Class 8 Hindi Malhar Chapter 8 Naye Mehmaan | नए मेहमान एकांकी भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर

Sooraj Krishna Shastri
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नए मेहमान (सम्पूर्ण अभ्यास-कार्य एवं सारांश)

अष्टमः पाठः (पाठ ८) — मल्हार (कक्षा ८)
  • १. पाठ का सारांश & लेखक-परिचय (उदयशंकर भट्ट रचित हास्य-एकांकी)
  • २. मेरी समझ से & मिलान करें (MCQs एवं भाव मिलान का सटीक हल)
  • ३. सोच-विचार & पंक्तियों पर चर्चा (विस्तृत वैचारिक प्रश्नोत्तर)
  • ४. अनुमान और कल्पना (संपूर्ण) (सभी स्थितियों पर पूर्ण व विस्तृत उत्तर)
  • ५. एकांकी की रचना (हाँ/नहीं) & भाषा की बात (मुहावरे, 'ही/तो' निपात)
  • ६. नाप-तौल, तार-संदेश, सावधानी & झरोखे से (निराला जी) (अतिरिक्त गतिविधियाँ)

पाठ का सारांश एवं लेखक-परिचय

पाठ का सारांश ('नए मेहमान' एकांकी)

यह एकांकी एक आधुनिक शहरी मध्यवर्गीय परिवार की व्यथा और 'मान न मान मैं तेरा मेहमान' वाली स्थिति का जीवंत व हास्यपूर्ण चित्रण है। गर्मी की एक भयानक रात में विश्वनाथ और उनकी अस्वस्थ पत्नी रेवती अपने छोटे से घुटन भरे मकान में सोने की तैयारी कर रहे हैं। पड़ोसी उन्हें छत पर सोने नहीं देता। तभी अचानक नन्हेमल और बाबूलाल नाम के दो अपरिचित मेहमान आ धमकते हैं। वे बिजनौर से आए हैं और खुद को किसी 'संपतराम' या 'जगदीशप्रसाद' का रिश्तेदार बताते हैं। संकोचवश विश्वनाथ उनका सत्कार करते हैं और रेवती बीमारी में भी उनके लिए खाना बनाने को विवश हो जाती है। बाद में मेहमानों की बातों से स्पष्ट होता है कि वे किसी 'कविराज रामलाल वैद्य' के घर जाना चाहते थे, पर गलती से विश्वनाथ के घर आ गए। उनके जाते ही रेवती चैन की साँस लेती है, परंतु तभी उसका अपना सगा भाई (आगंतुक) आ जाता है, जिसे देखकर रेवती सारी बीमारी भूलकर ख़ुशी से खाना बनाने दौड़ पड़ती है।

लेखक-परिचय (उदयशंकर भट्ट)

उदयशंकर भट्ट (१८९८-१९६६): इनका जन्म इटावा (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। इन्होंने रेडियो के लिए अनेक नाटक लिखे और नाटकों/फिल्मों में अभिनय भी किया। कविता और उपन्यास लिखने के साथ-साथ इन्हें 'एकांकी' और 'नाटक' के क्षेत्र में विशेष प्रसिद्धि मिली। इनके 'लोक-परलोक' (उपन्यास) और 'पर्दे के पीछे' (एकांकी संग्रह) बहुत चर्चित रहे हैं।

मेरी समझ से, चर्चा एवं मिलान करें

१. आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को 'सीधे लड़के' किस संदर्भ में कहा?
उत्तर: बच्चों द्वारा बिना कोई प्रश्न किए और आज्ञाकारिता के भाव से बर्फ का पानी ले आने के कारण।
२. "एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी..." विश्वनाथ ने ऐसा क्यों कहा?
उत्तर: क्योंकि पड़ोसी की छत खाली होने के बावजूद वह बच्चों को वहाँ खाट नहीं बिछाने देता और उन्हें मुसीबत में देखकर प्रसन्न होता है।
३. "ईश्वर करे इन दिनों कोई मेहमान न आए।" रेवती ऐसा क्यों कह रही है?
उत्तर: भयंकर गरमी, छोटे मकान में स्थान का अभाव और स्वयं रेवती के बीमार (सिरदर्द) होने के कारण।
४. "हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए।" रेवती किस 'मुसीबत' की बात कर रही है?
उत्तर: रात के समय बिना बुलाए किसी 'मेहमान' के आ जाने की।
५. कौन-सी बात किसी रचना को 'नाटक' का रूप देती है?
उत्तर: संवाद (मंचन के साथ)।

मिलकर करें मिलान (वाक्य और उनका भाव)

एकांकी की पंक्तिसही भाव (अर्थ)
१. लाखों के आदमी खाक में मिल गए।बहुत ही समृद्ध व्यक्ति थे पर अब उनके पास कुछ भी नहीं है।
२. धोती ऐसी चर्रा रही है, जैसे पुरानी हो।कपड़ा पसीने से भीगकर पुराने जैसा हो गया है।
३. माल-मसाला तो अंटी में है न?धनराशि सुरक्षित तो है न!
४. खाने में क्या देर-दार है?भोजन की व्यवस्था कब तक हो जाएगी।
५. पहले आत्मा फिर परमात्मा।पहले अपना ध्यान (भोजन/स्वास्थ्य) फिर दूसरा काम।

सोच-विचार के लिए (विस्तृत प्रश्नोत्तर)

(क) "शहर में तो ऐसे ही मकान होते हैं।" नन्हेमल का 'ऐसे ही मकान' से क्या आशय है?
उत्तर: नन्हेमल का आशय है कि शहरों में मकान बहुत छोटे, तंग, बंद-बंद और हवा-रोशनी से रहित (घुटनभरे) होते हैं, जिनमें खुली जगह या आँगन की कमी होती है।
(ख) पड़ोसी को विश्वनाथ से किस तरह की शिकायत है? क्या पड़ोसी का व्यवहार उचित है?
उत्तर: पड़ोसी को शिकायत है कि विश्वनाथ के घर आने वाले मेहमानों ने उसकी छत पर हाथ धोकर गंदा पानी फैला दिया और उसकी खाट पर लेट गए।
मेरे विचार से: पड़ोसी का व्यवहार अनुचित और कठोर है। अनजान मेहमानों से गलती हो सकती है, जिसे प्रेम से समझाया जा सकता था। पड़ोसी होने के नाते मुसीबत में सहयोग की भावना होनी चाहिए न कि लड़ने-झगड़ने की।
(ग) विश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं जानता था, फिर भी उन्हें घर में क्यों आने देता है?
उत्तर: भारतीय संस्कृति में 'अतिथि देवो भव:' की परंपरा है। विश्वनाथ एक संकोची और शिष्ट व्यक्ति है। उसे लगा कि शायद वे किसी परिचित के भेजे हुए मेहमान हैं, इसलिए संकोच और मर्यादावश उसने उन्हें घर में आने दिया।
(घ) किन संवादों से पता चलता है कि बाबूलाल और नन्हेमल विश्वनाथ के परिचित नहीं हैं?
उत्तर: "आप कहाँ से आए हैं?", "मैं संपतराम को नहीं जानता", "कोई चिट्ठी लाए हैं? - चिट्ठी तो नहीं लाए", "कृष्णा गली तो यहाँ छह हैं", "नाम याद नहीं आता", "शायद वैद्य हैं... पर मैं तो वैद्य नहीं हूँ।" इन संवादों से स्पष्ट होता है कि वे अजनबी थे।
(ङ) किन वाक्यों से पता चलता है कि शहर में भीषण गरमी पड़ रही है?
उत्तर: "मकान है कि भट्टी!", "पत्ता तक नहीं हिल रहा है", "पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है", "सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो", "चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं", "देह गरम हो जाती है।"

अनुमान और कल्पना से (विस्तृत)

(क) विश्वनाथ ने अतिथियों के लिए स्वयं खाना बनाने के बारे में क्यों नहीं सोचा?

उत्तर: एकांकी के रचना-काल और उस समय के पारंपरिक पितृसत्तात्मक समाज के अनुसार, घर-गृहस्थी और विशेषकर 'रसोई' का काम केवल महिलाओं का ही माना जाता था। पुरुषों को खाना पकाना नहीं आता था या वे इसे अपना काम नहीं समझते थे, इसलिए विश्वनाथ ने स्वयं खाना बनाने के बारे में नहीं सोचा।

(ख) प्रमोद (बेटे) को अतिथियों के पेयजल और बहन का ध्यान रखने का उत्तरदायित्व क्यों दिया गया?

उत्तर: प्रमोद घर का बड़ा लड़का था। भारतीय परिवारों में बड़े बच्चों को बचपन से ही अतिथियों का सत्कार करने, छोटों का ध्यान रखने और माता-पिता के कार्यों में हाथ बँटाने के संस्कार दिए जाते हैं, ताकि उनमें जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।

(ग) भीषण गरमी और सिर दर्द के बावजूद रेवती भोजन बनाने के लिए क्यों तैयार हो गई?

उत्तर: रेवती को जब पता चला कि जो मेहमान आए हैं, वे वास्तव में उसका अपना सगा 'भैया' है, तो भाई के प्रति असीम प्रेम, वात्सल्य और अपनत्व के कारण वह अपनी सारी बीमारी व सिर दर्द भूल गई। भाई को भूखा न सुलाने की भावना ने उसे खाना बनाने के लिए तुरंत तैयार कर दिया।

(घ) भीषणता दर्शाने वाले वाक्य (गरमी, सर्दी और वर्षा)

गरमी की भीषणतासर्दी की भीषणता (कल्पना)वर्षा की भीषणता (कल्पना)
१. यह गरमी में भुन रहा है।यह सर्दी में जम (ठिठुर) रहा है।यह वर्षा में पूरी तरह भीग रहा है।
२. बरफ भी कोई कहाँ तक पिए।आग/अलाव भी कोई कहाँ तक तापे।छाता/रेनकोट भी कोई कहाँ तक ओढ़े।
३. शहर में आग बरस रही है।शहर में बर्फीली हवाएँ (शीतलहर) चल रही हैं।शहर जलमग्न (बाढ़ में डूबा) हो गया है।
४. प्यास बुझने का नाम नहीं लेती।हड्डियों की कँपकँपी रुकने का नाम नहीं लेती।बादलों का बरसना रुकने का नाम नहीं लेता।
५. चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।चारों तरफ दीवारें बर्फ की तरह ठंडी हो रही हैं।चारों तरफ दीवारें सीलन से टपक रही हैं।

एकांकी की रचना एवं भाषा की बात

एकांकी की रचना: वाक्यों की पहचान (हाँ / नहीं)

१. एकांकी में पूरी कहानी एक ही स्थान (घर) में घटित होती दिखाई गई है। ➔ हाँ

२. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है। ➔ नहीं (सीमित पात्र हैं)

३. एकांकी में एक कहानी छिपी है। ➔ हाँ

४. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है। ➔ नहीं (अंतर होता है, एकांकी में संवाद/अभिनय मुख्य है)

५. एकांकी में घटनाएँ अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं। ➔ नहीं (एक ही रात की घटना है)

६. एकांकी में कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है। ➔ हाँ

७. एकांकी में पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं। ➔ हाँ (ब्रैकेट में दिए गए निर्देश)

भाषा की बात: मुहावरों का प्रयोग

दिन-रात एक करना: (कठोर परिश्रम करना) राम ने परीक्षा में प्रथम आने के लिए दिन-रात एक कर दिया।

खाक में मिलना: (नष्ट हो जाना / बर्बाद होना) बाढ़ आने से किसानों की सारी फसल खाक में मिल गई।

जान में जान आना: (मुसीबत टलने पर राहत मिलना) खोए हुए बच्चे को वापस देखकर माता-पिता की जान में जान आई।

भाषा की बात: बात पर बल देना ('ही' और 'तो' निपात)

(क) 'ही' के प्रयोग से वाक्य में एक 'निश्चितता' और 'दृढ़ता' (Emphasis) का बोध होता है। 'ही' हटा देने से वाक्य साधारण बन जाता है और उसका विशेष बल (Force) समाप्त हो जाता है।

(ख) उपयुक्त स्थान पर 'ही' का प्रयोग:

१. विश्वनाथ के अतिथि यहीं रुकेंगे। (और किसी के नहीं)

२. विश्वनाथ के अतिथि यहाँ ही रुकेंगे। (कहीं और नहीं)

३. विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे ही। (निश्चित रुकेंगे)

• 'तो' का प्रयोग: "तुम तो पढ़ लो।" / "तुम पढ़ तो लो।"

पाठ से आगे, नाप-तौल, सावधानी एवं झरोखे से

पाठ से आगे & सावधानी

अपरिचितों का प्रवेश: यदि माता-पिता घर पर न हों, तो हमें किसी भी अपरिचित व्यक्ति को घर के अंदर नहीं आने देना चाहिए। दरवाजा बंद रखकर ही बात करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर पड़ोसियों या पुलिस (112) को सूचित करना चाहिए।

सामान्य अतिथियों का व्यवहार: अतिथि को मेज़बान (Host) की असुविधा का ध्यान रखना चाहिए। देर रात बिना पूर्व-सूचना के नहीं जाना चाहिए और अपनी वजह से घर वालों को कष्ट नहीं देना चाहिए।

तार से संदेश (टेलीग्राफ)

१. यह एकांकी स्वतंत्रता से पूर्व या उसके तुरंत बाद के काल (लगभग ७०-८० वर्ष पूर्व) लिखी गई होगी, जब 'तार' (Telegram) प्रचलन में था।
२. आजकल संदेश भेजने के लिए मोबाइल फोन, व्हाट्सएप (WhatsApp), ईमेल (Email), और एसएमएस (SMS) सबसे सुलभ साधन हैं।

नाप, तौल और मुद्राएँ

• (क) एक रुपये में १६ (सोलह) आने होते हैं।

• (ख) चार आने में २५ (पच्चीस) पैसे होते हैं (चवन्नी)।

• (ग) 'गज' शब्द का प्रयोग आज भी ज़मीन, कपड़े, और प्लॉट (प्लाट) की लंबाई नापने के संदर्भ में किया जाता है।

• (घ) एक गज (Yard) में ३ (तीन) फीट होते हैं।

झरोखे से: महाकवि निराला जी का आतिथ्य

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी का जीवन बेहद सादा था, परंतु वे अपने आतिथ्य सत्कार के लिए प्रसिद्ध थे। महादेवी वर्मा जी 'पथ के साथी' में लिखती हैं कि निराला जी अपने अतिथियों के लिए स्वयं खाना बनाते और उनके जूठे बर्तन तक धोते थे। आधुनिक युग में जहाँ लोग नौकरों से अतिथि-सत्कार करवाते हैं, वहीं निराला जी प्राचीन भारतीय ग्रामीण किसान की तरह 'अतिथि देवो भव:' की भावना को हृदय से जीते थे।

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