उभयपदी 'हृ' धातु (हरण करना / ले जाना)
भ्वादि गण की प्रमुख धातु। यह उभयपदी है, अतः इसके रूप परस्मैपदी (हरति) और आत्मनेपदी (हरते) दोनों में चलते हैं। इसमें 'कृ' धातु के समान ही कई विशेष संधियाँ होती हैं।
💡 अनिट् धातु होने पर भी लृट् में 'इट्' का आगम (V.V.Imp)
• यद्यपि 'हृ' एक अनिट् धातु है (जिसका प्रमाण लुट् लकार में 'हर्ता' रूप है, 'हरिता' नहीं)।
• किन्तु पाणिनीय सूत्र 'ऋद्धनोः स्ये' के अनुसार, ऋदन्त धातुओं को 'स्य' (भविष्यत्) परे होने पर 'इट्' (इ) का आगम अनिवार्य रूप से होता है। इसलिए लृट् लकार में रूप 'हरिष्यति / हरिष्यते' बनते हैं, न कि 'हर्ष्यति'।
• लुङ् लकार में 'कृ' (अकार्षीत् / अकृत) के समान ही इसके रूप 'अहार्षीत्' (परस्मैपदी) और 'अहृत' (आत्मनेपदी) बनते हैं।
१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | हरति | हरतः | हरन्ति |
| मध्यम पुरुष | हरसि | हरथः | हरथ |
| उत्तम पुरुष | हरामि | हरावः | हरामः |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | हरते | हरेते | हरन्ते |
| मध्यम पुरुष | हरसे | हरेथे | हरध्वे |
| उत्तम पुरुष | हरे | हरावहे | हरामहे |
२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | हरिष्यति | हरिष्यतः | हरिष्यन्ति |
| मध्यम पुरुष | हरिष्यसि | हरिष्यथः | हरिष्यथ |
| उत्तम पुरुष | हरिष्यामि | हरिष्यावः | हरिष्यामः |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | हरिष्यते | हरिष्येते | हरिष्यन्ते |
| मध्यम पुरुष | हरिष्यसे | हरिष्येथे | हरिष्यध्वे |
| उत्तम पुरुष | हरिष्ये | हरिष्यावहे | हरिष्यामहे |
३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | हरतु / हरतात् | हरताम् | हरन्तु |
| मध्यम पुरुष | हर / हरतात् | हरतम् | हरत |
| उत्तम पुरुष | हराणि | हराव | हराम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | हरताम् | हरेताम् | हरन्ताम् |
| मध्यम पुरुष | हरस्व | हरेथाम् | हरध्वम् |
| उत्तम पुरुष | हरै | हरावहै | हरामहै |
४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अहरत् | अहरताम् | अहरन् |
| मध्यम पुरुष | अहरः | अहरतम् | अहरत |
| उत्तम पुरुष | अहरम् | अहराव | अहराम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अहरत | अहरेताम् | अहरन्त |
| मध्यम पुरुष | अहरथाः | अहरेथाम् | अहरध्वम् |
| उत्तम पुरुष | अहरे | अहरावहि | अहरामहि |
५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | हरेत् | हरेताम् | हरेयुः |
| मध्यम पुरुष | हरेः | हरेतम् | हरेत |
| उत्तम पुरुष | हरेयम् | हरेव | हरेम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | हरेत | हरेयाताम् | हरेरन् |
| मध्यम पुरुष | हरेथाः | हरेयाथाम् | हरेध्वम् |
| उत्तम पुरुष | हरेय | हरेवहि | हरेमहि |
६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | जहार | जह्रतुः | जह्रुः |
| मध्यम पुरुष | जहर्थ | जह्रथुः | जह्र |
| उत्तम पुरुष | जहार / जहर | जह्रिव | जह्रिम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | जह्रे | जह्राते | जह्रिरे |
| मध्यम पुरुष | जहृषे | जह्राथे | जहृध्वे / जहृढ्वे |
| उत्तम पुरुष | जह्रे | जह्रिवहे | जह्रिमहे |
💡 विशेष (लिट्): द्विर्वचन होकर अभ्यास कार्य (हृ + हृ ➔ जहृ) के पश्चात् यण् सन्धि होकर 'जह्र' रूप बनता है। परस्मैपदी में वृद्धि होकर 'जहार' तथा आत्मनेपदी में 'जह्रे' रूप सिद्ध होता है।
७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | हर्ता | हर्तारौ | हर्तारः |
| मध्यम पुरुष | हर्तासि | हर्तास्थः | हर्तास्थ |
| उत्तम पुरुष | हर्तास्मि | हर्तास्वः | हर्तास्मः |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | हर्ता | हर्तारौ | हर्तारः |
| मध्यम पुरुष | हर्तासे | हर्तासाथे | हर्ताध्वे |
| उत्तम पुरुष | हर्ताहे | हर्तास्वहे | हर्तास्महे |
८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | ह्रियात् | ह्रियास्ताम् | ह्रियासुः |
| मध्यम पुरुष | ह्रियाः | ह्रियास्तम् | ह्रियास्त |
| उत्तम पुरुष | ह्रियासम् | ह्रियास्व | ह्रियास्म |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | हृषीष्ट | हृषीयास्ताम् | हृषीरन् |
| मध्यम पुरुष | हृषीष्ठाः | हृषीयाथाम् | हृषीध्वम् |
| उत्तम पुरुष | हृषीय | हृषीवहि | हृषीमहि |
९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अहार्षीत् | अहार्ष्टाम् | अहार्षुः |
| मध्यम पुरुष | अहार्षीः | अहार्ष्टम् | अहार्ष्ट |
| उत्तम पुरुष | अहार्षम् | अहार्ष्व | अहार्ष्म |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अहृत | अहृषाताम् | अहृषत |
| मध्यम पुरुष | अहृथाः | अहृषाथाम् | अहृध्वम् / अहृढ्वम् |
| उत्तम पुरुष | अहृषि | अहृष्वहि | अहृष्महि |
💡 विशेष (लुङ्): यह लकार अत्यंत विशिष्ट है। 'कृ' धातु की भाँति ही इसमें परस्मैपदी में 'सिच्' प्रत्यय और वृद्धि होकर 'अहार्षीत्' बनता है। वहीं आत्मनेपदी में 'ह्रस्वादङ्गात्' सूत्र से 'सिच्' (स्) का लोप होकर सीधे 'अहृत' (उसने हरण किया) रूप बनता है।
१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भाव / Conditional)
➤ परस्मैपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अहरिष्यत् | अहरिष्यताम् | अहरिष्यन् |
| मध्यम पुरुष | अहरिष्यः | अहरिष्यतम् | अहरिष्यत |
| उत्तम पुरुष | अहरिष्यम् | अहरिष्याव | अहरिष्याम |
➤ आत्मनेपदी रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अहरिष्यत | अहरिष्येताम् | अहरिष्यन्त |
| मध्यम पुरुष | अहरिष्यथाः | अहरिष्येथाम् | अहरिष्यध्वम् |
| उत्तम पुरुष | अहरिष्ये | अहरिष्यावहि | अहरिष्यामहि |
