सः एव महान् चित्रकारः
अष्टमः पाठः (पाठ ८) — दीपकम (कक्षा ६)
१. पाठ-परिचयः (अमृत-उद्यानम्)
उद्यानस्य चित्रम् उपरि प्रदर्शितम्। एतत् राष्ट्रपतिभवनस्य परिसरे विद्यमानम् अमृत-उद्यानम् अस्ति। अत्र शताधिक-प्रकारकाणि पाटलपुष्पाणि सन्ति। सामान्यतः पञ्चसहस्राधिकानि ऋतुपुष्पाणि च सन्ति। रमणीयः निसर्गः विविधैः वर्णैः सर्वेषां चित्तम् आकर्षति। अस्मिन् पाठे तादृशानां वर्णानां परिचयं प्राप्नुमः।
(बगीचे का चित्र ऊपर दिखाया गया है। यह राष्ट्रपति भवन के परिसर में स्थित 'अमृत उद्यान' है। यहाँ सौ से अधिक प्रकार के गुलाब के फूल हैं। आमतौर पर पाँच हज़ार से अधिक मौसमी फूल भी हैं। सुंदर प्रकृति अपने विविध रंगों से सभी का मन मोह लेती है। इस पाठ में हम ऐसे ही रंगों का परिचय प्राप्त करेंगे।)
(बगीचे का चित्र ऊपर दिखाया गया है। यह राष्ट्रपति भवन के परिसर में स्थित 'अमृत उद्यान' है। यहाँ सौ से अधिक प्रकार के गुलाब के फूल हैं। आमतौर पर पाँच हज़ार से अधिक मौसमी फूल भी हैं। सुंदर प्रकृति अपने विविध रंगों से सभी का मन मोह लेती है। इस पाठ में हम ऐसे ही रंगों का परिचय प्राप्त करेंगे।)
२. कक्षायां सम्भाषणम् (प्रकृति और रंग)
| संस्कृत वाक्यम् | हिन्दी अर्थः |
|---|---|
| शिक्षकः: वयम् अत्र किं किं पश्यामः? | हम यहाँ क्या-क्या देख रहे हैं? |
| श्रद्धा: सर्वत्र विविधानि पुष्पाणि, हरितानि पर्णानि, खगाः, जन्तवः च सन्ति इति पश्यामः। | हम देख रहे हैं कि हर जगह तरह-तरह के फूल, हरे पत्ते, पक्षी और जानवर हैं। |
| शिक्षकः: सत्यम्। एवमेव तेषां वर्णाः अपि विविधाः। यथा श्रद्धा वदति ‘हरितानि पर्णानि’ इति, अत्र पर्णस्य कः वर्णः? | सच है। इसी तरह उनके रंग भी विविध हैं। जैसे श्रद्धा ने कहा 'हरे पत्ते', तो यहाँ पत्ते का रंग क्या है? |
| छात्राः (सर्वे): हरितः। | हरा। |
| श्रद्धा: अत्र वृक्षस्य उपरि शुकः अस्ति। सः अपि हरितवर्णेन शोभते। | यहाँ पेड़ के ऊपर तोता है। वह भी हरे रंग से सुशोभित है। |
| शिक्षकः: श्रद्धे! भवत्याः इष्टवर्णः हरितः इति चिन्तयामि। अत एव हरितवर्णम् एव पश्यति खलु। | श्रद्धा! मुझे लगता है तुम्हारा पसंदीदा रंग हरा है। इसीलिए तुम सिर्फ हरा रंग ही देख रही हो। |
| मेधा: आचार्य! अत्र काकः अपि अस्ति, यस्य वर्णः कृष्णः। एवं पिकस्य अपि वर्णः कृष्णः। | आचार्य! यहाँ कौआ भी है, जिसका रंग काला है। और कोयल का रंग भी काला है। |
| शिक्षकः: आम्। उत्तमं निरीक्षणं भवत्याः। छात्राः! पश्यन्तु, अत्र पुष्पाणि अपि सन्ति। मनीषे! पश्यतु जपापुष्पम्। वदतु, अस्य वर्णः कः? | हाँ। तुम्हारा निरीक्षण बहुत अच्छा है। छात्रो! देखो, यहाँ फूल भी हैं। मनीषा! गुड़हल के फूल को देखो और बताओ, इसका रंग क्या है? |
| मनीषा: रक्तवर्णः आचार्य! शुकस्य चञ्चुः अपि रक्तवर्णा। पाटलपुष्पम् अपि रक्तवर्णेन युक्तम्। | लाल रंग आचार्य! तोते की चोंच भी लाल रंग की है। गुलाब का फूल भी लाल रंग का है। |
| शिक्षकः: शोभनम्। चित्रवर्णाः शुकाः अपि अत्र सन्ति इति जानन्ति किम्? | बहुत अच्छा। क्या तुम जानते हो कि यहाँ रंग-बिरंगे तोते भी हैं? |
| आदित्यः: आचार्य! ते कीदृशाः भवन्ति? वयं द्रष्टुम् इच्छामः। | आचार्य! वे कैसे होते हैं? हम देखना चाहते हैं। |
| शिक्षकः: तादृशान् शुकान् वयं प्रायः जन्तुशालायां पश्यामः। तेषां पक्षाः नीलाः, पीताः, रक्ताः च भवन्ति। | ऐसे तोतों को हम अक्सर चिड़ियाघर में देखते हैं। उनके पंख नीले, पीले और लाल होते हैं। |
| मञ्जुलः: आचार्य! पाटलपुष्पाणि अपि विविधवर्णयुक्तानि भवन्ति। मम उद्याने पीतवर्णानि, श्वेतवर्णानि, नीललोहितवर्णानि, केसरवर्णानि च पाटलपुष्पाणि सन्ति। | आचार्य! गुलाब के फूल भी कई रंगों के होते हैं। मेरे बगीचे में पीले, सफेद, जामुनी और केसरिया रंग के गुलाब के फूल हैं। |
| शिक्षकः: उत्तमम्। पश्यन्तु, हंंसः श्वेतः। तथा अन्ये के श्वेतवर्णाः? | बहुत अच्छा। देखो, हंस सफेद है। और कौन-कौन सफेद रंग के होते हैं? |
| मेधा: आचार्य! बकः शशः च। तथा भवतः प्रावारकम् अपि श्वेतम्। | आचार्य! बगुला और खरगोश। और आपका कोट भी सफेद है। |
| शिक्षकः: आम्। सम्यक्। सर्वे स्वस्य अन्येषां च वस्त्राणां वर्णान् अवलोकयन्तु। | हाँ। बिल्कुल सही। सभी अपने और दूसरों के कपड़ों के रंगों को देखें। |
| मञ्जुलः: आचार्य! इन्द्रधनुः तु बहुवर्णमयं खलु। तत्र सप्त वर्णाः भवन्ति। | आचार्य! इंद्रधनुष तो बहुत सारे रंगों वाला होता है न। उसमें सात रंग होते हैं। |
| शिक्षकः: आम्। सर्वः अपि निसर्गः बहुवर्णमयः। तेन संसारः सुन्दरः। वर्णैः एव अस्माकं जीवनम् अपि मनोरमं भवति। तत्र ‘वर्णयोजकः चित्रकारः कः’ इति जानन्ति किम्? | हाँ। पूरी प्रकृति ही रंग-बिरंगी है। उसी से संसार सुंदर है। रंगों से ही हमारा जीवन भी सुंदर होता है। क्या तुम जानते हो कि इन रंगों को भरने वाला ‘चित्रकार कौन है’? |
| सर्वे (उच्चैः): परमेश्वरः, परमेश्वरः। | सभी ज़ोर से: परमेश्वर, परमेश्वर। |
| शिक्षकः: आम्। सः एव महान् चित्रकारः। | हाँ। वही महान चित्रकार है। |
३. शब्दार्थ-सारणी
| संस्कृत शब्दः | हिन्दी अर्थः | English |
|---|---|---|
| निसर्गः | प्रकृति | Nature |
| हरितानि | हरे रंग के | Green |
| पर्णानि | पत्ते | Leaves |
| जन्तवः | प्राणी / जानवर | Animals |
| खगाः | पक्षी | Birds |
| वर्णमयः | रंगीन | Colourful |
| शुकः | तोता | Parrot |
| इष्टवर्णः | पसंदीदा रंग | Favourite Colour |
| काकः | कौआ | Crow |
| पिकः | कोयल | Cuckoo |
| जपापुष्पम् | गुड़हल | Hibiscus |
| चञ्चुः | चोंच | Beak |
| रक्तः | लाल | Red |
| नीलः | नीला | Blue |
| पीतः | पीला | Yellow |
| पक्षाः | पंख | Wings |
| जन्तुशालायाम् | चिड़ियाघर में | In the zoo |
| पाटलपुष्पम् | गुलाब | Rose |
| श्वेतम् | सफेद | White |
| नीललोहितम् | जामुनी / बैंगनी | Purple |
| केसरम् | केसरिया | Saffron |
| पाटलम् | गुलाबी | Pink |
| हंसः | हंस | Swan |
| बकः | बगुला | Heron |
| शशः | खरगोश | Rabbit |
| प्रावारकम् | कोट | Coat |
४. अभ्यासः - भाग १ (प्रश्नोत्तराणि १-३)
| १. पाठस्य आधारेण प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु: | |
|---|---|
| (क) जपापुष्पस्य वर्णः कः? | रक्तवर्णः |
| (ख) शुकः केन वर्णेन शोभते? | हरितवर्णेन |
| (ग) श्रद्धायाः इष्टवर्णः कः? | हरितः |
| (घ) कः महान् चित्रकारः? | परमेश्वरः |
| (ङ) आदित्यः कान् द्रष्टुम् इच्छति? | चित्रवर्णान् शुकान् |
| २. पाठस्य आधारेण प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु: |
|---|
| (क) आचार्यस्य प्रावारकस्य वर्णः कः? ➔ आचार्यस्य प्रावारकस्य वर्णः श्वेतः अस्ति। |
| (ख) कुत्र विविधेषु वर्णेषु पाटलपुष्पाणि सन्ति? ➔ मञ्जुलस्य उद्याने विविधेषु वर्णेषु पाटलपुष्पाणि सन्ति। |
| (ग) किं बहुवर्णमयम् इति मञ्जुलस्य अभिप्रायः? ➔ इन्द्रधनुः बहुवर्णमयम् इति मञ्जुलस्य अभिप्रायः। |
| (घ) चित्रवर्णशुकाः कीदृशाः भवन्ति? ➔ चित्रवर्णशुकानां पक्षाः नीलाः, पीताः, रक्ताः च भवन्ति। |
| (ङ) कस्य कस्य वर्णः कृष्णः? ➔ काकस्य पिकस्य च वर्णः कृष्णः भवति। |
| ३. उचितवर्णेन सह शब्दं संयोजयन्तु (सही मिलान): | |
|---|---|
| • रक्तवर्णः ➔ | लाल (Red) |
| • नीलवर्णः ➔ | नीला (Blue) |
| • कृष्णवर्णः ➔ | काला (Black) |
| • हरितवर्णः ➔ | हरा (Green) |
| • केसरवर्णः ➔ | केसरिया (Saffron) |
| • श्वेतवर्णः ➔ | सफेद (White) |
| • पाटलवर्णः ➔ | गुलाबी (Pink) |
| • नीललोहितः ➔ | जामुनी / पर्पल (Purple) |
| • पीतवर्णः ➔ | पीला (Yellow) |
५. अभ्यासः - भाग २ (प्रश्नोत्तराणि ४-६)
| ४. राष्ट्रध्वजस्य समुचितैः वर्णैः वाक्येषु रिक्तस्थानानि पूरयन्तु: | |
|---|---|
| (क) उपरि ............ वर्णः अस्ति। | केसर |
| (ख) मध्ये ............ वर्णः अस्ति। | श्वेत |
| (ग) अधः ............ वर्णः अस्ति। | हरित |
| (घ) ध्वजस्य केन्द्रे ............ वर्णः अस्ति। | नील |
| ५. प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु: | |
|---|---|
| (क) केशानां वर्णः कः? ➔ | कृष्णः (काला) |
| (ख) आकाशस्य वर्णः कः? ➔ | नीलः (नीला) |
| (ग) कदलीफलस्य वर्णः कः? ➔ | पीतः (पीला) |
| (घ) तृणस्य वर्णः कः? ➔ | हरितः (हरा) |
| (ङ) महिषस्य वर्णः कः? ➔ | कृष्णः (काला) |
| (च) मयूरस्य वर्णः कः? ➔ | नीलहरितः / चित्रवर्णः |
| ६. रेखाचित्रेषु निर्दिष्टान् वर्णान् पूरयन्तु (चित्रों में रंग भरें): | |
|---|---|
| • केसरः = केसरिया (Saffron) | • श्वेतः = सफेद (White) |
| • पाटलः = गुलाबी (Pink) | • कृष्णः = काला (Black) |
| • हरितः = हरा (Green) | • पीतः = पीला (Yellow) |
| • नीलः = नीला (Blue) | • रक्तः = लाल (Red) |
६. योग्यताविस्तरः एवं परियोजनाकार्यम्
| अमरकोशे वर्णानां वर्गीकरणम् (धीवर्गः) |
|---|
| १. श्वेत वर्ण (सफेद रंग) के नाम: शुक्लशुभ्रशुचिश्वेतविशदश्येतपाण्डराः। अवदातः सितो गौरो वलक्षो धवलोऽर्जुनः॥ (शुक्लः, शुभ्रः, शुचिः, श्वेतः, विशदः, श्येतः, पाण्डरः, अवदातः, सितः, गौरः, वलक्षः, धवलः, अर्जुनः) |
| २. पीला, भूरा और काला रंग: हरिणः पाण्डुरः पाण्डुरीषत्पाण्डुस्तु धूसरः। कृष्णे नीलासितश्यामकालश्यामलमेचकाः॥ (हरिणः, पाण्डुरः, पाण्डुः, ईषत्पाण्डुः, धूसरः, कृष्णः, नीलः, असितः, श्यामः, कालः, श्यामलः, मेचकः) |
| ३. पीला, हरा और लाल रंग: पीतो गौरो हरिद्राभः पलाशो हरितो हरित्। लोहितो रोहितो रक्तः शोणः कोकनदच्छविः॥ (पीतः, गौरः, हरिद्राभः, पालाशः, हरितः, हरित्, लोहितः, रोहितः, रक्तः, कोकनदच्छविः) |
| ४. लाल, गुलाबी और मिश्रित रंग: अव्यक्तरागस्त्वरुणः श्वेतरक्तस्तु पाटलः। श्यावः स्यात्कपिशो धूम्रधूमलौ कृष्णलोहिते॥ (रक्तोत्पलाभः, शोणः, अव्यक्तरागः, ईषद्रक्तः, अरुणः, श्वेतरक्तः, पाटलः, श्यावः, कपिशः, धूम्रः, धूमलः, कृष्णलोहितः) |
| ५. भूरा, पीला-भूरा और रंग-बिरंगा: कडारः कपिलः पिङ्गपिशङ्गौ कद्रुपिङ्गलौ। चित्रं किर्मीरकल्माषशबलैताश्च कर्बुरे॥ (कडारः, कपिलः, पिङ्गः, पिशङ्गः, कद्रुः, पिङ्गलः, चित्रम्, किर्मीरः, कल्माषः, शबलः, कर्बुरः - विचित्रवर्णः) |
| सायङ्कालस्य वर्णाः (शाम के रंग) |
|---|
| सायङ्काले त्वम्बरकोणे विलिखति प्रकृतिर्वर्णचयम्। रक्तं पीतं श्वेतं चित्रं नीलं शबलितदृग्विभवम्॥ वर्णविचित्रं गगनं दृष्ट्वा बालास्सर्वे तुष्यन्ति। द्रष्टुं सर्वं तस्य समीपं विहगाः विविधाः गच्छन्ति॥ प्रतिनिमिषं हि वर्णविशेषः नव्यं रूपं प्राप्नोति। गन्धर्वाणां मन्दिरमित्यपि सर्वे मर्त्याः कथयन्ति॥ प्रतिदिनमेवं गगने सायं रचिता वर्णाः केनैते। तुभ्यं सर्वकलाकाराणां नायक! भगवन् नमो नमः॥ – कल्लडि-कृष्णन्कुट्टी |
परियोजनाकार्यम्:
१. उपरितनानां चित्राणां नामानि वर्णाः च के इति अभिजानन्तु लिखन्तु च। (दिए गए चित्रों के नाम और उनके रंग पहचान कर लिखें।)
२. कक्षायां विद्यमानानां १० वस्तूनां नामानि वर्णान् च अभिजानन्तु लिखन्तु च। (कक्षा में मौजूद 10 वस्तुओं के नाम और रंग पहचान कर लिखें।)
१. उपरितनानां चित्राणां नामानि वर्णाः च के इति अभिजानन्तु लिखन्तु च। (दिए गए चित्रों के नाम और उनके रंग पहचान कर लिखें।)
२. कक्षायां विद्यमानानां १० वस्तूनां नामानि वर्णान् च अभिजानन्तु लिखन्तु च। (कक्षा में मौजूद 10 वस्तुओं के नाम और रंग पहचान कर लिखें।)

