सर्वनाम शब्दरूप: अस्मद्, युष्मद् एवं तद् | sarvnaam Shabd roop

Sooraj Krishna Shastri
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सर्वनाम शब्दरूप: अस्मद्, युष्मद् एवं तद्

संस्कृत अनुवाद की धुरी: सर्वनामों की सूत्रबद्ध सिद्धि प्रक्रिया और उनके अत्यंत महत्त्वपूर्ण वैकल्पिक रूपों की तालिका।

सर्वनाम शब्दरूपों की सिद्धि प्रक्रिया (TGT/PGT Special)

सर्वनाम शब्द 'राम' (संज्ञा) से अलग कैसे चलते हैं?

सर्वनाम शब्दों (तद्, सर्व, यद् आदि) में राम की तरह रामाय, रामात्, रामे नहीं बनता, बल्कि इनमें कुछ विशेष सूत्रों से परिवर्तन आते हैं:

  • चतुर्थी एकवचन: 'सर्वनाम्नः स्मै' (७.१.१४) सूत्र से 'ङे' के स्थान पर 'स्मै' जुड़ता है। (तद् + ङे ➔ तस्मै)।
  • पञ्चमी व सप्तमी एकवचन: 'ङसिङ्योः स्मात्स्मिनौ' (७.१.१५) सूत्र से ङसि को 'स्मात्' और ङि को 'स्मिन्' होता है। (तद् ➔ तस्मात्, तस्मिन्)।
  • षष्ठी बहुवचन: 'आमि सर्वनाम्नः सुट्' (७.१.५२) सूत्र से 'आम्' से पहले 'सुट्' (स्) का आगम होता है। (ते + साम् ➔ तेषाम्)।
  • सम्बोधन का अभाव: सर्वनाम शब्दों में कभी सम्बोधन (Vocative) नहीं होता है (हे अहम्, हे सः आदि का प्रयोग नहीं होता)।

१. अस्मद् (मैं / हम) - तीनों लिंगों में समान

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा अहम् आवाम् वयम्
द्वितीया माम् (मा) आवाम् (नौ) अस्मान् (नः)
तृतीया मया आवाभ्याम् अस्माभिः
चतुर्थी मह्यम् (मे) आवाभ्याम् (नौ) अस्मभ्यम् (नः)
पञ्चमी मत् आवाभ्याम् अस्मत्
षष्ठी मम (मे) आवयोः (नौ) अस्माकम् (नः)
सप्तमी मयि आवयोः अस्मासु
💡 विशेष (अस्मद्): द्वितीया, चतुर्थी और षष्ठी विभक्तियों में विकल्प से मा/मे, नौ, नः रूप बनते हैं। 'नौ' और 'नः' तीनों स्थानों पर एक समान होते हैं। अस्मद् और युष्मद् के रूप पुँल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग तीनों में एक समान चलते हैं।

२. युष्मद् (तुम) - तीनों लिंगों में समान

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा त्वम् युवाम् यूयम्
द्वितीया त्वाम् (त्वा) युवाम् (वाम्) युष्मान् (वः)
तृतीया त्वया युवाभ्याम् युष्माभिः
चतुर्थी तुभ्यम् (ते) युवाभ्याम् (वाम्) युष्मभ्यम् (वः)
पञ्चमी त्वत् युवाभ्याम् युष्मत्
षष्ठी तव (ते) युवयोः (वाम्) युष्माकम् (वः)
सप्तमी त्वयि युवयोः युष्मासु
💡 विशेष (युष्मद्): अस्मद् की तरह इसमें भी द्वितीया, चतुर्थी और षष्ठी में त्वा/ते, वाम्, वः वैकल्पिक रूप बनते हैं। परीक्षाओं में अनुवाद देते समय "यह तुम्हारी पुस्तक है" को "इयं ते पुस्तकम्" लिखा जाता है, जहाँ 'ते' षष्ठी का वैकल्पिक रूप है।

३. तद् (वह) - पुँल्लिंग शब्दरूप

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा सः तौ ते
द्वितीया तम् तौ तान्
तृतीया तेन ताभ्याम् तैः
चतुर्थी तस्मै ताभ्याम् तेभ्यः
पञ्चमी तस्मात् ताभ्याम् तेभ्यः
षष्ठी तस्य तयोः तेषाम्
सप्तमी तस्मिन् तयोः तेषु
💡 विशेष (तद्): तद् (वह), एतद् (यह), यद् (जो), किम् (क्या/कौन), सर्व (सब) आदि सभी सर्वनामों के पुँल्लिंग रूप इसी 'सः, तौ, ते' की तरह ही चलते हैं (जैसे: कः कौ के, यः यौ ये, सर्वः सर्वौ सर्वे)। स्त्रीलिंग में 'सा ते ताः' और नपुंसकलिंग में 'तत् ते तानि' बनता है।

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