शुकनासोपदेश: 100 प्रमुख सामासिक पद एवं विग्रह
महाकवि बाणभट्ट विरचित 'कादम्बरी' के महत्त्वपूर्ण पदों का व्याकरणिक विवेचन
| क्र. | सामासिक पद | समास विग्रह | समास का प्रकार |
|---|---|---|---|
| 1 | चन्द्रापीडः | चन्द्रः इव आपीडः (शिखाभूषणं) यस्य सः | बहुव्रीहि |
| 2 | शुकनासः | शुकस्य इव नासिका यस्य सः | बहुव्रीहि |
| 3 | विदितवेद्यस्य | विदितं वेद्यं (ज्ञातव्यं) येन तस्य | बहुव्रीहि |
| 4 | अधीतशास्त्रस्य | अधीतानि शास्त्राणि येन तस्य | बहुव्रीहि |
| 5 | गुरुपदेशः | गुरोः उपदेशः | षष्ठी तत्पुरुष |
| 6 | राजपुत्र | राज्ञः पुत्र | षष्ठी तत्पुरुष |
| 7 | शास्त्रजल | शास्त्रमेव जलम् | रूपक कर्मधारय |
| 8 | प्रक्षालननिर्मला | प्रक्षालनेन निर्मला | तृतीया तत्पुरुष |
| 9 | कालुष्यम् | कलुषस्य भावः | तद्धित (प्रत्यय) |
| 10 | अकालपलितम् | अकाले पलितम् | सप्तमी तत्पुरुष |
| 11 | स्नेहसिक्तम् | स्नेहेन सिक्तम् | तृतीया तत्पुरुष |
| 12 | अतिमलिनम् | अतिशयेन मलिनम् | प्रादि तत्पुरुष |
| 13 | दोषरूपम् | दोष एव रूपम् | रूपक कर्मधारय |
| 14 | अतिघोरम् | अतिशयेन घोरम् | प्रादि तत्पुरुष |
| 15 | विषयविष | विषयाः एव विषम् | रूपक कर्मधारय |
| 16 | मोहान्धकारम् | मोह एव अन्धकारम् | रूपक कर्मधारय |
| 17 | अभिषेकसलिलम् | अभिषेकस्य सलिलम् | षष्ठी तत्पुरुष |
| 18 | राज्यश्रीः | राज्यस्य श्रीः | षष्ठी तत्पुरुष |
| 19 | कुलक्रमागतम् | कुलक्रमेण आगतम् | तृतीया तत्पुरुष |
| 20 | पूर्वपुरुषैः | पूर्वैः पुरुषैः | कर्मधारय |
| 21 | सत्त्वनिषेधः | सत्त्वस्य निषेधः | षष्ठी तत्पुरुष |
| 22 | लक्ष्मीपदवी | लक्ष्म्याः पदवी | षष्ठी तत्पुरुष |
| 23 | दुष्टवारणाः | दुष्टाः वारणाः | कर्मधारय |
| 24 | मदोन्मत्ताः | मदेन उन्मत्ताः | तृतीया तत्पुरुष |
| 25 | तृष्णाविषम् | तृष्णा एव विषम् | रूपक कर्मधारय |
| 26 | कनकमयम् | कनकस्य विकारः | तद्धित (मयट्) |
| 27 | परप्रेरिताः | परैः प्रेरिताः | तृतीया तत्पुरुष |
| 28 | दण्डविक्षेपैः | दण्डानां विक्षेपैः | षष्ठी तत्पुरुष |
| 29 | महाकुलानि | महन्ति कुलानि | कर्मधारय |
| 30 | अतिरौद्रभूतयः | अतिरौद्रा भूतिः येषां ते | बहुव्रीहि |
| 31 | अदूरदर्शिनः | न दूरं पश्यन्ति इति | उपपद तत्पुरुष |
| 32 | प्रेतपटहाः | प्रेतस्य पटहाः | षष्ठी तत्पुरुष |
| 33 | महापातक | महन्ति पातकानि | कर्मधारय |
| 34 | आध्मातमूर्तयः | आध्माता मूर्तिः येषां ते | बहुव्रीहि |
| 35 | जलबिन्दवः | जलस्य बिन्दवः | षष्ठी तत्पुरुष |
| 36 | विषयोपभोग | विषयाणाम् उपभोगः | षष्ठी तत्पुरुष |
| 37 | मृतकल्पाः | मृताः इव | तद्धित (कल्पप्) |
| 38 | अतिसत्त्वरः | अतिशयेन सत्त्वरः | प्रादि तत्पुरुष |
| 39 | मनोरथः | मनसः रथः | षष्ठी तत्पुरुष |
| 40 | शास्त्रानुशासनम् | शास्त्रस्य अनुशासनम् | षष्ठी तत्पुरुष |
| 41 | गुरुवचनम् | गुरोः वचनम् | षष्ठी तत्पुरुष |
| 42 | अजितभृत्यतः | न जिताः भृत्याः येन सः | बहुव्रीहि |
| 43 | रसिकता | रसस्य भावः | तद्धित (तल्) |
| 44 | महापराधाः | महन्तः अपराधाः | कर्मधारय |
| 45 | महानुभावता | महान् अनुभावः यस्य | बहुव्रीहि |
| 46 | भीरुत्वम् | भीरोः भावः | तद्धित (त्व) |
| 47 | देवावमाननम् | देवानाम् अवमाननम् | षष्ठी तत्पुरुष |
| 48 | महासत्त्वता | महत् सत्त्वं येषां ते | बहुव्रीहि |
| 49 | वन्दिजनाः | वन्दिनः एव जनाः | कर्मधारय |
| 50 | तरलता | तरलस्य भावः | तद्धित (तल्) |
| 51 | अपक्षपातित्वम् | न पक्षपातः अस्य इति | बहुव्रीहि |
| 52 | गुणपक्षम् | गुणानां पक्षम् | षष्ठी तत्पुरुष |
| 53 | अमानुष | न मानुषः | नञ् तत्पुरुष |
| 54 | वित्तमदः | वित्तस्य मदः | षष्ठी तत्पुरुष |
| 55 | निश्चेतनतया | निर्गता चेतना यस्याः सा | बहुव्रीहि |
| 56 | अलीकाभिमानः | अलीकः अभिमानः | कर्मधारय |
| 57 | मर्त्यधर्माणः | मर्त्यस्य धर्माः येषां ते | बहुव्रीहि |
| 58 | दिव्यांशावतीर्णम् | दिव्येन अंशेन अवतीर्णम् | तृतीया तत्पुरुष |
| 59 | सदैवतम | सह देवतया वर्तते इति | बहुव्रीहि |
| 60 | अतिमानुषम् | मानुषम् अतिक्रान्तः | प्रादि तत्पुरुष |
| 61 | दिव्योचिता | दिव्येभ्यः उचिता | चतुर्थी तत्पुरुष |
| 62 | उपहास्यताम् | उपहास्यस्य भावः | तद्धित (तल्) |
| 63 | स्वार्थसाधना | स्वस्य अर्थः | षष्ठी तत्पुरुष |
| 64 | धनपिशित | धनमेव पिशितम् (मांसम्) | रूपक कर्मधारय |
| 65 | नलिनीबकाः | नलिन्याः बकाः | षष्ठी तत्पुरुष |
| 66 | परदाराभिगमनम् | परेषाम् दाराः (परदाराः) | षष्ठी तत्पुरुष |
| 67 | गुरुवचनावधीरणा | गुरुवचनस्य अवधीरणा | षष्ठी तत्पुरुष |
| 68 | अपरप्रणेयत्वम् | न परैः प्रणेयः | नञ् तत्पुरुष |
| 69 | प्रतार्यमाणाः | प्र + तृ + णिच् + शानच् | कृदन्त |
| 70 | अभिवादनार्हान् | अभिवादनस्य अर्हान् | षष्ठी तत्पुरुष |
| 71 | विद्वज्जनम् | विद्वान् असौ जनः | कर्मधारय |
| 72 | जरावैक्लव्यम् | जरायाः वैक्लव्यम् | षष्ठी तत्पुरुष |
| 73 | आत्मप्रज्ञा | आत्मनः प्रज्ञा | षष्ठी तत्पुरुष |
| 74 | हितवादिने | हितं वदति इति | उपपद तत्पुरुष |
| 75 | अधिदैवतम् | देवतम् अधिकृत्य इति | अव्ययीभाव |
| 76 | कौटिल्यशास्त्रम् | कौटिल्येन प्रणीतं शास्त्रम् | तृतीया तत्पुरुष |
| 77 | पुरोधसः | पुरः धीयते इति | उपपद तत्पुरुष |
| 78 | लक्ष्म्यासक्तिः | लक्ष्म्याम् आसक्तिः | सप्तमी तत्पुरुष |
| 79 | सहजप्रेमा | सहजं प्रेम | कर्मधारय |
| 80 | साम्प्रतम् | सम्प्रति + अण् | तद्धित |
| 81 | राज्यतन्त्रम् | राज्यस्य तन्त्रम् | षष्ठी तत्पुरुष |
| 82 | कुमार | कु (पापम्) मारयति इति | उपपद तत्पुरुष |
| 83 | साधुभिः | साधु + इ | कृदन्त |
| 84 | सुहृद्भिः | शोभनं हृदयं येषां ते | बहुव्रीहि |
| 85 | कुशलैः | कुशान् लाति (गृह्णाति) इति | उपपद तत्पुरुष |
| 86 | सेवकवृकैः | सेवकाः एव वृकाः (भेड़िया) | रूपक कर्मधारय |
| 87 | धूर्तैः | धूर्वन्ति इति | कृदन्त |
| 88 | मदनेन | मदयति इति | कृदन्त |
| 89 | मादयति | मद् + णिच् + शतृ | कृदन्त |
| 90 | मुखरीकृतवान् | अमुखरः मुखरः कृतः | च्वि-प्रत्यय |
| 91 | सचेतनम् | चेतन्या सहितम् | बहुव्रीहि |
| 92 | धीरः | धियं राति (ददाति) इति | उपपद तत्पुरुष |
| 93 | दुर्विनीता | दुः-विनीता | प्रादि तत्पुरुष |
| 94 | खलीकरोति | अखलं खलं करोति | च्वि-प्रत्यय |
| 95 | कल्याणैः | कल्याणम् अस्ति एषाम् | तद्धित |
| 96 | दिग्विजयः | दिशां विजयः | षष्ठी तत्पुरुष |
| 97 | सप्तद्वीप | सप्तानां द्वीपानां समाहारः | द्विगु |
| 98 | वसुन्धराम् | वसूनि (धनानि) धारयति इति | उपपद तत्पुरुष |
| 99 | त्रैलोक्यदर्शी | त्रयाणां लोकानां समाहारः | द्विगु |
| 100 | सिद्धादेशः | सिद्धः आदेशः यस्य सः | बहुव्रीहि |
