वाच्य प्रकरणम् (वाच्य परिवर्तन) - विस्तृत अध्ययन
सूत्र: लः कर्मणि च भावे चाकर्मकेभ्यः (३.४.६९)
परिभाषा: वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव में से किसकी प्रधानता है, इसका बोध कराने वाली क्रिया के रूप को वाच्य (Voice) कहते हैं। अष्टाध्यायी के सूत्र 'लः कर्मणि च भावे चाकर्मकेभ्यः' के अनुसार सकर्मक धातुओं से लकार (क्रिया) कर्ता और कर्म अर्थ में होते हैं, तथा अकर्मक धातुओं से लकार कर्ता और भाव अर्थ में होते हैं।
१. कर्तृवाच्य (Active Voice)
नियम: कर्ता में प्रथमा, कर्म में द्वितीया, क्रिया कर्ता के अनुसार।
Trick: 1-2-1 का नियम
सूत्र - स्वतन्त्रः कर्ता (१.४.५४): क्रिया को करने में जो स्वतन्त्र होता है, वह कर्ता है। कर्तृवाच्य में कर्ता प्रधान होता है, अतः कर्ता में प्रथमा विभक्ति और कर्म में द्वितीया विभक्ति होती है। क्रिया का पुरुष और वचन कर्ता के अनुसार बदलता है।

| क्र० | कर्तृवाच्य वाक्य (संस्कृत) | हिन्दी अर्थ |
| १. | रामः पुस्तकं पठति। | राम पुस्तक पढ़ता है। |
| २. | सः ग्रामं गच्छति। | वह गाँव जाता है। |
| ३. | त्वं पत्रं लिखसि। | तुम पत्र लिखते हो। |
| ४. | अहं जलं पिबामि। | मैं जल पीता हूँ। |
| ५. | सीता गीतं गायति। | सीता गीत गाती है। |
| ६. | वयं नाटकं पश्यामः। | हम सब नाटक देखते हैं। |
| ७. | ते श्लोकान् पठन्ति। | वे सब श्लोकों को पढ़ते हैं। |
| ८. | छात्रौ गुरुं नमतः। | दो छात्र गुरु को नमस्कार करते हैं। |
| ९. | कृषकः क्षेत्रं कर्षति। | किसान खेत जोतता है। |
| १०. | माता भोजनं पचति। | माता भोजन पकाती है। |
| ११. | भवान् किं करोति? | आप क्या करते हैं? |
| १२. | सा वस्त्रं सीव्यति। | वह (स्त्री) वस्त्र सीलती है। |
| १३. | बालकः दुग्धं पिबति। | बालक दूध पीता है। |
| १४. | नृपः निर्धनाय धनं यच्छति। | राजा गरीब को धन देता है। |
| १५. | वानरः फलं खादति। | बंदर फल खाता है। |
| १६. | सैनिकाः देशं रक्षन्ति। | सैनिक देश की रक्षा करते हैं। |
| १७. | छात्रः प्रश्नं पृच्छति। | छात्र प्रश्न पूछता है। |
| १८. | अहं त्वां पश्यामि। | मैं तुम्हें देखता हूँ। |
| १९. | युवां कार्यं कुरुथः। | तुम दोनों कार्य करते हो। |
| २०. | शिक्षकः पाठं पाठयति। | शिक्षक पाठ पढ़ाता है। |
२. कर्मवाच्य (Passive Voice)
नियम: कर्ता में तृतीया, कर्म में प्रथमा, क्रिया कर्म के अनुसार।
Trick: 3-1-1 का नियम
सूत्र - सार्वधातुके यक् (३.१.६७): कर्मवाच्य में कर्म प्रधान होता है, इसलिए कर्म में प्रथमा और कर्ता अनुक्त होने से उसमें तृतीया विभक्ति (कर्तृकरणयोस्तृतीया) होती है। धातु में 'यक्' (य) प्रत्यय जुड़ता है और रूप आत्मनेपदी (ते, इते, अन्ते) में चलते हैं। क्रिया कर्म के पुरुष और वचन का अनुसरण करती है।
| क्र० | कर्मवाच्य वाक्य (संस्कृत) | विशेष विवरण (कर्म के अनुसार क्रिया) |
| १. | रामेण पुस्तकं पठ्यते। | 'पुस्तकं' (नपुं. एकवचन), अतः 'पठ्यते'। |
| २. | तेन ग्रामः गम्यते। | 'ग्रामः' (पुल्लिंग एकवचन), अतः 'गम्यते'। |
| ३. | त्वया पत्रं लिख्यते। | तुम्हारे द्वारा पत्र लिखा जाता है। |
| ४. | मया जलं पीयते। | 'पा' धातु को 'पी' आदेश (पीयते)। |
| ५. | सीतया गीतं गीयते। | 'गै' धातु को 'गी' आदेश (गीयते)। |
| ६. | अस्माभिः नाटकं दृश्यते। | 'दृश्' धातु का 'दृश्यते' रूप बनता है। |
| ७. | तैः श्लोकाः पठ्यन्ते। | 'श्लोकाः' (बहुवचन), अतः क्रिया भी बहुवचन 'पठ्यन्ते'। |
| ८. | छात्राभ्यां गुरुः नम्यते। | 'गुरुः' (एकवचन), अतः 'नम्यते'। |
| ९. | कृषकेण क्षेत्रं कृष्यते। | किसान के द्वारा खेत जोता जाता है। |
| १०. | मात्रा भोजनं पच्यते। | माता के द्वारा भोजन पकाया जाता है। |
| ११. | भवता किं क्रियते? | 'कृ' धातु का 'क्रियते' रूप बनता है। |
| १२. | तया वस्त्रं सीव्यते। | उसके (स्त्री) द्वारा वस्त्र सिला जाता है। |
| १३. | बालकेन दुग्धं पीयते। | बालक के द्वारा दूध पिया जाता है। |
| १४. | नृपेण धनं दीयते। | 'दा' धातु को 'दी' आदेश (दीयते)। |
| १५. | वानरेण फलं खाद्यते। | बंदर के द्वारा फल खाया जाता है। |
| १६. | सैनिकैः देशः रक्ष्यते। | 'देशः' (प्रथमा), अतः 'रक्ष्यते'। |
| १७. | छात्रेण प्रश्नः पृच्छ्यते। | 'प्रच्छ्' धातु का 'पृच्छ्यते' होता है। |
| १८. | मया त्वं दृश्यसे। | महत्वपूर्ण: 'त्वं' (मध्यम पुरुष), अतः 'दृश्यसे'। |
| १९. | युवाभ्यां कार्यं क्रियते। | तुम दोनों के द्वारा कार्य किया जाता है। |
| २०. | शिक्षकेण पाठः पाठ्यते। | शिक्षक के द्वारा पाठ पढ़ाया जाता है। |
३. भाववाच्य (Impersonal Voice)
नियम: कर्ता में तृतीया, कर्म का अभाव, क्रिया सदैव प्रथम पुरुष एकवचन।
Trick: 3-0-1 का नियम
भाववाच्य केवल अकर्मक धातुओं (लज्जा, सत्ता, स्थिति, जागरण, वृद्धि, क्षय, भय, जीवित, मरण आदि) में होता है। इसमें कर्म नहीं होता है। कर्ता में तृतीया विभक्ति होती है और क्रिया सदैव प्रथम पुरुष, एकवचन, आत्मनेपदी में ही प्रयुक्त होती है, चाहे कर्ता किसी भी वचन का क्यों न हो।
| क्र० | भाववाच्य वाक्य (संस्कृत) | कर्तृवाच्य का मूल रूप (संदर्भ हेतु) |
| १. | तेन हस्यते। (उसके द्वारा हँसा जाता है) | सः हसति। |
| २. | मया सुप्यते। (मेरे द्वारा सोया जाता है) | अहं स्वपिमि / शये। |
| ३. | त्वया स्थीयते। (तुम्हारे द्वारा ठहरा जाता है) | त्वं तिष्ठसि। |
| ४. | बालकेन रुद्यते। (बालक के द्वारा रोया जाता है) | बालकः रोदिति। |
| ५. | सीतया लज्ज्यते। (सीता द्वारा लजाया जाता है) | सीता लज्जते। |
| ६. | अस्माभिः जीव्यते। (हमारे द्वारा जिया जाता है) | वयं जीवामः। |
| ७. | रामेण भूयते। (राम के द्वारा हुआ जाता है) | रामः भवति। |
| ८. | शिशुना शय्यते। (शिशु द्वारा सोया जाता है) | शिशुः शेते। |
| ९. | छात्रैः क्रीड्यते। (छात्रों द्वारा खेला जाता है) | छात्राः क्रीडन्ति। (ध्यान दें: कर्ता बहुवचन है, फिर भी क्रिया एकवचन 'क्रीड्यते') |
| १०. | मुनिना तप्यते। (मुनि द्वारा तप किया जाता है) | मुनिः तप्यति। |
| ११. | अश्वाभ्यां धाव्यते। (दो घोड़ों द्वारा दौड़ा जाता है) | अश्वौ धावतः। |
| १२. | कुक्कुरेण भष्यते। (कुत्ते द्वारा भौंका जाता है) | कुक्कुरः भषति। |
| १३. | पक्षिभिः उड्डीयते। (पक्षियों द्वारा उड़ा जाता है) | पक्षिणः उड्डीयन्ते। |
| १४. | वृक्षेण वर्ध्यते। (वृक्ष द्वारा बढ़ा जाता है) | वृक्षः वर्धते। |
| १५. | जलेन स्रव्यते। (जल द्वारा बहा जाता है) | जलं स्रवति। |
| १६. | तया नृत्यते। (उसके द्वारा नाचा जाता है) | सा नृत्यति। |
| १७. | मया कम्प्यते। (मेरे द्वारा काँपा जाता है) | अहं कम्पामि। |
| १८. | तैः म्रियते। (उनके द्वारा मरा जाता है) | ते म्रियन्ते। |
| १९. | बालिकाभ्यां जागृयते। (दो बालिकाओं द्वारा जागा जाता है) | बालिके जागृतः। |
| २०. | भवता उपविश्यते। (आपके द्वारा बैठा जाता है) | भवान् उपविशति। |
वाच्य परिवर्तन का पारस्परिक अभ्यास
तीनों वाच्यों (कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य) का एक-दूसरे में परिवर्तन संस्कृत व्याकरण का सबसे महत्वपूर्ण अभ्यास है। नीचे दी गई तालिकाओं में प्रत्येक प्रकार के परिवर्तन के १०-१० उदाहरण दिए गए हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
१. कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में परिवर्तन (Active to Passive)
नियम: कर्ता को तृतीया में, कर्म को प्रथमा में बदलें, और क्रिया कर्म के वचन व पुरुष के अनुसार (यक् प्रत्यय लगाकर) रखें। (1-2-1 से 3-1-1)
| क्र० | कर्तृवाच्य (कर्ता प्रधान) | कर्मवाच्य (कर्म प्रधान) |
| १. | रामः पत्रं लिखति। | रामेण पत्रं लिख्यते। |
| २. | अहं त्वां पश्यामि। | मया त्वं दृश्यसे। |
| ३. | वयं श्लोकान् पठामः। | अस्माभिः श्लोकाः पठ्यन्ते। |
| ४. | सा भोजनं पचति। | तया भोजनं पच्यते। |
| ५. | त्वं जलं पिबसि। | त्वया जलं पीयते। |
| ६. | शिक्षकः छात्रान् पाठयति। | शिक्षकेण छात्राः पाठ्यन्ते। |
| ७. | कृषकः क्षेत्रं कर्षति। | कृषकेण क्षेत्रं कृष्यते। |
| ८. | बालकः चन्द्रं पश्यति। | बालकेन चन्द्रः दृश्यते। |
| ९. | अहं कथां शृणोमि। | मया कथा श्रूयते। |
| १०. | ते कार्यं कुर्वन्ति। | तैः कार्यं क्रियते। |
२. कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य में परिवर्तन (Passive to Active)
नियम: कर्ता को वापस प्रथमा में, कर्म को द्वितीया में लाएँ, और क्रिया को कर्ता के अनुसार परस्मैपदी/आत्मनेपदी में रखें। (3-1-1 से 1-2-1)
| क्र० | कर्मवाच्य (कर्म प्रधान) | कर्तृवाच्य (कर्ता प्रधान) |
| १. | सीतया गीतं गीयते। | सीता गीतं गायति। |
| २. | मया विद्यालयः गम्यते। | अहं विद्यालयं गच्छामि। |
| ३. | त्वया सत्यं कथ्यते। | त्वं सत्यं कथयसि। |
| ४. | अस्माभिः नाटकं दृश्यते। | वयं नाटकं पश्यामः। |
| ५. | मुनिना तपः क्रियते। | मुनिः तपः करोति। |
| ६. | नृपेण धनं दीयते। | नृपः धनं ददाति। |
| ७. | बालकेन ग्रन्थः पठ्यते। | बालकः ग्रन्थं पठति। |
| ८. | छात्रैः प्रश्नाः पृच्छ्यन्ते। | छात्राः प्रश्नान् पृच्छन्ति। |
| ९. | तया फलानि खाद्यन्ते। | सा फलानि खादति। |
| १०. | युष्माभिः चित्राणि दृश्यन्ते। | यूयं चित्राणि पश्यथ। |
३. कर्मवाच्य से भाववाच्य में परिवर्तन
व्याकरणिक नियम: भाववाच्य अकर्मक होता है। इसलिए कर्मवाच्य को भाववाच्य में बदलने के लिए वाक्य से 'कर्म' (Object) को हटाना पड़ता है। कर्म हटते ही क्रिया स्वतः प्रथम पुरुष एकवचन में बदल जाएगी।
| क्र० | कर्मवाच्य (सकर्मक) | भाववाच्य (कर्म रहित) |
| १. | रामेण ग्रन्थः पठ्यते। | रामेण पठ्यते। |
| २. | मया पत्रं लिख्यते। | मया लिख्यते। |
| ३. | त्वया जलं पीयते। | त्वया पीयते। |
| ४. | सीतया गीतं गीयते। | सीतया गीयते। |
| ५. | अस्माभिः नाटकं दृश्यते। | अस्माभिः दृश्यते। |
| ६. | बालकेन फलं खाद्यते। | बालकेन खाद्यते। |
| ७. | तेन ग्रामः गम्यते। | तेन गम्यते। |
| ८. | छात्रैः प्रश्नाः पृच्छ्यन्ते। | छात्रैः पृच्छ्यते। (क्रिया एकवचन हो गई) |
| ९. | तया कथा श्रूयते। | तया श्रूयते। |
| १०. | कृषकेण क्षेत्रं कृष्यते। | कृषकेण कृष्यते। |
४. भाववाच्य से कर्मवाच्य में परिवर्तन
व्याकरणिक नियम: चूँकि भाववाच्य में कर्म नहीं होता, अतः इसे कर्मवाच्य बनाने के लिए हमें वाक्य के अर्थानुसार एक 'कर्म' (Object) को प्रथमा विभक्ति में जोड़ना पड़ेगा। तभी वह कर्मवाच्य कहलाएगा।
| क्र० | भाववाच्य (कर्म रहित) | कर्मवाच्य (नया कर्म जोड़ने पर) |
| १. | रामेण पठ्यते। | रामेण वेदः पठ्यते। |
| २. | मया लिख्यते। | मया लेखः लिख्यते। |
| ३. | त्वया पीयते। | त्वया दुग्धं पीयते। |
| ४. | अस्माभिः दृश्यते। | अस्माभिः चलचित्रं दृश्यते। |
| ५. | छात्रेण पृच्छ्यते। | छात्रेण प्रश्नः पृच्छ्यते। |
| ६. | सीतया गीयते। | सीतया भजनं गीयते। |
| ७. | बालकेन खाद्यते। | बालकेन मिष्ठान्नं खाद्यते। |
| ८. | तेन गम्यते। | तेन आपणः गम्यते। (आपणः = बाज़ार) |
| ९. | तया क्रियते। | तया कार्यं क्रियते। |
| १०. | मुनिना श्रूयते। | मुनिना प्रवचनं श्रूयते। |
५. भाववाच्य से कर्तृवाच्य में परिवर्तन
नियम: कर्ता की तृतीया विभक्ति को प्रथमा में बदलें, और क्रिया को कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार (परस्मैपदी में) बदल दें। (कर्म न होने के कारण यह अकर्मक कर्तृवाच्य बनेगा)
| क्र० | भाववाच्य (भाव प्रधान) | कर्तृवाच्य (कर्ता प्रधान - अकर्मक) |
| १. | तेन हस्यते। | सः हसति। |
| २. | मया सुप्यते। | अहं स्वपिमि। |
| ३. | त्वया स्थीयते। | त्वं तिष्ठसि। |
| ४. | बालकेन रुद्यते। | बालकः रोदिति। |
| ५. | सीतया लज्ज्यते। | सीता लज्जते। |
| ६. | अस्माभिः जीव्यते। | वयं जीवामः। |
| ७. | छात्रैः क्रीड्यते। | छात्राः क्रीडन्ति। |
| ८. | शिशुना शय्यते। | शिशुः शेते। |
| ९. | तया नृत्यते। | सा नृत्यति। |
| १०. | पक्षिभिः उड्डीयते। | पक्षिणः उड्डीयन्ते। |
६. कर्तृवाच्य से भाववाच्य में परिवर्तन
नियम: अकर्मक कर्तृवाच्य वाक्यों में कर्ता को तृतीया में बदलें और क्रिया हमेशा प्रथम पुरुष एकवचन (आत्मनेपदी) में रखें।
| क्र० | कर्तृवाच्य (अकर्मक) | भाववाच्य (भाव प्रधान) |
| १. | रामः हसति। | रामेण हस्यते। |
| २. | अहं तिष्ठामि। | मया स्थीयते। |
| ३. | त्वं रोदिषि। | त्वया रुद्यते। |
| ४. | वयं जीवामः। | अस्माभिः जीव्यते। |
| ५. | बालकः शेते। | बालकेन शय्यते। |
| ६. | सा नृत्यति। | तया नृत्यते। |
| ७. | छात्राः क्रीडन्ति। | छात्रैः क्रीड्यते। (ध्यान दें: क्रिया एकवचन ही रहेगी) |
| ८. | मुनिः तप्यति। | मुनिना तप्यते। |
| ९. | अश्वौ धावतः। | अश्वाभ्यां धाव्यते। |
| १०. | शिशुः स्वपिति। | शिशुना सुप्यते। |
॥ इति वाच्य-परिवर्तन-प्रकरणम् (विस्तृत-उदाहरण-सहितम्) सम्पूर्णम् ॥