शूराः वयं धीराः वयम्
सप्तमः पाठः (पाठ ७) — दीपकम (कक्षा ६)
१. पाठ-परिचयः (कक्षायां सम्भाषणम्)
छात्रः: श्रीमन्! अहम् अद्य ‘शूरा वयं धीरा वयम्’ इति गीतं श्रुतवान्।
शिक्षिका: अस्तु! शोभनम्।
छात्रा: श्रीमन्! अहम् अपि एतत् गीतं श्रुतवान्। सुन्दरं गीतम् अस्ति।
शिक्षकः: छात्राः! “शूरा वयं धीरा वयम्” अत्र ‘वयम्’ इति शब्दः केषां कृते प्रयुक्तः?
छात्रः: वयम् शब्दः भारतीयानां कृते अस्ति इति चिन्तयामि।
छात्रा: श्रीमन्! वयं भारतीयाः शूराः वीराः च स्मः।
शिक्षकः: सत्यम्। वयं भारतीयाः शूराः वीराः च। एतत् एव सस्वरं मिलित्वा गायामः।
शिक्षिका: अस्तु! शोभनम्।
छात्रा: श्रीमन्! अहम् अपि एतत् गीतं श्रुतवान्। सुन्दरं गीतम् अस्ति।
शिक्षकः: छात्राः! “शूरा वयं धीरा वयम्” अत्र ‘वयम्’ इति शब्दः केषां कृते प्रयुक्तः?
छात्रः: वयम् शब्दः भारतीयानां कृते अस्ति इति चिन्तयामि।
छात्रा: श्रीमन्! वयं भारतीयाः शूराः वीराः च स्मः।
शिक्षकः: सत्यम्। वयं भारतीयाः शूराः वीराः च। एतत् एव सस्वरं मिलित्वा गायामः।
२. देशभक्ति-गीतम् एवं श्लोक-अर्थः
| संस्कृत श्लोकः | हिन्दी अर्थः |
|---|---|
| शूरा वयं धीरा वयं वीरा वयं सुतराम्। गुणशालिनो बलशालिनो जयगामिनो नितराम्॥१॥ शूरा वयम्॥ | हम बहुत शूरवीर (शूर), धैर्यवान (धीर), और वीर हैं। हम अत्यधिक गुणवान, बलवान और हमेशा विजय की ओर जाने वाले हैं। हम शूरवीर हैं। |
| दृढमानसा गतलालसाः प्रियसाहसाः सततम्। जनसेवका अतिभावुकाः शुभचिन्तका नियतम्॥२॥ शूरा वयम्॥ | हम दृढ़ निश्चय वाले, लालच से रहित (निर्लोभी) और हमेशा साहस से प्रेम करने वाले हैं। हम निश्चित रूप से लोगों की सेवा करने वाले, अत्यन्त संवेदनशील (भावुक) और सबका भला सोचने वाले हैं। हम शूरवीर हैं। |
| धनकामना सुखवासना न च वञ्चना हृदये। ऊर्जस्वला वर्चस्वला अतिनिश्चला विजये॥३॥ शूरा वयम्॥ | हमारे हृदय में न तो धन की इच्छा है, न सुख की लालसा है, और न ही किसी को धोखा देने की भावना है। हम विजय प्राप्ति में अत्यन्त ऊर्जायुक्त, तेजपूर्ण और अडिग हैं। हम शूरवीर हैं। |
| गतभीतयो धृतनीतयो दृढशक्तयो निखिलाः। यामो वयं समराङ्गणं विजयार्थिनो बालाः॥४॥ शूरा वयम्॥ | हम सभी बच्चे भय से रहित (निडर), नीति का पालन करने वाले और दृढ़ शक्ति वाले हैं। हम विजय की इच्छा रखने वाले बच्चे युद्ध के मैदान की ओर प्रस्थान करते हैं। हम शूरवीर हैं। |
| जगदीश हे! परमेश हे! सकलेश हे! भगवन्। जयमङ्गलं परमोज्ज्वलं नो देहि परमात्मन्॥५॥ शूरा वयम्॥ | हे जगदीश्वर! हे परमेश्वर! हे सबके स्वामी भगवन्! हे परमात्मा, आप हमें परम उज्ज्वल और मंगलमयी विजय प्रदान करें। हम शूरवीर हैं। |
३. शब्दार्थ-सारणी
| संस्कृत शब्दः | हिन्दी अर्थः | English |
|---|---|---|
| नितराम् | अत्यधिक रूप से | Abundantly |
| दृढमानसाः | दृढ़ मन वाले | Determined |
| गतलालसाः | लालच रहित | Without greed |
| प्रियसाहसाः | साहसी | Brave |
| नियतम् | निश्चित | Certainly |
| ऊर्जस्वलाः | फुर्तीले | Energetic |
| वर्चस्वलाः | तेजस्वी | Radiant |
| अतिनिश्चलाः | दृढ़ निर्णय वाले | Determined |
| शूराः | पराक्रमी | Brave |
| गतभीतयः | भयरहित | Fearless |
| धृतनीतयः | नीतिमान् | Righteous |
| दृढशक्तयः | शक्तिमान् | Powerful |
| निखिलाः | सम्पूर्ण | All |
| यामः | जाते/जाती हैं | We are going |
| समराङ्गणम् | युद्ध का मैदान | Battlefield |
| विजयार्थिनः | विजय चाहने वाले | Wanting victory |
| सकलेश | सभी के ईश | Supreme God |
| परमोज्ज्वलम् | परम उज्ज्वल | Extremely bright |
| नः | हमें | Us |
| देहि | दीजिए | Give |
४. अभ्यासः - भाग १ (प्रश्नोत्तराणि १-४)
| १. एतत् सम्पूर्णं गीतं सस्वरं गायन्तु, लिखन्तु, कण्ठस्थं च कुर्वन्तु। | |
|---|---|
| (छात्र स्वयं गीत का सस्वर वाचन व स्मरण करें।) |
| २. पाठस्य आधारेण प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु: | |
|---|---|
| (क) शूराः के? | भारतीयाः / वयम् / बालाः |
| (ख) वयं कीदृशमानसाः स्मः? | दृढमानसाः |
| (ग) वयं कीदृशचिन्तकाः स्मः? | शुभचिन्तकाः |
| (घ) वयं कुत्र अतिनिश्चलाः स्मः? | विजये |
| (ङ) वयं विजयार्थिनः कुत्र यामः? | समराङ्गणम् |
| ३. अधोलिखितानां पदानां वचनपरिवर्तनं कुर्वन्तु (एकवचन ⟷ बहुवचन) | |
|---|---|
| (क) शूराः वयम् = शूरः अहम् | वीराः वयम् = वीरः अहम् |
| (ख) बलशाली अहम् = बलशालिनो वयम् | जयगामी अहम् = जयगामिनो वयम् |
| (ग) दृढमानसाः वयम् = दृढमानसः अहम् | प्रियसाहसाः वयम् = प्रियसाहसः अहम् |
| (घ) अतिभावुकः अहम् = अतिभावुकाः वयम् | शुभचिन्तकः अहम् = शुभचिन्तकाः वयम् |
| (ङ) धनकामना = धनकामनाः | वञ्चना = वञ्चनाः |
| (च) वर्चस्वलः अहम् = वर्चस्वलाः वयम् | अतिनिश्चलः अहम् = अतिनिश्चलाः वयम् |
| ४. स्तम्भौ मेलयन्तु उत्तरं च लिखन्तु (सही मिलान) | |
|---|---|
| (क) गतभीतयो धृतनीतयो | दृढशक्तयो निखिलाः |
| (ख) यामो वयं समराङ्गणं | विजयार्थिनो बालाः |
| (ग) जगदीश हे! परमेश हे! | सकलेश हे भगवन्! |
| (घ) जयमङ्गलं परमोज्ज्वलं | नो देहि परमात्मन्! |
| (ङ) जनसेवका अतिभावुकाः | शुभचिन्तका नियतम् |
| (च) ऊर्जस्वला वर्चस्वला | अतिनिश्चला विजये |
५. अभ्यासः - भाग २ (प्रश्नोत्तराणि ५-८)
| ५. अधोलिखितानां पदानां वचनपरिवर्तनं कुर्वन्तु: | |
|---|---|
| एकवचनम् | बहुवचनम् |
| यथा – शूरः | शूराः |
| (क) धीरः | धीराः |
| (ख) वीरः | वीराः |
| (ग) जनसेवकः | जनसेवकाः |
| (घ) धनकामना | धनकामनाः |
| (ङ) निखिलः | निखिलाः |
| (च) बालः | बालाः |
| ६. पदानि परस्परं संयोज्य वाक्यानि रचयन्तु |
|---|
| (अ) छात्रः, छात्रौ, छात्राः, अहम्, आवाम्, वयम्, त्वम्, युवाम्, यूयम् (ब) पठामि, पठसि, पठति, पठन्ति, पठथः, पठथ, पठतः, पठामः, पठावः |
| • (क) छात्रः ➔ छात्रः पठति। • (ख) छात्रौ ➔ छात्रौ पठतः। • (ग) छात्राः ➔ छात्राः पठन्ति। • (घ) अहम् ➔ अहं पठामि। • (ङ) आवाम् ➔ आवां पठावः। • (च) वयम् ➔ वयं पठामः। • (छ) त्वम् ➔ त्वं पठसि। • (ज) युवाम् ➔ युवां पठथः। • (झ) यूयम् ➔ यूयं पठथ। |
| ७. कोष्ठकात् उचितं पदं स्वीकृत्य रिक्तस्थाने लिखन्तु: | |
|---|---|
| यथा– तद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, एकवचनम् – सा (एषा/अहम्/सा) | |
| (क) अस्मद्, प्रथमा विभक्तिः, एकवचनम् – (वयम्/त्वम्/अहम्) | अहम् |
| (ख) युष्मद्, प्रथमा विभक्तिः, द्विवचनम् – (त्वम्/सः/युवाम्) | युवाम् |
| (ग) तद्, पुंलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, बहुवचनम् – (एषः/ते/सा) | ते |
| (घ) एतद्, नपुंसकलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, बहुवचनम् – (एतानि/वयम्/तत्) | एतानि |
| (ङ) एतद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, एकवचनम् – (अहम्/एषा/एतत्) | एषा |
| (च) तद्, स्त्रीलिङ्गम्, प्रथमा विभक्तिः, द्विवचनम् – (ते/अहम्/एषा) | ते |
| ८. उदाहरणमनुसृत्य उचितेन पदेन रिक्तस्थानं पूरयन्तु (यथा– नायिका नृत्यति। (नृत्)) | |
|---|---|
| (क) बालकः ............ (लिख्) | लिखति |
| (ख) छात्रौ ............ (क्रीड्) | क्रीडतः |
| (ग) अहम् ............ (गच्छ्) | गच्छामि |
| (घ) कविः ............ (रच्) | रचयति |
| (ङ) महिलाः ............ (वद्) | वदन्ति |
| (च) देवाः ............ (आगच्छ्) | आगच्छन्ति |
| (छ) फलानि ............ (पत्) | पतन्ति |
| (ज) गृहिण्यः ............ (उपविश्) | उपविशन्ति |
६. योग्यताविस्तरः एवं परियोजनाकार्यम्
| सर्वनाम-रूपाणि (Pronouns in Prathama Vibhakti) | |||
|---|---|---|---|
| शब्दः (लिङ्गम्) | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| तद् (पुंलिङ्गम्) | सः | तौ | ते |
| तद् (स्त्रीलिङ्गम्) | सा | ते | ताः |
| तद् (नपुंसकलिङ्गम्) | तत् | ते | तानि |
| एतद् (पुंलिङ्गम्) | एषः | एतौ | एते |
| एतद् (स्त्रीलिङ्गम्) | एषा | एते | एताः |
| एतद् (नपुंसकलिङ्गम्) | एतत् | एते | एतानि |
| अस्मद् (त्रिषु लिङ्गेषु) | अहम् | आवाम् | वयम् |
| युष्मद् (त्रिषु लिङ्गेषु) | त्वम् | युवाम् | यूयम् |
| महापुरुषाणां स्मरणम् (महान पुरुषों/स्त्रियों का स्मरण) |
|---|
| अरुन्धत्यनसूया च सावित्री जानकी सती। द्रौपदी कण्णगी गार्गी मीरा दुर्गावती तथा॥ लक्ष्मीरहल्या चन्नम्मा रुद्रमाम्बा सुविक्रमा। निवेदिता सारदा च प्रणम्याः मातृदेवताः॥ अगस्त्यः कम्बुकौण्डिन्यौ राजेन्द्रश्चोलवंशजः। अशोकः पुष्यमित्रश्च खारवेलः सुनीतिमान्॥ रामकृष्णो दयानन्दो रवीन्द्रो राममोहनः। रामतीर्थोऽरविन्दश्च विवेकानन्द उद्यशाः॥ |
गीतस्य रचनाकारः: अस्य गीतस्य रचनाकारः श्रीधरः भास्करः वर्णेकरः अस्ति। एषः सुप्रसिद्धः आधुनिकः कविः अस्ति। वर्णेकरमहोदयस्य जन्म महाराष्ट्र-राज्ये नागपुरनगरे अभवत्। एषः अनेकानि काव्यानि नाटकानि गीतानि च रचितवान्। वर्णेकरमहोदयः राष्ट्रपतिपुरस्कारेण अपि सम्मानितः अस्ति।

