अव्यय प्रकरण - परिभाषा, सूत्र, भेद एवं उदाहरण (संस्कृत व्याकरण)

Sooraj Krishna Shastri
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अव्यय प्रकरणम् (विस्तृत अध्ययन)

सदृशं त्रिषु लिङ्गेषु सर्वासु च विभक्तिषु ।
वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्येति तदव्ययम् ॥

भावार्थ: जो शब्द तीनों लिंगों (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग), सातों विभक्तियों और तीनों वचनों (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) में एक समान रहते हैं, जिनके मूल रूप में कभी कोई विकार या परिवर्तन (व्यय) नहीं होता, उन्हें व्याकरण शास्त्र में अव्यय कहा जाता है।

अव्यय विधायक प्रमुख पाणिनीय सूत्र

पाणिनीय अष्टाध्यायी में अव्यय संज्ञा करने वाले मुख्य रूप से पाँच सूत्र हैं। टीजीटी और पीजीटी जैसी परीक्षाओं में सीधे इन सूत्रों से प्रश्न पूछे जाते हैं। आइए इनका सोदाहरण विस्तार से अध्ययन करें:

१. स्वरादिगण और निपात

सूत्र: स्वरादिनिपातमव्ययम् (१.१.३७)

व्याख्या: 'स्वर्' आदि गण (समूह) में पढ़े गए शब्दों की तथा 'चादि' गण में पठित 'निपात' शब्दों की अव्यय संज्ञा होती है।

स्वरादि गण के प्रमुख अव्यय:
स्वर् (स्वर्ग), अन्तर् (बीच में), प्रातर् (सुबह), पुनर् (फिर), उच्चैः (जोर से), नीचैः (नीचे), शनैः (धीरे), ऋते (बिना), युगपत् (एक साथ), आरात् (समीप/दूर), पृथक् (अलग), ह्यः (बीता हुआ कल), श्वः (आने वाला कल), दिवा (दिन में), रात्रौ (रात में), सायं (शाम को), चिरम् (देर तक), ईषत् (थोड़ा)।
निपात (चादि गण) के प्रमुख अव्यय:
च (और), वा (या), ह (निश्चय), अह (सम्बोधन), एव (ही), एवम् (इस प्रकार), नूनम् (निश्चय ही), शश्वत् (निरन्तर), खलु (निश्चय ही), किल (सुना जाता है), अथ (इसके बाद), मा (मत-निषेध), स्म (भूतकाल बोधक)।

२. तद्धितान्त अव्यय

सूत्र: तद्धितश्चासर्वविभक्तिः (१.१.३८)

व्याख्या: ऐसे तद्धित प्रत्ययान्त शब्द (जो संज्ञा, सर्वनाम आदि में लगते हैं), जिनके रूप सभी विभक्तियों में नहीं चलते हैं, वे भी अव्यय कहलाते हैं।

तस् (तसिल्) प्रत्यय (पंचमी के अर्थ में):
अतः (यहाँ से), ततः (वहाँ से), यतः (जहाँ से), कुतः (कहाँ से), सर्वतः (सब ओर से), अभितः (दोनों ओर), परितः (चारों ओर)।
त्र (त्रल्) प्रत्यय (सप्तमी के अर्थ में):
अत्र (यहाँ), तत्र (वहाँ), यत्र (जहाँ), कुत्र (कहाँ), सर्वत्र (सब जगह), एकत्र (एक जगह), अन्यत्र (दूसरी जगह)।
दा / दानीम् प्रत्यय (काल अर्थ में):
यदा (जब), तदा (तब), कदा (कब), सर्वदा (हमेशा), एकदा (एक बार), इदानीम् (इस समय), तदानीम् (उस समय)।
था / शस् / धा प्रत्यय:
था: तथा (वैसे), यथा (जैसे), सर्वथा, अन्यथा।
शस्: अल्पशः (थोड़ा-थोड़ा), बहुशः, क्रमशः।
धा: एकधा (एक प्रकार से), बहुधा, शतधा।

३. कृदन्त अव्यय (मान्त और एजन्त)

सूत्र: कृन्मेजन्तः (१.१.३९)

व्याख्या: ऐसे कृदन्त शब्द (धातुओं में लगने वाले प्रत्यय) जिनके अन्त में 'म्' हो (मान्त) अथवा जो एजन्त (ए, ओ, ऐ, औ) हों, वे अव्यय होते हैं।

तुमुन् प्रत्यय (मान्त):
गन्तुम् (जाने के लिए), पातुम् (पीने के लिए), पठितुम् (पढ़ने के लिए), भवितुम् (होने के लिए), हसितुम् (हँसने के लिए), क्रेतुम् (खरीदने के लिए), दातुम् (देने के लिए)।
णमुल् प्रत्यय (मान्त):
स्मारं स्मारम् (याद कर-करके), पायं पायम् (पी-पीकर), श्रावं श्रावम् (सुन-सुनकर), भोजं भोजम् (खा-खाकर)।

४. क्त्वा, तोसुन् और कसुन् प्रत्ययान्त

सूत्र: क्त्वातोसुन्कसुनाः (१.१.४०)

व्याख्या: जिन शब्दों के अन्त में 'क्त्वा' (या उसके स्थान पर होने वाला 'ल्यप्'), 'तोसुन्' और 'कसुन्' प्रत्यय लगे हों, वे कृदन्त शब्द भी अव्यय होते हैं।

क्त्वा प्रत्यय (करके अर्थ में):
गत्वा (जाकर), पठित्वा (पढ़कर), लिखित्वा (लिखकर), श्रुत्वा (सुनकर), पीत्वा (पीकर), भुक्त्वा (खाकर), कृत्वा (करके), ज्ञात्वा (जानकर)।
ल्यप् प्रत्यय (उपसर्ग + धातु + ल्यप्):
आगत्य (आकर), विहस्य (हँसकर), प्रदाय (देकर), उत्थाय (उठकर), प्रणम्य (प्रणाम करके), विज्ञाप्य (निवेदन करके), अनुभूय (अनुभव करके)।

५. अव्ययीभाव समास

सूत्र: अव्ययीभावश्च (१.१.४१)

व्याख्या: अव्ययीभाव समास के द्वारा बने हुए समस्त पद भी अव्यय हो जाते हैं। अर्थात वाक्य में प्रयुक्त होने पर उनके रूप नहीं बदलते, वे सदैव नपुंसकलिंग एकवचन की तरह ही दिखते हैं।

प्रमुख उदाहरण:
यथाशक्ति (शक्ति के अनुसार), प्रतिदिनम् (हर दिन), उपगङ्गम् (गंगा के समीप), निर्विघ्नम् (विघ्नों का अभाव), अनुहरि (हरि के पीछे), आधिहरि (हरि में), सहरि (हरि के साथ), अनुरूपम् (रूप के योग्य)।

अर्थ के आधार पर अव्ययों का वर्गीकरण

१. कालवाचक (समय)

अद्य, श्वः, ह्यः, परश्वः, इदानीम्, सम्प्रति, साम्प्रतम्, अधुना, यदा, तदा, कदा, सर्वदा, एकदा, मुहुः (बार-बार), अचिरात् (शीघ्र)।

२. स्थानवाचक (जगह)

अत्र, तत्र, कुत्र, सर्वत्र, अन्यत्र, उपरि (ऊपर), अधः (नीचे), अन्तः (अन्दर), बहिः (बाहर), निकषा (समीप), समया (समीप)।

३. रीतिवाचक (ढंग)

यथा, तथा, कथम्, एवम्, नूनम्, सहसा (अचानक), अकस्मात्, शनैः (धीरे), उच्चैः, नीचैः, तूष्णीम् (चुपचाप), वृथा (व्यर्थ)।

४. प्रश्न एवं संयोजक

प्रश्न: किम्, कुतः, किमर्थम्, कति।
संयोजक: च (और), अपि (भी), वा (या), अथवा, तु (तो), किञ्च, परन्तु, तर्हि (तो)।

परीक्षापयोगी 30+ महत्वपूर्ण अव्यय एवं वाक्य प्रयोग

अव्यय पद हिन्दी अर्थ वाक्य प्रयोग (संस्कृत एवं हिन्दी)
अद्यआज (Today)अद्य रविवारः अस्ति। (आज रविवार है।)
ह्यःबीता हुआ कल (Yesterday)ह्यः सः ग्रामम् अगच्छत्। (कल वह गाँव गया था।)
श्वःआने वाला कल (Tomorrow)श्वः अहं विद्यालयं गमिष्यामि। (कल मैं विद्यालय जाऊँगा।)
परश्वःपरसों (Day after tomorrow)परश्वः मम परीक्षा अस्ति। (परसों मेरी परीक्षा है।)
सहसाअचानक (Suddenly)सहसा विदधीत न क्रियाम्। (अचानक/बिना सोचे-समझे कार्य नहीं करना चाहिए।)
वृथाबेकार / व्यर्थ (Useless)वृथा समयं मा यापय। (समय व्यर्थ मत बिताओ।)
इदानीम् / सम्प्रति / अधुनाअब / इस समय (Now)इदानीम् अहं पठामि। (इस समय मैं पढ़ रहा हूँ।)
शीघ्रम् / सत्वरम्जल्दी (Quickly)सत्वरं कार्यं कुरु। (जल्दी काम करो।)
सर्वत्रसभी जगह (Everywhere)ईश्वरः सर्वत्र अस्ति। (ईश्वर सभी जगह है।)
धिक्धिक्कार (Fie upon)धिक् दुर्जनम्। (दुर्जन को धिक्कार है - यहाँ द्वितीया विभक्ति आती है।)
विना / ऋतेबिना (Without)जलं विना जीवनं नास्ति। (जल के बिना जीवन नहीं है।)
उच्चैःजोर से / ऊँचा (Loudly/High)सिंहः उच्चैः गर्जति। (शेर जोर से दहाड़ता है।)
नीचैःनीचे / धीरे (Below/Low)जलप्रपातः नीचैः पतति। (झरना नीचे गिरता है।)
शनैः शनैःधीरे-धीरे (Slowly)कच्छपः शनैः शनैः चलति। (कछुआ धीरे-धीरे चलता है।)
तूष्णीम्चुपचाप (Silently)सः तूष्णीम् अतिष्ठत्। (वह चुपचाप बैठ गया।)
बहिःबाहर (Outside)ग्रामात् बहिः वनम् अस्ति। (गाँव के बाहर जंगल है - यहाँ पंचमी आती है।)
मुहुः मुहुःबार-बार (Again and again)रोगी मुहुः मुहुः जलं पिबति। (रोगी बार-बार पानी पीता है।)
यदा... तदाजब... तब (When... Then)यदा मेघाः गर्जन्ति, तदा मयूराः नृत्यन्ति। (जब बादल गरजते हैं, तब मोर नाचते हैं।)
यथा... तथाजैसे... वैसे (As... So)यथा राजा, तथा प्रजा। (जैसी राजा, वैसी प्रजा।)
यावत्... तावत्जब तक... तब तक (As long as... Till then)यावत् जीवनं तावत् संघर्षः। (जब तक जीवन है, तब तक संघर्ष है।)
खलुनिश्चय ही (Certainly)सः खलु विद्द्वान् अस्ति। (वह निश्चय ही विद्वान है।)
किलसुना जाता है (Indeed/It is heard)रामः किल अयोध्यायाः राजा आसीत्। (सुना जाता है राम अयोध्या के राजा थे।)
अपिभी (Also/Even)अहम् अपि गमिष्यामि। (मैं भी जाऊँगा।)
एवही (Only)त्वम् एव मम मित्रम् असि। (तुम ही मेरे मित्र हो।)
मा / अलम्मत (पर्याप्त/निषेध) (Don't/Enough)अलम् विवादेन। (विवाद मत करो - यहाँ तृतीया आती है।)
अथइसके बाद / आरम्भ (Then/Start)अथ कथा आरभ्यते। (अब कथा आरम्भ होती है।)
इतिसमाप्ति / ऐसा (End/Thus)इति अव्ययप्रकरणम्। (इस प्रकार अव्यय प्रकरण समाप्त हुआ।)
किन्तु / परन्तुलेकिन (But)सः निर्धनः किन्तु ईमानदारः अस्ति। (वह गरीब है लेकिन ईमानदार है।)
चेत् / यदियदि / अगर (If)यदि वर्षा भविष्यति तर्हि कृषकाः प्रसन्नाः भविष्यन्ति। (यदि वर्षा होगी तो किसान प्रसन्न होंगे।)
चिरम् / चिरेणदेर तक / बहुत समय (For a long time)सः चिरम् अपठत्। (उसने देर तक पढ़ा।)
॥ इति अव्यय प्रकरणम् सविस्तारं सम्पूर्णम् ॥

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