Class 8 Hindi Malhar Chapter 7 Mat Bandho | मत बाँधो कविता भावार्थ एवं प्रश्नोत्तर

Sooraj Krishna Shastri
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मत बाँधो (सम्पूर्ण अभ्यास-कार्य एवं भावार्थ)

सप्तमः पाठः (पाठ ७) — मल्हार (कक्षा ८)
  • १. मूल कविता & भावार्थ (महादेवी वर्मा की कविता की व्याख्या)
  • २. मेरी समझ से & मिलान करें (MCQs एवं भाव मिलान)
  • ३. सोच-विचार (क से ङ) & अनुमान और कल्पना (विस्तृत वैचारिक प्रश्न)
  • ४. कविता की रचना & शब्दकोश से (काव्य-शिल्प एवं शब्दार्थ)
  • ५. सृजन (विराम चिह्न व पत्र) & वाद-विवाद (रचनात्मक गतिविधियाँ)
  • ६. शिल्प-कार्य मिलान, आपदा प्रबंधन & भाषा की बात (व्याकरण)

मूल कविता, सारांश एवं कवयित्री-परिचय

इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो !
सौरभ उड़ जाता है नभ में
फिर वह लौट कहाँ आता है?
बीज धूलि में गिर जाता जो
वह नभ में कब उड़ पाता है?
अग्नि सदा धरती पर जलती
धूम गगन में मँडराता है!

सपनों में दोनों ही गति हैं
उड़ कर आँखों में आता है!
इसका आरोहण मत रोको
इसका अवरोहण मत बाँधो !

मुक्त गगन में विचरण कर यह
तारों में फिर मिल जायेगा,
मेघों से रंग औ' किरणों से
दीप्ति लिए भू पर आयेगा।
स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प
भूमि को सिखलायेगा!
नभ तक जाने से मत रोको
धरती से इसको मत बाँधो !
इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो !

पाठ का सारांश

'मत बाँधो' महादेवी वर्मा जी द्वारा रचित प्रेरणादायक कविता है। इसमें कवयित्री सपनों और स्वतंत्र विचारों के महत्व को दर्शाती हैं। वे कहती हैं कि सपनों की उड़ान को किसी बंधन में नहीं बाँधना चाहिए। सुगंध, बीज और अग्नि केवल एक दिशा में जाते हैं, परंतु 'सपने' ऐसे हैं जिनमें आरोहण (ऊपर उठना) और अवरोहण (धरातल पर आना) दोनों गतियाँ होती हैं। स्वतंत्र सपने आकाश की ऊँचाइयों को छूकर धरती पर लौटते हैं और इसे 'स्वर्ग' बनाने की कला सिखाते हैं।

कविता का सम्पूर्ण विस्तृत भावार्थ

प्रथम पद (पंक्ति १ से ८)

भावार्थ: कवयित्री समाज से आग्रह करती हैं कि वे मानवीय सपनों और स्वतंत्र विचारों के पंख मत काटें। कवयित्री उदाहरण देती हैं कि जब फूल की सुगंध (सौरभ) आकाश में उड़ जाती है, तो लौटकर वापस नहीं आती। जो बीज मिट्टी में गिर जाता है, वह आकाश में नहीं उड़ पाता। अग्नि धरती पर जलती है और उसका धुआँ आकाश में मँडराता है। इन सब में केवल एक ही दिशा की गति होती है।

द्वितीय पद (पंक्ति ९ से १२)

भावार्थ: परंतु 'सपनों' की विशेषता सबसे अलग है। सपनों में दोनों प्रकार की गतियाँ होती हैं। यह कल्पना की ऊँची उड़ान भी भरता है और फिर लौटकर हमारी आँखों (वास्तविकता) में भी बस जाता है। इसलिए कवयित्री कहती हैं कि सपनों के ऊपर उठने (आरोहण) को मत रोको और न ही उनके धरातल पर उतरने (अवरोहण) को बाँधो।

तृतीय पद (पंक्ति १३ से २२)

भावार्थ: जब सपनों को स्वतंत्र छोड़ दिया जाएगा, तो वे आकाश में घूमकर तारों की ऊँचाइयों को छुएँगे। फिर वे बादलों से रंग और सूर्य की किरणों से प्रकाश लेकर धरती पर लौटेंगे। ये स्वतंत्र विचार धरती को 'स्वर्ग' के समान सुंदर बनाने की नई कला सिखाएँगे। इसलिए सपनों को न आकाश तक जाने से रोको और न ही उन्हें धरती की सीमाओं में बाँधो।

अभ्यास-कार्यम् : मेरी समझ से एवं मिलान

(१) आप इनमें से कविता का मुख्य भाव किसे समझते हैं?
उत्तर: सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए।
(२) 'मत बाँधो' कविता किसकी स्वतंत्रता की बात करती है?
उत्तर: सपनों की।
(३) "इन सपनों के पंख न काटो" पंक्ति में सपनों के 'पंख' होने की कल्पना क्यों की गई है?
उत्तर: सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं (कल्पनाशीलता के लिए)।
(४) "स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प" पंक्ति में 'स्वर्ग' से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो।
(५) यदि बीज धूल में गिर जाए तो क्या हो सकता है?
उत्तर: वह बढ़कर पौधा बन सकता है (परंतु आकाश में नहीं उड़ सकता)।

मिलकर करें मिलान (काव्य पंक्तियाँ एवं भाव)

कविता की पंक्ति सही भाव अथवा संदर्भ
१. इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ तो वह उड़ नहीं सकता, वैसे ही सपनों को बाधित करें तो कल्पनाशीलता समाप्त हो जाएगी।
२. सपनों में दोनों ही गति हैं / उड़कर आँखों में आता है!सपनों में ऊपर उठने (आरोहण) और नीचे आने (अवरोहण) दोनों की विशेषता होती है। सपना विचार की तरह जन्म लेता है और व्यवहार में पूरा होता है।
३. इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो!सपनों के उठने (आरोहण) और उनके व्यवहार में वापस आने (अवरोहण) में बाधा न डालें, क्योंकि स्वतंत्रता ही सपनों को साकार करने की कुंजी है।
४. नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो!सपनों को ऊँचाइयों तक जाने से मत रोको। उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो।
५. स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकता है।

सोच-विचार (विस्तृत प्रश्नोत्तर)

(क) कविता में 'मत बाँधो', 'पंख न काटो' आदि संबोधन किसके लिए किए गए होंगे?
उत्तर: ये संबोधन समाज के उन रूढ़िवादी लोगों के लिए हैं जो नई पीढ़ी के विचारों और कल्पनाओं को स्वतंत्र उड़ान भरने से रोकते हैं।
(ख) कविता में सपनों की गति न बाँधने की बात क्यों कही गई होगी?
उत्तर: यदि सपनों की गति बाँध दी गई, तो मनुष्य की रचनात्मकता और कल्पनाशीलता समाप्त हो जाएगी, जिससे संसार के विकास और नवनिर्माण का मार्ग अवरुद्ध हो जाएगा।
(ग) कविता में सौरभ, बीज, धुआँ आदि से सपनों को भिन्न बताया गया है। सपनों की और कौन-सी विशेषताएँ हो सकती हैं?
उत्तर: सौरभ, बीज या धुआँ केवल एक दिशा में जा सकते हैं, परंतु सपने असीम होते हैं। सपनों में अतीत की यादें, भविष्य की योजनाएँ, सृजनात्मकता और असंभव को संभव कर दिखाने की असीमित शक्ति होती है।
(घ) आपने 'आरोहण' और 'अवरोहण' को कब-कब सार्थक होते देखा?
उत्तर: जब कोई वैज्ञानिक अंतरिक्ष में जाने का सपना देखता है (आरोहण) और फिर उसे साकार करने के लिए धरती पर रॉकेट बनाता है (अवरोहण), तब यह सार्थक होता है।
(ङ) "सपनों में दोनों ही गति है/ उड़कर आँखों में आता है!" क्या आप सहमत हैं कि सपने 'आँखों में लौटकर' वास्तविकता बन जाते हैं? उदाहरण दें।
उत्तर: हाँ, मैं पूर्णतः सहमत हूँ। जब कोई व्यक्ति अपनी आँखों में कोई बड़ा सपना संजोता है और उस पर कठोर परिश्रम करता है, तो वह सपना एक दिन वास्तविकता बनकर साकार हो जाता है। उदाहरण के लिए, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का भारत को सशक्त बनाने का सपना उनके अथक प्रयासों से वास्तविकता में बदल गया।

अनुमान और कल्पना (विस्तृत प्रश्नोत्तर)

(क) नया संसार बनाना हो तो क्या-क्या रखेंगे और क्या नहीं?

उत्तर: मैं नए संसार में समानता, शांति, हरियाली, प्रेम और शिक्षा को रखूँगा। मैं वहाँ से युद्ध, गरीबी, भेदभाव और प्रदूषण को पूरी तरह हटा दूँगा।

(ख) आप जीवन को सुंदर बनाने के लिए कौन-सी कला सीखना चाहेंगे?

उत्तर: मैं 'चित्रकला' या 'संगीत कला' सीखना चाहूँगा। चित्रकला से मैं प्रकृति की सुंदरता को कैनवास पर उतार सकूँगा और संगीत से लोगों के मन को शांति दे सकूँगा।

(ग) बीते हुए समय में लौटने का अवसर मिले तो क्या परिवर्तन करेंगे?

उत्तर: मैं अपने बचपन की उन गलतियों को सुधारूँगा जहाँ मैंने समय बर्बाद किया था और उन अवसरों का लाभ उठाऊँगा जो मुझसे छूट गए थे।

(घ) यदि सपने बीज की तरह हों तो उन्हें उगने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होगी?

उत्तर: उन्हें अंकुरित होने के लिए 'कठोर परिश्रम' रूपी धूप, 'निरंतर अभ्यास' रूपी जल, और 'दृढ़ निश्चय' रूपी उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होगी।

(ङ) यदि अच्छे सपनों से स्वर्ग बन सकता है तो बुरे सपनों या विचारों से क्या होता होगा?

उत्तर: बुरे और नकारात्मक विचारों से समाज में हिंसा, आतंकवाद और विनाश फैलता है। इनसे बचने के लिए हमें अच्छी पुस्तकें पढ़नी चाहिए और सत्संगति में रहना चाहिए।

(च) यदि हर किसी को सपने देखने की स्वतंत्रता मिल जाए, तब दुनिया कैसी होगी?

उत्तर: वह दुनिया अत्यंत उन्नत और रचनात्मक होगी। हर कोई अपनी प्रतिभा का 100% उपयोग करेगा। उस दुनिया में 'स्वतंत्रता' के साथ 'सकारात्मकता और आपसी सहयोग' सबसे महत्वपूर्ण बातें होंगी।

(छ) "इन सपनों के पंख न काटो..." यह सुझाव है, आदेश या प्रार्थना? किससे कही जा रही है?

उत्तर: यह एक भावपूर्ण 'प्रार्थना' और 'सुझाव' दोनों है। यह बात समाज के उन बड़े-बुजुर्गों और रूढ़िवादियों से कही जा रही है जो अपनी पुरानी सोच के कारण युवाओं को नए सपने देखने से रोकते हैं।

कविता की रचना एवं शब्दकोश से

कविता की रचना (काव्य-विशेषताओं का मिलान)

कवयित्री ने अपनी बात समझाने के लिए कई शब्द-चित्रों और काव्यात्मक विशेषताओं का प्रयोग किया है:

कविता की विशेषताएँ कविता से उदाहरण (पंक्तियाँ)
१. एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोगइसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो!
२. एक ही शब्द का प्रयोग बार-बार किया गया है।इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!
३. समानार्थी शब्दों का प्रयोग किया गया है।नभ तक जाने से मत रोको (नभ/गगन)
४. प्रश्न पूछा गया है।वह नभ में कब उड़ पाता है?
५. संबोधन का प्रयोग किया गया है।धरती से इसको मत बाँधो!

शब्दकोश से: 'शिल्प' और उससे जुड़े शब्द

शब्दकोश के अनुसार 'शिल्प' का अर्थ है: हाथ से चीज़ बनाना, कला, कौशल, या निर्माण। इसी आधार पर अन्य शब्दों के अर्थ:

१. शिल्पकार / शिल्पी: कारीगर, दस्तकार या कलात्मक वस्तुओं का निर्माता।

२. शिल्पकला: हस्तकला, कारीगरी या दस्तकारी की कला।

३. शिल्पकौशल: कारीगरी में निपुणता या विशेष योग्यता।

४. शिल्पगृह / शिल्पगेह: वह स्थान जहाँ शिल्प का कार्य होता है (कारखाना/वर्कशॉप)।

५. शिल्पविद्या: शिल्प निर्माण का ज्ञान, विज्ञान या वास्तुकला (Architecture)।

६. शिल्पशाला: कारीगरी सिखाने या करने का स्थान या प्रशिक्षण केंद्र।

सृजन, वाद-विवाद एवं आपदा प्रबंधन

सृजन (क) विराम चिह्न का फेरबदल

विराम चिह्न के बदलने से वाक्य का अर्थ पूरी तरह बदल जाता है।
१. रोको मत, जाने दो (बिना रोके जाने दिया जाए)।
२. रोको, मत जाने दो (जाने से रोका जाए)।

चित्रों व स्थितियों के अनुसार उचित वाक्य का प्रयोग:

छुट्टियाँ समाप्त: रोको, मत जाने दो।

सैनिक जाने को तैयार: रोको मत, जाने दो।

यह बाघ विचरण क्षेत्र है: रोको, मत जाने दो।

तुम मत जाओ...: रोको, मत जाने दो।

मतदान केंद्र: रोको मत, जाने दो。

सृजन (ग) खोया-पाया (पत्र लेखन)

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
राजकीय विद्यालय, नई दिल्ली।
विषय: खोए हुए सपने (प्रेरणा) की सूचना हेतु।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि विगत कुछ दिनों से पढ़ाई के अत्यधिक तनाव के कारण मेरा 'भविष्य का सुनहरा सपना' कहीं खो गया है। उस सपने में वैज्ञानिक बनने की प्रेरणा निहित थी। आपसे निवेदन है कि विद्यालय में सकारात्मक मार्गदर्शन और प्रेरणादायक सेमिनार का आयोजन कराएँ, जिससे मुझे मेरा खोया हुआ सपना वापस मिल सके।
धन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी शिष्य।

वाद-विवाद (अनुच्छेद)

विषय: "व्यक्ति को बाँध सकते हैं उसकी कल्पना और विचारों को नहीं।"
यह सर्वथा सत्य है कि शारीरिक रूप से किसी व्यक्ति को जंजीरों में कैद किया जा सकता है, परंतु उसके मन, कल्पना और विचारों को कोई भी शक्ति बाँध नहीं सकती। स्वतंत्रता सेनानियों को जेल में डाल दिया गया था, परंतु उनके स्वतंत्र विचारों ने ही पूरे देश में क्रांति की ज्वाला भड़काई। विचार वायु के समान स्वतंत्र होते हैं जो सीमाओं को पार कर नया सृजन करते हैं।

आपदा प्रबंधन योजना

अचानक आग लगने पर: फायर ब्रिगेड (101) को बुलाएँ, लिफ्ट का प्रयोग न करें, और मुँह पर गीला रुमाल रखें।
बाढ़ आने पर: ऊँचे सुरक्षित स्थानों पर जाएँ, बिजली के उपकरणों को बंद कर दें।
भूकंप आने पर: खुली जगह पर जाएँ, यदि अंदर हों तो मजबूत मेज के नीचे छिप जाएँ।

शिल्प-कार्य मिलान एवं भाषा की बात

शिल्प-कार्यों का सही मिलान

शिल्प-कार्य सही अर्थ या व्याख्या
१. काष्ठ शिल्पलकड़ी से वस्तुएँ, खिलौने, मूर्तियाँ आदि बनाना।
२. मृत्तिका शिल्पमिट्टी से बर्तन, दीये, मूर्तियाँ और सजावटी चीजें बनाना।
३. धातु शिल्पताँबा, पीतल, लोहे जैसी धातुओं से दीपक, थालियाँ आदि बनाना।
४. काँच शिल्पकाँच से झूमर, सजावटी वस्तुएँ और रंगीन सजावटी कार्य।
५. वस्त्र शिल्पकपड़ों पर कढ़ाई, बुनाई, छपाई, बंधेज आदि।
६. कागज शिल्पकागज से खिलौने, लिफाफे और पेपर मेशी बनाना।
७. पत्थर शिल्पसंगमरमर या अन्य पत्थरों से मूर्तियाँ बनाना।
८. चमड़ा शिल्पचमड़े से जूते, बेल्ट, बैग आदि बनाना।
९. बाँस और बेंत शिल्पबाँस और बेंत से टोकरियाँ, कुर्सियाँ आदि बनाना।
१०. मोती एवं आभूषण शिल्परंग-बिरंगे मोतियों से हार, कंगन आदि गहने बनाना।
११. लाख शिल्पलाख से चूड़ियाँ, खिलौने आदि बनाना।
१२. शीशा शिल्पकपड़ों या सजावट की वस्तुओं में शीशे जड़ना।
१३. चित्रकला शिल्पपारंपरिक चित्रकलाओं (मधुबनी, गोंड) से कलाकृतियाँ बनाना।
१४. नक्काशी शिल्पलकड़ी, पत्थर या धातु पर बारीक खुदाई द्वारा डिजाइन बनाना।

भाषा की बात: 'आरोहण' और 'अवरोहण' का प्रयोग

• पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर आरोहण कर विजय प्राप्त की।

• नदियाँ विशाल पर्वतों से अवरोहण करते हुए सागर में मिल जाती हैं。

• अंकगणित में बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखने की प्रक्रिया अवरोहण क्रम कहलाती है。

काल परिवर्तन

वर्तमान काल: सौरभ उड़ जाता है नभ में।

भूतकाल: सौरभ उड़ गया नभ में।

भविष्य काल: सौरभ उड़ जाएगा नभ में।

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