कबीर के दोहे (सम्पूर्ण अभ्यास-कार्य एवं प्रश्नोत्तर)
- १. मूल दोहे & सम्पूर्ण भावार्थ (सभी ८ दोहों की व्याख्या)
- २. मेरी समझ से & मिलान करें (MCQs एवं पंक्तियों का मिलान)
- ३. सोच-विचार & प्रश्नोत्तर (पाठ्यपुस्तक के वैचारिक प्रश्न)
- ४. अनुमान और कल्पना (विस्तृत) (सभी उप-प्रश्नों के पूर्ण उत्तर)
- ५. दोहे की रचना, कबीर हमारे समय में & साइबर सुरक्षा
- ६. पूरक कविता: 'कदम मिलाकर चलना होगा'
मूल दोहे, सारांश एवं कवि-परिचय
जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।।
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।
अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।
ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।
निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।
साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।।
कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।
✦ पाठ का सारांश एवं कवि-परिचय
सारांश: 'कबीर के दोहे' पाठ में सत्य आचरण, अहंकार-त्याग, परोपकार, गुरु का महत्त्व, जीवन में संतुलन, मिठास भरी वाणी, आलोचकों का सम्मान और सत्संगति का महान प्रभाव जैसे शाश्वत मूल्यों की सीख दी गई है।
कवि-परिचय: संत कबीरदास (१४वीं-१५वीं शताब्दी) ज्ञानाश्रयी निर्गुण शाखा के सर्वप्रमुख संत-कवि थे। वे जुलाहा थे और करघे पर कपड़ा बुनते हुए ज्ञान की बातें करते थे। उनकी रचनाएँ 'कबीर ग्रंथावली' तथा 'बीजक' में संगृहीत हैं।
दोहों का सम्पूर्ण विस्तृत भावार्थ
✦ १ से ४ दोहों का भावार्थ
१. साँच बराबर तप नहीं: सत्य के समान कोई तपस्या नहीं और झूठ के समान कोई पाप नहीं। जिसके हृदय में सत्य होता है, उसके हृदय में स्वयं ईश्वर/गुरु का वास होता है।
२. बड़ा हुआ तो क्या हुआ: केवल धन या आकार में बड़ा होना व्यर्थ है यदि आप दूसरों के काम न आ सकें। जैसे खजूर का पेड़ ऊँचा होने पर भी पथिक को छाया नहीं देता।
३. गुरु गोविंद दोऊ खड़े: गुरु और ईश्वर दोनों सामने हों तो पहले गुरु के चरण छूने चाहिए, क्योंकि गुरु ने ही ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग बताया है।
४. अति का भला न बोलना: जीवन में संतुलन आवश्यक है। न बहुत अधिक बोलना अच्छा है, न बिल्कुल चुप रहना। (जैसे अत्यधिक वर्षा और धूप दोनों नुकसानदायक हैं)।
✦ ५ से ८ दोहों का भावार्थ
५. ऐसी बानी बोलिए: अहंकार त्यागकर ऐसी मधुर वाणी बोलनी चाहिए जो दूसरों को शीतलता दे और अपने मन को भी शांत करे।
६. निंदक नियरे राखिए: अपनी आलोचना करने वाले को अपने पास रखना चाहिए, क्योंकि वह बिना पानी-साबुन के हमारी कमियाँ बताकर हमारे स्वभाव को स्वच्छ कर देता है।
७. साधू ऐसा चाहिए: सज्जन का स्वभाव 'सूप' जैसा होना चाहिए, जो काम की चीज़ (अनाज) रख ले और व्यर्थ (भूसे) को उड़ा दे।
८. कबिरा मन पंछी भया: मन पक्षी की तरह चंचल है। व्यक्ति जैसी संगति करता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है।
अभ्यास-कार्यम् : मेरी समझ से एवं मिलान
✦ दोहों की पंक्तियों का सटीक मिलान
| प्रथम पंक्ति (चरण १) | द्वितीय पंक्ति (चरण २) |
|---|---|
| गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय। | बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।। |
| अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। | अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।। |
| ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। | औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।। |
| निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। | बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।। |
| साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। | सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।। |
| कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। | जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।। |
| बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। | पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।। |
| साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। | जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।। |
अभ्यास-कार्यम् : सोच-विचार
अनुमान और कल्पना (विस्तृत प्रश्नोत्तर)
✦ (क) "गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय।"
१. यदि आपके सामने यह स्थिति होती तो आप क्या निर्णय लेते और क्यों?
उत्तर: मैं भी कबीरदास जी की भाँति पहले गुरु को ही प्रणाम करता, क्योंकि गुरु ही वह दीपक हैं जिन्होंने मेरे मन के अज्ञान को मिटाकर मुझे सही मार्ग दिखाया है।
२. यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक न होता तो क्या होता?
उत्तर: यदि गुरु न होते तो संसार अज्ञानता, अंधकार और भटकाव में डूबा रहता। मनुष्य सही-गलत का भेद नहीं कर पाता और समाज में कोई प्रगति नहीं होती।
✦ (ख) "अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।"
१. यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक बोलता है या बहुत चुप रहता है तो क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: बहुत अधिक बोलने वाले व्यक्ति की बातों का सम्मान कम हो जाता है, जबकि बहुत चुप रहने वाले व्यक्ति की प्रतिभा और विचार दुनिया जान नहीं पाती।
२. यदि वर्षा आवश्यकता से अधिक या कम हो तो क्या परिणाम हो सकते हैं?
उत्तर: वर्षा अधिक हो तो बाढ़ आ जाती है जिससे विनाश होता है, और कम हो तो सूखा पड़ जाता है जिससे फसलें नष्ट हो जाती हैं।
३. आवश्यकता से अधिक मोबाइल या मल्टीमीडिया का प्रयोग करने से क्या परिणाम हो सकते हैं?
उत्तर: इससे आँखों व स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है, एकाग्रता भंग होती है, पढ़ाई का नुकसान होता है और साइबर खतरे बढ़ जाते हैं।
✦ (ग) "साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।"
१. झूठ बोलने पर आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर: झूठ बोलने से हमारा मानसिक सुकून छिन जाता है, समाज में हमारा विश्वास खत्म हो जाता है और एक झूठ छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं।
२. कल्पना कीजिए कि आपके शिक्षक ने आपके किसी गलत उत्तर के लिए अंक दे दिए हैं, ऐसी परिस्थिति में आप क्या करेंगे?
उत्तर: मैं पूरी ईमानदारी और साहस के साथ शिक्षक के पास जाकर उन्हें गलती बताऊँगा और अपने अतिरिक्त अंक कटवा लूँगा, क्योंकि 'साँच बराबर तप नहीं'।
✦ (घ) "ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।"
१. यदि सभी मनुष्य मधुर और शांति देने वाली वाणी बना लें तो लोगों में क्या परिवर्तन आ सकते हैं?
उत्तर: समाज से लड़ाई-झगड़े, विवाद और कड़वाहट समाप्त हो जाएगी और चारों ओर प्रेम, शांति व भाईचारे का वातावरण बन जाएगा।
२. क्या कोई ऐसी परिस्थिति हो सकती है जहाँ कटु वचन बोलना आवश्यक हो?
उत्तर: हाँ, जब कोई व्यक्ति गलत मार्ग पर जा रहा हो, किसी पर अत्याचार कर रहा हो, या बच्चों को कठोर अनुशासन सिखाना हो, तब उन्हें सही रास्ते पर लाने के लिए कड़े (कटु) वचनों का प्रयोग करना पड़ सकता है।
अनुमान और कल्पना (भाग-२) एवं दोहे की रचना
✦ (ङ) "बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।"
१. अहंकार रखने वाले को आप क्या समझाएँगे?
उत्तर: मैं उसे समझाऊँगा कि असली बड़प्पन धन या कद में नहीं, बल्कि दूसरों के काम आने और परोपकार करने में है।
२. खजूर, नारियल आदि ऊँचे वृक्ष किस प्रकार से उपयोगी हो सकते हैं?
उत्तर: खजूर और नारियल मीठे फल देते हैं। नारियल का पानी सेहतमंद होता है। इनके पत्तों और जटाओं से चटाई, झाड़ू और मजबूत रस्सियाँ बनाई जाती हैं।
३. कक्षा नायक (मॉनीटर) चुनने के लिए किन विशेषताओं पर ध्यान देंगे?
उत्तर: मॉनीटर में नम्रता, सबको साथ लेकर चलने की क्षमता (सहयोग), जिम्मेदारी, ईमानदारी और पक्षपात न करने की विशेषताएँ होनी चाहिए।
✦ (च) "निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।"
१. कोई गलतियाँ बताता रहे तो क्या लाभ होगा?
उत्तर: इससे हमें अपनी कमियाँ पता चलेंगी, जिन्हें सुधारकर हम अपने स्वभाव और आचरण को बेहतर बना सकेंगे।
२. समाज में कोई भी एक-दूसरे की गलतियाँ न बताए तो क्या होगा?
उत्तर: लोग अपनी कमियों से अनजान रहेंगे, उनमें अहंकार बढ़ जाएगा और समाज पतन व बुराइयों की ओर चला जाएगा।
✦ (छ) "साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।"
१. 'सूप' जैसी विशेषता हो तो आपके जीवन में क्या परिवर्तन आएँगे?
उत्तर: मेरे भीतर विवेक जागृत होगा। मैं व्यर्थ की बुराइयों और नकारात्मक बातों को अनदेखा कर दूँगा और केवल उपयोगी व अच्छी बातों को ग्रहण करूँगा।
२. बिना सोचे-समझे हर बात स्वीकार कर लें तो क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: ऐसा करने से हम आसानी से भ्रमित हो जाएँगे, अंधविश्वास में पड़ जाएँगे और कोई भी हमारा धोखा देकर गलत फायदा उठा लेगा।
✦ (ज) "कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।"
१. यदि मन पंछी की तरह उड़ सकता तो कहाँ ले जाते और क्यों?
उत्तर: मैं अपने मन को प्राकृतिक और शांत स्थानों (जैसे पहाड़, नदियाँ) पर ले जाना चाहता, जहाँ शोरगुल न हो और शांति प्राप्त हो सके।
२. संगति का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: हम जिनके साथ रहते हैं, हमारी आदतें और विचार वैसे ही बन जाते हैं। अच्छी संगति उन्नति की ओर और बुरी संगति पतन की ओर ले जाती है।
✦ दोहे की रचना (काव्य-शिल्प / विशेषताएँ)
• अनुप्रास (एक अक्षर): "निंदक नियरे", "सार सार"।
• पुनरुक्ति (एक शब्द दो बार): "सार-सार", "अति-अति"।
• विपरीतार्थक शब्द: बोलना-चूप, बरसना-धूप, साँच-झूठ।
• तुलना/प्रतीक: खजूर (अहंकार), सूप (विवेक), पंछी (चंचल मन)।
• वर्तनी बदलाव: 'चुप' के स्थान पर 'चूप', 'हृदय' के स्थान पर 'हिरदे' (मात्रा व लय हेतु)।
आज के समय में, साइबर सुरक्षा एवं पूरक कविता
✦ कबीर हमारे समय में & साइबर सुरक्षा
१. साइबर सुरक्षा (अति का भला न बोलना): इंटरनेट या सोशल मीडिया पर अनावश्यक रूप से अपनी व्यक्तिगत जानकारी शेयर करना खतरे को निमंत्रण देना है। डिजिटल दुनिया में भी अपनी 'वाणी' और डेटा का संतुलन आवश्यक है।
२. सूचना का सूप (साधू ऐसा चाहिए): इंटरनेट पर लाखों सूचनाएँ हैं। हमें सूप की तरह केवल प्रामाणिक और ज्ञानवर्धक बातों (सार) को ग्रहण करना चाहिए और 'फेक न्यूज़' व भ्रामक बातों (थोथा) को तुरंत उड़ा देना चाहिए।
✦ आज के समय में (व्यावहारिक स्थितियाँ)
• अमित की गलत संगति ➔ "कबिरा मन पंछी भया... जो जैसी संगति करै सो तैसा फल पाय।।"
• इंटरनेट की सही जानकारी चुनना ➔ "साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।।"
• मित्र द्वारा कमियाँ बताना ➔ "निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।।"
• रीमा का शांति से बात करना ➔ "ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।।"
• बोलचाल में संतुलन ➔ "अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।।"
पढ़ने के लिए — कदम मिलाकर चलना होगा
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पाँवों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों से हँसते-हँसते,
आग लगा कर जलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।।
हास्य-रुदन में, तूफानों में,
अमर असंख्यक बलिदानों में,
उद्यानों में, वीरानों में,
अपमानों में, सम्मानों में,
उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
पीड़ाओं में पलना होगा!
कदम मिलाकर चलना होगा।।
उजियारे में, अंधकार में,
कल कछार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को दलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।।
सम्मुख फैला अमर ध्येय पथ,
प्रगति चिरंतन कैसा इति अथ,
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
असफल, सफल समान मनोरथ,
सब कुछ देकर कुछ न माँगते,
पावस बनकर ढलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।।
कुश काँटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुवन,
पर-हित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन को शत-शत आहूति में,
जलना होगा, गलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।
✦ पूरक कविता का संक्षिप्त भावार्थ
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की यह प्रेरणादायी कविता राष्ट्रीय एकता, सामूहिक प्रयास, अटूट संकल्प और त्याग की भावना सिखाती है। कवि कहते हैं कि जीवन में चाहे कितनी भी विपत्तियाँ, अंगारे, अपमान, हार या विपरीत परिस्थितियाँ आएँ, हमें घबराए बिना स्वाभिमान के साथ निरंतर आगे बढ़ते रहना होगा। राष्ट्र की प्रगति के लिए व्यक्तिगत इच्छाओं और अरमानों का त्याग करके, समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ 'कदम मिलाकर' चलना होगा।

