वृत् धातु रूप - १० लकार, अर्थ एवं व्याकरण | Vrut (Vrt) Dhatu Roop in Sanskrit

Sooraj Krishna Shastri
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वृत् धातु रूप - १० लकार, अर्थ एवं व्याकरण | Vrut (Vrt) Dhatu Roop in Sanskrit

आत्मनेपदी 'वृत्' धातु (होना / रहना / वर्ताव करना)

भ्वादि गण की यह धातु संस्कृत साहित्य में सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाली धातुओं में से एक है। इसके भविष्यत् काल (लृट्/लुट्) के रूपों में पाणिनि का एक विशेष नियम लागू होता है, जिसे समझना अत्यंत आवश्यक है।

💡 "वृद्भ्यः स्यसनोः" का रहस्य (V.V.Imp Rule)

पाणिनीय सूत्र 'वृद्भ्यः स्यसनोः' (१.३.९२) के अनुसार वृत्, वृध्, शृध् और स्यन्द् धातुओं से भविष्यत् काल (लृट्, लुट्, लृङ्) में विकल्प से परस्मैपद भी होता है।
• अतः लृट् लकार में 'वर्तिष्यते' (आत्मनेपद) के साथ-साथ 'वर्त्स्यति' (परस्मैपद) रूप भी शुद्ध माना जाता है। यहाँ तालिकाओं में सरलता के लिए मुख्य आत्मनेपदी रूप दिए गए हैं।

१. लट् लकार (वर्तमान काल / Present Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषवर्ततेवर्तेतेवर्तन्ते
मध्यम पुरुषवर्तसेवर्तेथेवर्तध्वे
उत्तम पुरुषवर्तेवर्तावहेवर्तामहे

२. लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् / Future Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषवर्तिष्यतेवर्तिष्येतेवर्तिष्यन्ते
मध्यम पुरुषवर्तिष्यसेवर्तिष्येथेवर्तिष्यध्वे
उत्तम पुरुषवर्तिष्येवर्तिष्यावहेवर्तिष्यामहे
💡 विशेष (लृट्): उपर्युक्त सूत्र 'वृद्भ्यः स्यसनोः' के कारण परस्मैपद में इसके रूप अनिट् होकर वर्त्स्यति, वर्त्स्यतः, वर्त्स्यन्ति (पठिष्यति के समान) भी बनते हैं। साहित्य में 'वर्त्स्यति' का प्रयोग बहुत होता है।

३. लोट् लकार (आज्ञा या प्रार्थना / Imperative Mood)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषवर्तताम्वर्तेताम्वर्तन्ताम्
मध्यम पुरुषवर्तस्ववर्तेथाम्वर्तध्वम्
उत्तम पुरुषवर्तैवर्तावहैवर्तामहै

४. लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल / Past Tense)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअवर्ततअवर्तेताम्अवर्तन्त
मध्यम पुरुषअवर्तथाःअवर्तेथाम्अवर्तध्वम्
उत्तम पुरुषअवर्तेअवर्तावहिअवर्तामहि

५. विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ में / Potential Mood)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषवर्तेतवर्तेयाताम्वर्तेरन्
मध्यम पुरुषवर्तेथाःवर्तेयाथाम्वर्तेध्वम्
उत्तम पुरुषवर्तेयवर्तेवहिवर्तेमहि

६. लिट् लकार (परोक्ष भूतकाल / Unseen Past)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषववृतेववृतातेववृतिरे
मध्यम पुरुषववृतिषेववृताथेववृतिध्वे / ववृतिढ्वे
उत्तम पुरुषववृतेववृतिवहेववृतिमहे
💡 विशेष (लिट्): द्विर्वचन (अभ्यास) होकर 'वृत्' का 'ववृत्' हो जाता है और गुण आदि कार्य होकर प्रथम एवं उत्तम पुरुष एकवचन में 'ववृते' रूप निष्पन्न होता है।

७. लुट् लकार (अनद्यतन भविष्यत् / First Future)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषवर्तितावर्तितारौवर्तितारः
मध्यम पुरुषवर्तितासेवर्तितासाथेवर्तिताध्वे
उत्तम पुरुषवर्तिताहेवर्तितास्वहेवर्तितास्महे

८. आशीर्लिङ् लकार (आशीर्वाद अर्थ में / Benedictive)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषवर्तिषीष्टवर्तिषीयास्ताम्वर्तिषीरन्
मध्यम पुरुषवर्तिषीष्ठाःवर्तिषीयाथाम्वर्तिषीध्वम्
उत्तम पुरुषवर्तिषीयवर्तिषीवहिवर्तिषीमहि

९. लुङ् लकार (सामान्य भूतकाल / Aorist Past)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअवर्तिष्टअवर्तिषाताम्अवर्तिषत
मध्यम पुरुषअवर्तिष्ठाःअवर्तिषाथाम्अवर्तिध्वम् / अवर्तिढ्वम्
उत्तम पुरुषअवर्तिषिअवर्तिष्वहिअवर्तिष्महि
💡 विशेष (लुङ्): अडागम और 'सिच्' प्रत्यय इडागम (इ) के साथ जुड़ने पर आत्मनेपद में 'अवर्तिष्ट' रूप बनता है। (परस्मैपद में सूत्र 'द्युद्भ्यो लुङि' से अङ् होकर 'अवृत्त' / 'अवृतत्' भी बनते हैं)।

१०. लृङ् लकार (हेतुहेतुमद् भाव / Conditional)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअवर्तिष्यतअवर्तिष्येताम्अवर्तिष्यन्त
मध्यम पुरुषअवर्तिष्यथाःअवर्तिष्येथाम्अवर्तिष्यध्वम्
उत्तम पुरुषअवर्तिष्येअवर्तिष्यावहिअवर्तिष्यामहि

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