भागवत सप्ताह के छठे दिन गाए जाने वाले गीत

Sooraj Krishna Shastri
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भागवत सप्ताह के छठे दिन गाए जाने वाले गीत

भागवत सप्ताह के छठे दिन गाए जाने वाले गीत। यह चित्र अजामिल की कथा, प्रह्लाद चरित्र, भगवान नृसिंह का अवतार, और भक्ति के महत्व को दर्शाता है। यह भक्ति, दिव्यता, और आध्यात्मिक मुक्ति के गहरे संदेशों को जीवंत करता है। 




भागवत सप्ताह के छठे दिन गाए जाने वाले गीत

 भागवत सप्ताह के छठे दिन गाए जाने वाले गीत मुख्यतः अजामिल की कथा, प्रह्लाद चरित्र, नृसिंह अवतार, और भक्ति के महत्व पर आधारित होते हैं। इन गीतों का उद्देश्य श्रोताओं को भक्ति, विश्वास, और भगवान की कृपा का महत्व समझाना होता है। यहाँ 10-10 पंक्तियों में छठे दिन के प्रसंगों के अनुसार गीत प्रस्तुत हैं:

1. अजामिल की कथा पर गीत

"अजामिल ने बुरे कर्म किए, पापों का भार बढ़ाया।

पर अंत समय में 'नारायण' नाम, जीवन को धन्य बनाया।

नारायण नाम की शक्ति से, पाप सभी मिट गए।

यमदूत भी हार मान गए, विष्णुदूत साथ हो गए।

हरि नाम ने उसे बचाया, मोक्ष का द्वार दिखाया।

पापों के बोझ तले दबा, भक्त ने भक्ति को अपनाया।

नाम स्मरण का पाठ सिखाया, यही है जीवन का सहारा।

हरि नाम का जप कर लो, यही भवसागर का किनारा।

नाम की महिमा अपार है, यही सबके जीवन का सार है।

हरि के चरणों में झुको, यही सबसे बड़ा सहारा है।" 

2. प्रह्लाद की भक्ति पर गीत

"प्रह्लाद ने भक्ति की राह चुनी, विष्णु को दिल में बसाया।

पिता हिरण्यकशिपु ने किया विरोध, फिर भी हरि नाम अपनाया।

अग्नि में बिठाया, सर्पों से डसवाया, फिर भी अडिग रहे।

भक्ति की शक्ति के आगे, हर संकट दूर हो गए।

पर्वत से गिराया, समुद्र में फेंका, पर हरि ने रक्षा की।

प्रह्लाद की दृढ़ता ने, हरि की महिमा को गाया।

हरि भक्ति से विजय पाई, सत्य का मार्ग दिखाया।

प्रह्लाद ने सिखाया हमें, विश्वास अडिग बनाए रखना।

हर संकट में हरि नाम, जीवन को शांति दिलाए रखना।

प्रेम से हरि का गुण गाओ, सच्चा भक्त कहलाओ।" 

3. नृसिंह अवतार पर गीत

"खंभे से प्रकट हुए भगवान, नृसिंह का रूप दिखाया।

हिरण्यकशिपु के घमंड को, हरि ने पल में मिटाया।

संध्या समय, द्वार पर बैठकर, नाखून से वध किया।

भक्त के विश्वास को निभाने, हरि ने चमत्कार किया।

भक्तवत्सल हरि की महिमा, सारा जग गाता है।

जहां भी भक्त पुकार करें, हरि वहीं आता है।

नृसिंह ने सिखाया हमको, अधर्म का अंत जरूरी है।

धर्म की रक्षा के लिए, हरि का हर रूप जरूरी है।

भक्त की भक्ति का मान रखें, यही हरि का काम है।

हरि की लीला अपरंपार, हर भक्त को उनसे प्यार है।" 

4. भक्ति और विश्वास का महत्व

"भक्ति में है शक्ति भारी, यही जीवन का आधार है।

हर संकट मिट जाता है, जब हरि का साथ है।

विश्वास रखो भगवान पर, सबकुछ संभल जाएगा।

सत्य के मार्ग पर चलकर, जीवन सफल हो जाएगा।

प्रह्लाद की भक्ति ने सिखाया, सच्चा भक्त कहलाए।

हरि नाम जपो, जीवन का हर दुख मिट जाए।

भक्ति में डूबो, मोह माया को छोड़ दो।

हरि के चरणों में लगन लगाओ, भवसागर को पार करो।

हरि भक्ति का पाठ पढ़ो, यही जीवन का सच्चा आधार है।

हरि नाम से जीवन संवरता, यही सबका उद्धार है।" 

5. सामूहिक कीर्तन का गीत

"हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम, हरे राम, राम राम हरे हरे।

हरि नाम का संकीर्तन, सब पापों को हर लेता।

हरि के चरणों का स्मरण, हर संकट को मिटा देता।

प्रेम से गाओ हरि का नाम, मन को शांति मिलती है।

भक्ति की यह सरल राह, हर जीव को मोक्ष दिलाती है।

हरि का नाम है सबसे प्यारा, यही भक्तों का सहारा।

गाओ हरि का गुणगान, जीवन में सुख अपार है।

भक्तिमय बनाओ अपना जीवन, हरि नाम है सबसे महान।

हरे कृष्ण की गूंज से, हर दिल में आए भगवान।" 

6. नृसिंह स्तुति का गीत

"नृसिंह का रूप है अद्भुत, भक्तों का मान बढ़ाया।

सत्य की विजय के लिए, हरि ने अधर्म मिटाया।

खंभे से प्रकट हुए हरि, भक्त की रक्षा की।

हिरण्यकशिपु का अंत कर, धर्म की ज्योति जलाई।

नृसिंह की लीला अपरंपार, सारा जग गाता है।

जहां भी भक्त पुकारें, हरि वहीं आता है।

हर संकट को हरने वाले, भक्तों के पालनहारे।

धर्म की ज्योति जलाने वाले, हरि हमारे सहारे।

नृसिंह के चरणों में झुको, भक्तों का उद्धार करो।

हरि नाम का स्मरण करो, जीवन को सफल बनाओ।" 

गीतों का महत्व:

1. भक्ति का प्रचार: ये गीत भक्तों को भक्ति और भगवान की कृपा का महत्व समझाते हैं।

2. संकल्प और प्रेरणा: प्रह्लाद की भक्ति और नृसिंह अवतार का संदेश श्रोताओं को सिखाता है कि भक्ति से हर बाधा को पार किया जा सकता है।

3. समर्पण: भगवान की लीला और उनकी सर्वव्यापकता को सरल और भावनात्मक रूप से प्रस्तुत करते हैं।

4. भावनात्मक जुड़ाव: गीत कथा के साथ श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं और भक्ति के मार्ग पर प्रेरित करते हैं।

 भागवत सप्ताह के छठे दिन गाए जाने वाले गीत भक्ति, विश्वास, और भगवान की सर्वव्यापकता को समझाते हैं, जिससे श्रोताओं का भक्ति और धर्म के प्रति झुकाव बढ़ता है।


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