अजन्त स्त्रीलिंग: रमा, मति, नदी एवं मातृ | ajanta striling shabd roop

Sooraj Krishna Shastri
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अजन्त स्त्रीलिंग: रमा, मति, नदी एवं मातृ

संस्कृत व्याकरण के चार सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण स्त्रीलिंग शब्दरूपों की तालिका। लाल रंग में अंकित वैकल्पिक एवं विशिष्ट रूप परीक्षाओं हेतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।

१. रमा (आकारान्त स्त्रीलिंग) शब्दरूप

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा रमा रमे रमाः
द्वितीया रमाम् रमे रमाः
तृतीया रमया रमाभ्याम् रमाभिः
चतुर्थी रमायै रमाभ्याम् रमाभ्यः
पञ्चमी रमायाः रमाभ्याम् रमाभ्यः
षष्ठी रमायाः रमयोः रमाणाम्
सप्तमी रमायाम् रमयोः रमासु
सम्बोधन हे रमे! हे रमे! हे रमाः!
💡 विशेष (रमा): 'रमाणाम्' में 'न्' को 'ण्' हुआ है। लता, बालिका, सीता, गीता आदि सभी आकारान्त स्त्रीलिंग शब्द इसी प्रकार चलेंगे। ध्यान दें कि प्रथमा द्विवचन, द्वितीया द्विवचन और सम्बोधन एकवचन व द्विवचन में समान रूप (रमे) बनता है।

२. मति (इकारान्त स्त्रीलिंग) शब्दरूप

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा मतिः मती मतयः
द्वितीया मतिम् मती मतीः
तृतीया मत्या मतिभ्याम् मतिभिः
चतुर्थी मत्यै / मतये मतिभ्याम् मतिभ्यः
पञ्चमी मत्याः / मतेः मतिभ्याम् मतिभ्यः
षष्ठी मत्याः / मतेः मत्योः मतीनाम्
सप्तमी मत्याम् / मतौ मत्योः मतिषु
सम्बोधन हे मते! हे मती! हे मतयः!
💡 विशेष (मति): TGT/PGT में मति शब्द सर्वाधिक पूछा जाता है क्योंकि चतुर्थी, पञ्चमी, षष्ठी और सप्तमी के एकवचन में इसके दो-दो (वैकल्पिक) रूप बनते हैं। 'मति' नदी संज्ञक भी है और घि संज्ञक भी, इसीलिए यह विकल्प आता है। श्रुति, गति, बुद्धि, शान्ति आदि रूप ऐसे ही चलेंगे।

३. नदी (ईकारान्त स्त्रीलिंग) शब्दरूप

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा नदी नद्यौ नद्यः
द्वितीया नदीम् नद्यौ नदीः
तृतीया नद्या नदीभ्याम् नदीभिः
चतुर्थी नद्यै नदीभ्याम् नदीभ्यः
पञ्चमी नद्याः नदीभ्याम् नदीभ्यः
षष्ठी नद्याः नद्योः नदीनाम्
सप्तमी नद्याम् नद्योः नदीषु
सम्बोधन हे नदि! हे नद्यौ! हे नद्यः!
💡 विशेष (नदी - नित्य स्त्रीलिंग): 'नदी' शब्द में सबसे अधिक भ्रम सम्बोधन एकवचन में होता है। 'हे नदि!' में 'द' पर ह्रस्व (छोटी) 'इ' की मात्रा लगती है ('अम्बार्थनद्योर्ह्रस्वः' सूत्र से)। जननी, गौरी, पार्वती, पत्नी आदि रूप इसी तरह चलेंगे।

४. मातृ (ऋकारान्त स्त्रीलिंग) शब्दरूप

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा माता मातरौ मातरः
द्वितीया मातरम् मातरौ मातॄः
तृतीया मात्रा मातृभ्याम् मातृभिः
चतुर्थी मात्रे मातृभ्याम् मातृभ्यः
पञ्चमी मातुः मातृभ्याम् मातृभ्यः
षष्ठी मातुः मात्रोः मातॄणाम्
सप्तमी मातरि मात्रोः मातृषु
सम्बोधन हे मातः! हे मातरौ! हे मातरः!
💡 विशेष (मातृ): पितृ (पुँल्लिंग) और मातृ (स्त्रीलिंग) के रूप लगभग समान हैं, केवल द्वितीया बहुवचन में अंतर है। पितृ का 'पितॄन्' बनता है, जबकि मातृ का 'मातॄः' (दीर्घ ॄ और विसर्ग) बनता है। दुहितृ (पुत्री), यातृ (देवरानी) आदि के रूप इसी तरह चलेंगे।

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