सावन मास 2026: सोमवार व्रत की सम्पूर्ण तिथियाँ, शिवरात्रि मुहूर्त और पूजा विधि
सनातन धर्म में श्रावण (सावन) मास का विशेष महत्व है। यह भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना है। मान्यता है कि जो भक्त सावन के सोमवार का व्रत रखते हैं और सावन शिवरात्रि पर सच्चे मन से रुद्राभिषेक करते हैं, महादेव उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। उत्तर भारतीय पंचांग (पूर्णिमान्त कैलेंडर— उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब आदि) के अनुसार, वर्ष 2026 में सावन मास 30 जुलाई (गुरुवार) से आरंभ हो रहा है और इसका समापन 28 अगस्त (शुक्रवार) को श्रावण पूर्णिमा अर्थात रक्षाबंधन के पावन पर्व पर होगा। आइए, इस वर्ष के सावन सोमवार और सावन शिवरात्रि की सटीक तिथियों और शुभ मुहूर्तों का विस्तार से दर्शन करें।
वन्दे देवमुमापतिं सुरगुरुं वन्दे जगत्कारणम्।
वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं वन्दे पशूनां पतिम्॥
वन्दे सूर्यशशाङ्कवह्निनयनं वन्दे मुकुन्दप्रियम्।
वन्दे भक्तजनाश्रयं च वरदं वन्दे शिवं शङ्करम्॥
वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं वन्दे पशूनां पतिम्॥
वन्दे सूर्यशशाङ्कवह्निनयनं वन्दे मुकुन्दप्रियम्।
वन्दे भक्तजनाश्रयं च वरदं वन्दे शिवं शङ्करम्॥
भावार्थ:
जो उमा (पार्वती) के पति हैं, देवताओं के गुरु हैं, सम्पूर्ण जगत के कारण हैं, मैं उन महादेव की वंदना करता हूँ। जो सर्पों का आभूषण और हाथों में मृग धारण करते हैं, जो पशुपति हैं, जिनके सूर्य, चंद्रमा और अग्नि रूपी तीन नेत्र हैं, जो भगवान विष्णु के प्रिय हैं, भक्तों के आश्रयदाता हैं और वरदान देने वाले हैं, उन कल्याणकारी शिव-शंकर को मैं बारंबार प्रणाम करता हूँ।
१. सावन सोमवार व्रत की सम्पूर्ण तिथियाँ (वर्ष २०२६)
सावन में सोमवार का दिन शिव आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। वर्ष 2026 में सावन के पवित्र महीने में कुल ४ (चार) सोमवार पड़ेंगे। व्रत रखने वाले और रुद्राभिषेक करने वाले साधकों के लिए तिथियों का विस्तृत विवरण नीचे तालिका (Table) में दिया गया है:
| क्र. सं. | व्रत का दिन | तिथि एवं दिनांक (2026) | विशेष महत्व |
|---|---|---|---|
| १ | पहला सावन सोमवार | 3 अगस्त 2026 (सोमवार) | श्रावण मास का प्रथम सोमवार, शिव संकल्प और व्रत आरंभ का दिन। |
| २ | दूसरा सावन सोमवार | 10 अगस्त 2026 (सोमवार) | एकादशी के ठीक बाद आने वाला पावन सोमवार, मानसिक शांति के लिए विशेष। |
| ३ | तीसरा सावन सोमवार | 17 अगस्त 2026 (सोमवार) | श्रावण शुक्ल पक्ष का सोमवार, धन-समृद्धि और आरोग्य प्राप्ति के लिए फलदायी। |
| ४ | चौथा सावन सोमवार | 24 अगस्त 2026 (सोमवार) | सावन का अंतिम सोमवार व्रत, व्रत के उद्यापन और पूर्ण फल प्राप्ति का दिन। |
२. सावन शिवरात्रि (Sawan Shivratri) 2026 का शुभ मुहूर्त
फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि के बाद, श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ने वाली 'सावन शिवरात्रि' का सबसे अधिक महत्व होता है। कांवड़िए इसी दिन पवित्र नदियों से लाया गया गंगाजल भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में अर्पित करते हैं। वर्ष 2026 में सावन शिवरात्रि का पावन पर्व 11 अगस्त (मंगलवार) को मनाया जाएगा।
सावन शिवरात्रि पूजा का सटीक मुहूर्त (11 अगस्त 2026)
- चतुर्दशी तिथि का आरंभ: 11 अगस्त 2026, प्रातः 04:54 बजे से
- चतुर्दशी तिथि का समापन: 12 अगस्त 2026, मध्यरात्रि 01:54 बजे तक
- निशीथ काल (मध्यरात्रि) मुख्य पूजा मुहूर्त: 11 अगस्त की रात (12 अगस्त की शुरुआत) 12:05 AM से 12:48 AM तक।
- (कांवड़ जलार्पण 11 अगस्त को सूर्योदय के पश्चात पूरे दिन और निशीथ काल में किया जा सकता है।)
३. सावन सोमवार व्रत की पूजा विधि
सावन सोमवार का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए शास्त्रों में बताई गई इस सरल एवं प्रामाणिक पूजा विधि का पालन करें:
- प्रातः स्नान और संकल्प: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण कर हाथ में जल और पुष्प लेकर शिवजी के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
- पवित्र अभिषेक: शिवलिंग पर तांबे के लोटे से शुद्ध जल, और चांदी या मिट्टी के पात्र से गाय का कच्चा दूध अर्पित करें। (श्रावण मास में गन्ने का रस या पंचामृत से अभिषेक करना महाफलदायी है)।
- बिल्वपत्र और धतूरा: "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते हुए 11, 21 या 108 बिल्वपत्र (बेलपत्र), भांग, धतूरा, सफेद पुष्प और भस्म अर्पित करें। बिल्वपत्र हमेशा उल्टा (चिकना भाग शिवलिंग की ओर) करके चढ़ाएं।
- माता पार्वती की पूजा: शिवजी के साथ माता पार्वती का पूजन अवश्य करें, क्योंकि गौरी-शंकर की संयुक्त पूजा से ही व्रत पूर्ण होता है। सुहागिन स्त्रियां माता को लाल सिंदूर और सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
- शाम की पूजा और पारण: प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में पुनः शिवजी की आरती करें और सावन सोमवार व्रत कथा का श्रवण करें। इसके पश्चात फलाहार या एक समय का सात्विक (बिना नमक का) मीठा भोजन ग्रहण करें।
॥ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ॥
॥ हर हर महादेव ॥
॥ हर हर महादेव ॥

