Class 8 Hindi Malhar Chapter 9 Aadmi Ka Anupat | आदमी का अनुपात भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर

Sooraj Krishna Shastri
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आदमी का अनुपात (सम्पूर्ण अभ्यास-कार्य)

नवमः पाठः (पाठ ९) — मल्हार (कक्षा ८)
  • १. मूल कविता & भावार्थ (मानव अहंकार व ब्रह्मांड का तुलनात्मक वर्णन)
  • २. कवि-परिचय (गिरिजा कुमार माथुर)
  • ३. मेरी समझ से & मिलान करें (MCQs एवं भावों का सटीक मिलान)
  • ४. सोच-विचार & अनुमान और कल्पना (संपूर्ण) (सभी वैचारिक व विस्तृत प्रश्नोत्तर)
  • ५. सृजन, कविता की रचना & व्याकरण (विशेषण-विशेष्य)
  • ६. भारतीय संख्या प्रणाली (इकाई से महाशंख तक की तालिका एवं प्रश्न)
  • ७. झरोखे से (प्रसिद्ध गीत: 'होंगे कामयाब')

मूल कविता एवं कवि-परिचय

दो व्यक्ति कमरे में —
कमरे से छोटे —
कमरा है घर में
घर है मुहल्ले में
मुहल्ला नगर में
नगर है प्रदेश में
प्रदेश कई देश में
देश कई पृथ्वी पर
अनगिन नक्षत्रों में
पृथ्वी एक छोटी
करोड़ों में एक ही
सबको समेटे है
परिधि नभ गंगा की
लाखों ब्रह्मांडों में
अपना एक ब्रह्मांड
हर ब्रह्मांड में
कितनी ही पृथ्वियाँ
कितनी ही भूमियाँ
कितनी ही सृष्टि

यह है अनुपात
आदमी का विराट से
इस पर भी आदमी
ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास लीन
संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है
अपने को दूजे का स्वामी बताता है
देशों की कौन कहे
एक कमरे में
दो दुनिया रचाता है

कवि-परिचय (गिरिजा कुमार माथुर)

गिरिजा कुमार माथुर (१९१९-१९९४): इनका जन्म अशोक नगर (मध्य प्रदेश) में हुआ था। ये आकाशवाणी में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। इनकी प्रमुख काव्य कृतियाँ 'मंजीर', 'नाश और निर्माण', 'धूप के धान', 'शिलापंख चमकीले' और 'मैं वक़्त के हूँ सामने' हैं। प्रसिद्ध भावांतर गीत 'होंगे कामयाब' की रचना भी इन्होंने ही की थी।

कविता का सम्पूर्ण भावार्थ

भावार्थ (विस्तृत व्याख्या)

इस कविता में कवि ने मनुष्य की शारीरिक लघुता (छोटेपन) और उसके विशाल अहंकार पर गहरा व्यंग्य किया है।

कवि कहते हैं कि एक कमरे में बैठे दो व्यक्ति उस कमरे से भी छोटे होते हैं। कमरा घर में, घर मुहल्ले में, मुहल्ला शहर में, शहर राज्य में, राज्य देश में और देश इस पृथ्वी पर स्थित हैं। यह पृथ्वी अनगिनत तारों और नक्षत्रों के बीच करोड़ों में केवल एक छोटी सी बिंदु मात्र है। ऐसी करोड़ों पृथ्वियों को एक आकाशगंगा समेटे हुए है और लाखों आकाशगंगाओं से एक ब्रह्मांड बनता है। ऐसे अनगिनत ब्रह्मांड इस अनंत सृष्टी में हैं।

कवि कहते हैं कि यदि ब्रह्मांड (विराट) से आदमी की तुलना (अनुपात) की जाए, तो आदमी का अस्तित्व शून्य के समान है। "इस पर भी आदमी..." यानी इतना तुच्छ होने के बावजूद मनुष्य ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ और घृणा में डूबा रहता है। वह अपने ही जैसे दूसरे मनुष्यों के बीच अनगिनत ('शंख सी') दीवारें (जाति, धर्म, अमीरी-गरीबी की) खड़ी कर लेता है। वह स्वयं को दूसरों का मालिक समझता है।

कवि अंत में कड़ा व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि "देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है।" अर्थात् देशों की सीमाएँ तो दूर की बात हैं, मनुष्य के दिलों में इतनी नफरत और दूरियाँ हैं कि एक ही कमरे में रहने वाले दो लोग भी मानसिक रूप से बँटकर अपनी अलग-अलग दुनिया बना लेते हैं।

मेरी समझ से, चर्चा एवं मिलान करें

१. कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है?
उत्तर: ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म।
२. कविता में मुख्य रूप से किन दो वस्तुओं के अनुपात को दिखाया गया है?
उत्तर: मानव और ब्रह्मांड।
३. कविता के अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है?
उत्तर: ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में।
४. कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है?
उत्तर: वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।

मिलकर करें मिलान (पंक्तियाँ और उनके अर्थ)

कविता की पंक्तियाँ (स्तंभ 1)सही अर्थ / प्रतीक (स्तंभ 2)
१. संख्यातीत शंख सी दीवारेंमनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ
२. पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एकपृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत
३. ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणामनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ
४. दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटेआदमी के संकुचित होने का प्रतीक
५. परिधि नभ गंगा कीब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक
६. एक कमरे में दो दुनिया रचातासीमित स्थान में भी अलगाव की प्रवृत्ति
✦ अनुपात: मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए किन गुणों की आवश्यकता होगी?
उत्तर: मानव को सहिष्णुता, सहयोग, समर्पण, प्रेम, शांति, उदारता और अपनत्व जैसे सकारात्मक गुणों की आवश्यकता होगी। इन गुणों को अपनाकर ही मनुष्य अपने 'अहंकार' और 'ईर्ष्या' रूपी दीवारों को तोड़कर ब्रह्मांड के समान विशाल हृदय वाला बन सकता है।

सोच-विचार के लिए (विस्तृत प्रश्नोत्तर)

(क) कविता के अनुसार मानव किन कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता है?
उत्तर: मानव अपने अहंकार (अहं), स्वार्थ, ईर्ष्या, घृणा और अविश्वास जैसी नकारात्मक भावनाओं के कारण स्वयं को कृत्रिम सीमाओं और दीवारों में बाँध लेता है।
(ख) यदि आपको इस कविता की एक पंक्ति को दीवार पर लिखना हो, जो आपको प्रतिदिन प्रेरित करे तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
उत्तर: "यह है अनुपात / आदमी का विराट से"। यह पंक्ति हमें सदैव यह याद दिलाएगी कि इस अनंत ब्रह्मांड में हमारा अस्तित्व बहुत छोटा है, अतः हमें घमंड त्याग कर विनम्रता और प्रेम से जीवन जीना चाहिए।
(ग) आपको इस कविता का भाव कैसा लगा— व्यंग्य, करुणा, चिंता या कुछ और? क्यों?
उत्तर: इस कविता का भाव 'गहरा व्यंग्य' और 'चिंता' से युक्त है। कवि व्यंग्य कर रहा है कि इतना तुच्छ (छोटा) होने के बावजूद मनुष्य खुद को दुनिया का स्वामी समझता है। साथ ही कवि को इस बात की चिंता है कि मनुष्य नफरत और ईर्ष्या के कारण एक-दूसरे से दूर होता जा रहा है।
(घ) आपके अनुसार 'दीवारें उठाना' केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम है या कुछ और भी हो सकता है?
उत्तर: 'दीवारें उठाना' केवल ईंट-पत्थर की चिनाई नहीं है। यहाँ इसका अर्थ 'मानसिक और कृत्रिम दीवारें' हैं, जो मनुष्य धर्म, जाति, भाषा, अमीरी-गरीबी, और स्वार्थ के आधार पर एक-दूसरे के दिलों के बीच खड़ी कर लेता है।
(ङ) उदाहरण देकर बताइए कि सहिष्णुता या सहयोग के कारण समाज में कैसे परिवर्तन आए हैं?
उत्तर: सहिष्णुता और आपसी सहयोग के कारण ही आज विश्व में कई राष्ट्र युद्ध छोड़कर शांति से रह रहे हैं। आपदाओं (जैसे बाढ़ या कोरोना महामारी) के समय जब लोगों ने स्वार्थ त्याग कर एक-दूसरे का सहयोग किया, तो बड़ी से बड़ी मुसीबतें भी आसानी से पार हो गईं और समाज में भाईचारा बढ़ा।

अनुमान और कल्पना (विस्तृत)

(क) यदि आप एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकते हैं, तो मानव की कौन-कौन सी आदतें बदलेंगे? क्यों?

उत्तर: मैं मानव के भीतर से अहंकार, लालच, ईर्ष्या और नफरत की आदत को हमेशा के लिए मिटा दूँगा। इसके स्थान पर मैं प्रेम, करुणा और सहयोग का भाव भर दूँगा, ताकि धरती पर कभी युद्ध या भेदभाव न हो और सभी सुखी रहें।

(ख) अंतरिक्ष यात्री बनकर ब्रह्मांड के दूसरे भाग में जाने पर आप किस स्थान को सबसे अधिक याद करेंगे?

उत्तर: मैं अंतरिक्ष से अपनी सुंदर 'पृथ्वी' (नीले ग्रह), अपने देश 'भारत', अपने घर और अपने परिवार को सबसे अधिक याद करूँगा, क्योंकि संपूर्ण ब्रह्मांड में केवल हमारी पृथ्वी पर ही जीवन, हरियाली और अपनों का प्यार मौजूद है।

(ग) सीमाओं को पार करने वाली एक कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत लिखिए:

उत्तर: मैंने मन रूपी पंख लगाए और कमरे की दीवारें पार कर आसमान में उड़ चला। मैंने बादलों को छुआ और पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलकर सीधे चाँद और मंगल ग्रह की सैर की। मैंने अपनी आँखों से मिल्की वे (आकाशगंगा) के चमचमाते तारों का नज़ारा देखा। वहाँ कोई देशों की सीमाएँ नहीं थीं, केवल असीम शांति और प्रकाश था।

(घ) "मैं ब्रह्मांड में एक... हूँ।" (अनुच्छेद)

उत्तर: "मैं ब्रह्मांड में एक नन्हें कण (धूल) के समान हूँ।" इस अनंत अंतरिक्ष और आकाशगंगाओं के सामने मेरा भौतिक शरीर अत्यंत तुच्छ है। परंतु मेरे भीतर जो विचार, प्रेम और करुणा की शक्ति है, वह मुझे इस संपूर्ण ब्रह्मांड से भी विशाल बनाती है, क्योंकि मेरा मन असीमित उड़ानों के लिए स्वतंत्र है।

(ङ) दूसरे संसार से संदेश आने पर आप किसे भेजेंगे और क्यों?

उत्तर: मैं भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (या उनके जैसे किसी महान वैज्ञानिक/दार्शनिक) के विचारों का प्रतिनिधित्व करने वाले किसी शांतिदूत को भेजूँगा, ताकि वह दूसरे संसार के लोगों को पृथ्वी की बुद्धिमत्ता, शांति और मानवीय संवेदनाओं का सही संदेश दे सके।

(च) ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ समाप्त हो जाएँ तो समाज में क्या परिवर्तन होगा?

उत्तर: यदि ये भावनाएँ समाप्त हो जाएँ, तो धरती 'स्वर्ग' बन जाएगी। अपराध, युद्ध, और गरीबी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। लोग संसाधनों को मिल-बाँट कर इस्तेमाल करेंगे और चारों ओर केवल भाईचारा, विश्वास और शांति होगी।

(छ) इस कविता का पोस्टर बनाना हो तो क्या चित्र, प्रतीक और शब्द होंगे?

उत्तर: चित्र: पृष्ठभूमि में एक विशाल आकाशगंगा (Galaxy) और अनगिनत तारे होंगे। कोने में एक बहुत छोटी सी पृथ्वी होगी और उस पृथ्वी पर एक अत्यंत सूक्ष्म आदमी खड़ा होगा। प्रतीक: आदमी के चारों ओर अहंकार और नफरत की काँटेदार तारें (दीवारें) टूटती हुई दिखाई देंगी। शब्द: "विराट ब्रह्मांड में तुच्छ है इंसान, फिर भी क्यों पाले इतना अभिमान!"

सृजन, कविता की रचना एवं विशेषण-विशेष्य

सृजन: मानसिक-चित्रण (Mind-Map)

क्रम: आदमी ➔ कमरा ➔ घर ➔ पड़ोस/मुहल्ला ➔ शहर ➔ देश ➔ पृथ्वी ➔ आकाशगंगा ➔ ब्रह्मांड।
"मैं इस चित्र में कहाँ हूँ और क्यों?" ➔ मैं इस चित्र की शुरुआत में (आदमी के रूप में) हूँ, क्योंकि मनुष्य के विचारों और अहंकार से ही यह पूरी तुलनात्मक यात्रा शुरू होती है।

कविता की रचना (विशेषताएँ और पंक्तियों का मिलान)

कविता की विशेषताएँकविता की पंक्तियाँ
१. सरल वाक्य के शब्दों को विशेष क्रम में लगाया गया है।कमरा है घर में, घर है मुहल्ले में, मुहल्ला नगर में...
२. मुहावरे का प्रयोग किया गया है।देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है।
३. छोटे से बड़े की ओर विस्तार देने के लिए शब्दों को दोहराया गया है।कमरा है घर में (कमरा, घर शब्द की आवृत्ति)।
४. प्रश्न शैली में व्यंग्य किया गया है।देशों की कौन कहे?
५. अतिशयोक्ति से भरा कथन है (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)।संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है।
६. मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य किया गया है।अपने को दूजे का स्वामी बताता है।

नोट: कविता में '—' (निदेशक चिह्न) का प्रयोग ठहराव, विचार करने के संकेत और किसी महत्वपूर्ण बात को स्पष्ट करने के लिए किया गया है।

विशेषण और विशेष्य छाँटिए

वाक्य / पंक्तिविशेषणविशेष्य
१. दो व्यक्ति कमरे मेंदोव्यक्ति
२. अनगिन नक्षत्रों मेंअनगिननक्षत्रों
३. लाखों ब्रह्मांडों मेंलाखोंब्रह्मांडों
४. अपना एक ब्रह्मांडअपना एकब्रह्मांड
५. संख्यातीत शंख सीसंख्यातीतशंख
६. एक कमरे मेंएककमरे
७. दो दुनिया रचाता हैदोदुनिया

भारतीय संख्या प्रणाली एवं झरोखे से

भारतीय संख्या प्रणाली (तालिका पर आधारित प्रश्न)

१. जिस संख्या में 15 शून्य होते हैं, उसे क्या कहते हैं?
उत्तर: पदम् (Padm / 1015)

२. महाशंख में कितने शून्य होते हैं?
उत्तर: 19 शून्य (1019)

३. एक लाख में कितने हज़ार होते हैं?
उत्तर: 100 हज़ार (सौ हज़ार)

४. तालिका के अनुसार सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है?
उत्तर: सबसे छोटी संख्या 'एक' (इकाई / 100) है और सबसे बड़ी संख्या 'महाशंख' (1019) है।

५. दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर कौन-सी संख्या आएगी?
उत्तर: एक अरब दस करोड़ (1,10,00,00,000)।

झरोखे से — होंगे कामयाब

भावांतर: गिरिजा कुमार माथुर
होंगे कामयाब
होंगे कामयाब
हम होंगे कामयाब... एक दिन
मन में है विश्वास
पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब... एक दिन

होगी शांति चारों ओर
होगी शांति चारों ओर
होगी शांति चारों ओर... एक दिन
मन में है विश्वास
पूरा है विश्वास, हम होंगे कामयाब... एक दिन

नहीं डर किसी का आज
नहीं भय किसी का आज
नहीं डर किसी का आज के दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब... एक दिन

हम चलेंगे साथ-साथ
डाल हाथों में हाथ
हम चलेंगे साथ-साथ... एक दिन
मन में है विश्वास
पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब... एक दिन

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