को) समाज में बेसहारा माना जाता था। उनके पास अधिकारों की कमी थी, अमीर लोग उनकी संपत्ति आसानी से हड़प लेते थे, और वे केवल दूसरों की दया पर ही निर्भर रहती थीं।

भाषा की बात (मुहावरे, काल एवं 'कि' / 'की' का प्रयोग)

मुहावरों का प्रयोग

१. बाल की खाल निकालना (छोटी-छोटी बातों में कमी ढूँढना / बारीकी से जाँच करना)।

२. थैली गरम करना (रिश्वत देना)।

'बाल' शब्द से जुड़े अन्य मुहावरे एवं वाक्य प्रयोग:

बाल बाँका न होना: भयंकर दुर्घटना के बाद भी राम का बाल बाँका न हुआ।

बाल बराबर फर्क होना: दोनों भाइयों की शक्ल में बस बाल बराबर फर्क है।

बाल-बाल बचना: कार की टक्कर होते-होते हम बाल-बाल बचे।

'कि' और 'की' का सही उपयोग

• १. वृद्धा ने कहा कि वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है।

• २. वह अपनी पोती की चिंता में दुखी हो गई थी।

• ३. वृद्धा ने प्रार्थना की, टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए।

• ४. पोती हमेशा कहती थी कि वह अपने घर में ही खाना खाएगी।

• ५. झोंपड़ी की मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।

• ६. उसे विश्वास था कि मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी。

काल और वचन में परिवर्तन

• (क) वह गिड़गिड़ाकर बोली। ➔ वर्तमान: वह गिड़गिड़ाकर बोलती है। | भविष्य: वह गिड़गिड़ाकर बोलेगी।

• (ख) श्रीमान् ने आज्ञा दे दी। ➔ वर्तमान: श्रीमान् आज्ञा दे रहे हैं। | भविष्य: श्रीमान् आज्ञा दे देंगे।

'गई' और 'गईं' में अंतर: 'गई' एकवचन के लिए प्रयुक्त होता है, जबकि 'गईं' बहुवचन या आदरार्थ (सम्मान देने हेतु) प्रयुक्त होता है। (जैसे- वृद्धा भीतर गई। / उसकी आँखें खुल गईं।)

न्याय और करुणा एवं आज की पहेली

भावों की पहचान

• १. वह लज्जित होकर कहने लगे... ➔ लज्जा / पछतावा

• २. वृद्धा के वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं ➔ बोध / आत्मज्ञान

• ३. उनके मन में कुछ दया आ गई ➔ करुणा / दया

• ४. इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी ➔ आस्था / विश्वास

• ५. महाराज क्षमा करें तो एक विनती है ➔ विनम्रता / विनय

• ६. अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी ➔ ममता / स्नेह

• ७. ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो... ➔ अहंकार / घमंड

• ८. उस झोंपड़ी में उसका मन ऐसा कुछ लग गया था... ➔ जुड़ाव / मोह

• ९. जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आती तो मारे दुख के... ➔ दुख / पीड़ा

• १०. वकीलों की थैली गरम कर अदालत से झोंपड़ी पर कब्ज़ा... ➔ क्रूरता / अन्याय

न्याय और करुणा से जुड़ी नागरिक सहायता

ज़मींदार जैसे भ्रष्ट और अन्यायपूर्ण कार्यों से बचने के लिए भारत सरकार ने आज अनेक शिकायत पोर्टल बनाए हैं, जहाँ आम नागरिक अपनी आवाज़ उठा सकते हैं।
सार्वजनिक शिकायत सुविधा: https://pgportal.gov.in
जनसुनवाई (UP): https://jansunwai.up.nic.in/

आज की पहेली (अक्षरों से सार्थक शब्द)

१. ट् कई ओ र = टोकरी

२. आ द य् = याद

३. ई ल व क् = वकील

४. झू ओ ई प ड् अं = झोंपड़ी

५. ज द् आ मू ई र अं = ज़मींदार

६. त् आ इ औ क ल् = इकलौता / अदालत

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