नञ्-तत्पुरुष समास (Nañ-Tatpurusha Samas) – परिभाषा, सूत्र, नियम एवं उदाहरण

Sooraj Krishna Shastri
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नञ्-तत्पुरुष समास (Nañ-Tatpurusha Samas) – परिभाषा, सूत्र, नियम एवं उदाहरण

नञ् (२.२.६)

संस्कृत व्याकरण में जब 'नञ्' (न) अव्यय का किसी सुबन्त (संज्ञा या विशेषण) पद के साथ समास होता है, तो उसे नञ्-तत्पुरुष समास कहते हैं। यह निषेध (Negative) या अभाव (Absence) का बोध कराता है।

१. नञ् समास के निर्माण के दो प्रमुख नियम (V.V.Imp)

समास करते समय पूर्वपद 'न' में क्या परिवर्तन होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उत्तरपद (बाद वाला शब्द) स्वर (Vowel) से शुरू हो रहा है या व्यंजन (Consonant) से। इसके लिए पाणिनि जी ने दो महत्त्वपूर्ण सूत्र दिए हैं:

नियम १: व्यञ्जन परे होने पर 'अ' आदेश
सूत्र: नलोपो नञः (६.३.७३)
अर्थ: यदि उत्तरपद का पहला वर्ण कोई व्यंजन (Consonant) हो, तो 'नञ्' के नकार (न्) का लोप हो जाता है और केवल 'अ' शेष रहता है।
जैसे: न + ब्राह्मणः = ब्राह्मणः (यहाँ 'ब' व्यंजन है)।
नियम २: स्वर परे होने पर 'अन्' आदेश
सूत्र: तस्मान्नुडचि (६.३.७४)
अर्थ: यदि उत्तरपद का पहला वर्ण कोई स्वर (Vowel - अच्) हो, तो 'नलोपो नञः' से बचे हुए 'अ' के बाद 'नुट्' (न्) का आगम हो जाता है। अर्थात् 'न' के स्थान पर 'अन्' हो जाता है।
जैसे: न + अश्वः = अन् + अश्वः = अन्श्वः (यहाँ 'अ' स्वर है)।

२. नञ् के छः (6) अर्थ (PGT/NET Special)

प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि 'नञ्' का प्रयोग किन अर्थों में होता है। व्याकरण शास्त्र में 'नञ्' के छः अर्थ माने गए हैं, जिन्हें इस प्रसिद्ध श्लोक द्वारा समझा जा सकता है:

तत्सादृश्यमभावश्च तदन्यत्वं तदल्पता।
अप्राशस्त्यं विरोधश्च नञर्थाः षट् प्रकीर्तिताः॥

  • १. तत्सादृश्य (उसके समान): जैसे- अब्राह्मणः (ब्राह्मण के समान अन्य वर्ण, पर ब्राह्मण नहीं)।
  • २. अभाव (कमी/न होना): जैसे- अज्ञानम् (ज्ञान का अभाव)।
  • ३. तदन्यत्व (उससे भिन्न/अलग): जैसे- अश्वः (न श्वः इति अश्वः - जो कल नहीं है)।
  • ४. अल्पता (थोड़ापन): जैसे- अनुदरा कन्या (पतले/छोटे उदर वाली कन्या)।
  • ५. अप्राशस्त्य (बुरा/निन्दनीय): जैसे- अकालः (बुरा समय)।
  • ६. विरोध (उल्टा): जैसे- अधर्मः (धर्म का विरोधी), असुरः (सुर का विरोधी)।

३. नञ्-तत्पुरुष समास की विस्तृत उदाहरणावली

नीचे दी गई तालिकाओं में व्यंजन और स्वर से शुरू होने वाले शब्दों के आधार पर नञ्-तत्पुरुष के महत्वपूर्ण उदाहरण दिए गए हैं:

(क) व्यञ्जन से प्रारम्भ होने वाले शब्द ('न' का 'अ' होना)

क्र० समास विग्रह (न + पद) समस्त पद हिन्दी अर्थ
न सत्यम्असत्यम्जो सत्य न हो (झूठ)
न धर्मःअधर्मःधर्म का अभाव / पाप
न ब्राह्मणःअब्राह्मणःजो ब्राह्मण न हो
न सिद्धःअसिद्धःजो सिद्ध (पूर्ण) न हो
न ज्ञानम्अज्ञानम्ज्ञान का अभाव
न कालःअकालःबुरा समय / असमय
न चलम्अचलम्जो चले नहीं (पर्वत/स्थिर)
न दृश्यम्अदृश्यम्जो दिखाई न दे

(ख) स्वर (Vowel) से प्रारम्भ होने वाले शब्द ('न' का 'अन्' होना)

क्र० समास विग्रह (न + पद) समस्त पद हिन्दी अर्थ
न अश्वःअनश्वःजो घोड़ा न हो (खच्चर आदि)
न आगतःअनागतःजो आया न हो
न इच्छाअनिच्छाइच्छा का अभाव
न उपस्थितःअनुपस्थितःजो उपस्थित न हो
न आर्यःअनार्यःजो आर्य (श्रेष्ठ) न हो
न ईश्वरःअनीश्वरःईश्वर का अभाव / जो ईश्वर न हो
न आवश्यकम्अनावश्यकम्जिसकी आवश्यकता न हो
न उक्तम्अनुक्तम्जो कहा न गया हो
⚠️ विशेष ध्यान दें: नञ्-तत्पुरुष समास में यदि अंतिम पद कोई संज्ञा है तो वह विशेषण बन जाता है और वाक्य के मुख्य पद के अनुसार लिंग ग्रहण करता है (जैसे: अब्राह्मणः पुरुषः, अब्राह्मणी स्त्री)।
॥ इति नञ्-तत्पुरुष-समास-प्रकरणम् सम्पूर्णम् ॥

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