Harsha Rajyoga in Kundali: जब 6th House का स्वामी ही बदल दे आपकी किस्मत | Vipreet Rajyog Benefits

Sooraj Krishna Shastri
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Harsha Rajyoga in Kundali: जब 6th House का स्वामी ही बदल दे आपकी किस्मत | Vipreet Rajyog Benefits
Harsha Rajyoga in Kundali: जब 6th House का स्वामी ही बदल दे आपकी किस्मत | Vipreet Rajyog Benefits
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✨ हर्ष राजयोग ✨

जब कुंडली का छठा भाव (शत्रु और रोग) बन जाए सुख का कारण

वैदिक ज्योतिष में कुंडली के 6, 8 और 12वें भाव को 'त्रिक भाव' या 'दु:स्थान' कहा गया है। अक्सर लोग इन भावों के नाम से डर जाते हैं क्योंकि ये संघर्ष, रोग और खर्च दर्शाते हैं।

💡 ज्योतिष का अद्भुत नियम: "लोहा ही लोहे को काटता है।" जब इन अशुभ भावों के स्वामी आपस में ही संबंध बनाते हैं, तो वे अशुभता को नष्ट कर 'विपरीत राजयोग' का निर्माण करते हैं।

आज हम बात करेंगे "हर्ष राजयोग" की, जो विशेष रूप से छठे भाव के स्वामी द्वारा निर्मित होता है और जीवन में 'हर्ष' (खुशी) भर देता है।

🔍 क्या है हर्ष राजयोग?

जब कुंडली के छठे भाव (रोग, ऋण, शत्रु) का स्वामी निम्नलिखित स्थितियों में से किसी एक में हो:

  • 🏠 छठे भाव में ही (स्वगृही)
  • 🔮 आठवें भाव में (मृत्यु/गुप्त विद्या)
  • ✈️ बारहवें भाव में (व्यय/मोक्ष)

तो यह हर्ष राजयोग कहलाता है। यह योग जातक को विपरीत परिस्थितियों में भी आनंद और अभूतपूर्व सफलता प्रदान करता है।

🌟 हर्ष राजयोग के 3 मुख्य प्रभाव

इस योग का फल इस बात पर निर्भर करता है कि छठे भाव का स्वामी कहाँ बैठा है। इसे नीचे दिए गए 3 कार्ड्स में समझें:

1. स्वामी छठे भाव में

  • शत्रुहंता: शत्रु या तो बनते नहीं, या अपने आप नष्ट हो जाते हैं।
  • निरोगी काया: गंभीर बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।
  • कोर्ट-कचहरी: कानूनी विवादों और नौकरी में निश्चित जीत मिलती है।

2. स्वामी आठवें भाव में

  • गुप्त विद्या: ज्योतिष, रिसर्च और तंत्र में गहरी रुचि और सफलता।
  • सुरक्षा: दुर्घटना और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
  • अचानक धन: वसीयत या पैतृक संपत्ति मिलने के योग बनते हैं।

3. स्वामी बारहवें भाव में

  • विदेश योग: जन्म स्थान से दूर या विदेश में बड़ा भाग्योदय।
  • व्यय पर विजय: कर्ज और फालतू खर्चों पर लगाम लगती है।
  • उच्च पद: MNCs या इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट में बड़ी सफलता।

📈 महादशा का फल

सामान्यतः छठे भाव की दशा कष्टकारी होती है, लेकिन हर्ष राजयोग में छठे भाव के स्वामी की महादशा जातक का स्वर्ण काल (Golden Period) बन जाती है। इसमें धन, पद और प्रतिष्ठा बिना ज्यादा मेहनत के प्राप्त होते हैं।

📊 उदाहरण कुंडली (Case Study)

लग्न: कुम्भ (Aquarius) | छठा स्वामी: चन्द्रमा

  • कुम्भ लग्न में छठे भाव में 'कर्क राशि' आती है।
  • स्थिति: यदि चन्द्रमा बली होकर छठे भाव (कर्क) में ही बैठ जाए।
  • परिणाम:
    • जातक का मन बहुत मजबूत (Strong Minded) होगा।
    • उसे ननिहाल पक्ष से लाभ मिलेगा।
    • वह कर्ज लेने वाला नहीं, बल्कि लोगों को फाइनेंस (Finance) देने वाला बनेगा।
    • माता का सहयोग जीवन में तरक्की दिलाएगा।

⚠️ आवश्यक शर्तें

यह राजयोग 100% फल तभी देगा जब:

  1. लग्न बली हो: लग्नेश कमजोर नहीं होना चाहिए।
  2. अस्त न हो: ग्रह सूर्य के बहुत करीब न हो।
  3. शुभ दृष्टि: गुरु जैसे शुभ ग्रह की दृष्टि इसे और शक्तिशाली बना देती है।
"संघर्ष ही शक्ति है। हर्ष राजयोग यही सिखाता है कि कुंडली का सबसे 'बुरा' ग्रह भी आपको सबसे 'बड़ी' जीत दिला सकता है।"

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